Spiritual News Articles

कुछ याद रहे कुछ भुला दिए

कुछ याद रहे कुछ भुला दिए हम प्रतिक्षण बढ़ते जाते हैं, हर पल छलकते जाते हैं, कारवां पीछे नहीं दिखता, हर चेहरे बदलते जाते हैं। हर पल का संस्मरण लिए, कुछ धरे, कुछ विस्मृत किए, अनगिनत शब्दों को सजाकर कुछ याद रहे कुछ भुला दिए। कितने पगडंडी पर चले, कितने उपवन, डगर मिले,...

चौरासी लाख योनियों का रहस्य

चौरासी लाख योनियों का रहस्य हिन्दू धर्म में पुराणों में वर्णित ८४००००० योनियों के बारे में आपने कभी ना कभी अवश्य सुना होगा। हम जिस मनुष्य योनि में जी रहे हैं वो भी उन चौरासी लाख योनियों में से एक है। अब समस्या ये है कि कई लोग ये नहीं समझ पाते कि वास्तव में इन योनियों...

देवर्षि नारद

जब दूसरा सत्ययुग चल रहा था, उस सतयुग में सारस्वत नामक एक ब्राह्मण हुए, उन्हें सारे वेद वेदाङ्ग पुराण कंठस्थ थे । उत्तम बुद्धि तो ब्राह्मण के पास थी ही, साथ ही उनके पास अचूक सम्पति और सेवा करने वाले अनेको सेवको की भरमार थी ।। एक दिन देवयोग से ब्राह्मण एकांत में बैठकर...

भगवान परशुराम

भगवान परशुराम परशुराम जी स्वभाव से क्यों थे इतने क्रोधी? आखिर क्षत्रियों से क्यों हुआ इनको बैर? सूर्य पुत्र वैवस्वत मनु हुए, इन्हें श्राद्धदेव भी कहते थे। इनकी पत्नी श्रद्धादेवी से एक कन्या हुई, नाम था इला। इला को वशिष्ठ जी ने अपने तप बल से लड़का बना दिया। नाम पड़ा...
मां नर्मदा

मां नर्मदा

मां नर्मदा कहते हैं नर्मदा ने अपने प्रेमी शोणभद्र से धोखा खाने के बाद आजीवन कुंवारी रहने का फैसला किया लेकिन क्या...

जीवन का कठोर सत्य

जीवन का कठोर सत्य

जीवन का कठोर सत्य भगवान विष्णु गरुड़ पर बैठ कर कैलाश पर्वत पर गए। द्वार पर गरुड़ को छोड़ कर स्वयं शिव से मिलने अंदर चले...

महर्षि दधीचि

महर्षि दधीचि

महर्षि दधीचि दधीचि वैदिक ऋषि थे। उनके पिता एक महान ऋषि अथर्वा जी थे और माता का नाम शांति था। वे ब्राह्मण कुल के थे।...

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अनंत चतुर्दशी

अनंत चतुर्दशी

अनंत चतुर्दशी 14 गांठों का रहस्य? इस दिन भगवान विष्णु के अनंत रूप की पूजा की जाती है। इस दिन 14 गांठों वाला अनंत सूत्र...

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कर्मबीज

कर्मबीज

कर्मबीज मैं रहूं या ना तुम चलो खुद से पथ मिलेगा। नैपथ्य जो है अंधेरे में तो भी क्या लव साथ है अहर्निश तू जला बूझा सो...

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ऐसो गति करो नन्दलाल।

ऐसो गति करो नन्दलाल।

ऐसो गति करो नन्दलाल। गंगा जमुना जल मुखमांहि, कण्ठ तुलसीका माल॥०१॥ महाप्रसाद नित भोजन होवे, पादोदक सोहे भाल॥०२॥ सन्ध्या...

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