देवर्षि-पितृ-मनुष्याणां तर्पणविधि

by | Sep 21, 2021 | 0 comments

।। देवर्षि-पितृ-मनुष्याणां तर्पणविधि।।
पवित्रिधारणम्-

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ऊँ अपवित्रः पवित्रोवा सर्वावस्थां गतोऽपि वा। यः स्मरेत् पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यंतरः शुचिः।।
संकल्प- अक्षत, जल, त्रिकुशा लेकर-
ऊँ विष्णुः ३ श्रीमद्भगवतो विष्णुराज्ञया प्रवर्तमानस्य नर्मदाया दक्षिण दिग्भागे …. नाम संवत्सरे श्रीसूर्य ….. अयने आश्विन मासे पितृपक्षे ….. तिथौ ….. वासरे ….. गोत्रोत्पन्न ….. शर्माहं देवर्षिपितृमनुष्याणां तर्पणमहं करिष्ये।
पूर्वमें- (त्रिकुशा से)-
ऊँ ब्रह्माद्यादेवता सर्वे ऋषयोमुनयस्तथा। असुरायातुधानश्च मातरश्चण्डिकास्तथा।।
दिक्पालालोकपालाश्च सर्वे देवाधिदेवता।
ते सर्वे तृप्तिमायान्तु मद्दत्तेनांबुना सदा।।
उत्तर में- (कण्ठोत्तरी-त्रिकुशा से)-
अत्रिर्मरीचिरंगिरा पुलस्त्य पुलहस्तथा।
सनकः सनंदनश्चैव सनातनस्तृतीयकः।।
वशिष्ठो नारदश्चैव भृगुश्चैव प्रचेतसा।
आसुरिः कपिलश्चैव वोढुः पंचशिखस्तथा।।
ते सर्वे तृप्तिमायान्तु मद्दत्तेनांबुना सदा।।
दक्षिण में- (त्रिकुशा को छोड़ मोटक से, अपसव्य (बांया घुटना मोड़कर)
यमाय धर्मराजाय मृत्यवे चांतकाय च।औदुम्बराय दध्नाय नीलाय परमेष्ठिने।
वृकोदराय चित्राय चित्रगुप्ताय वै नमः।
ते सर्वे तृप्तिमायान्तु मद्दत्तेनांबुना सदा।।
पुनः अक्षत लेकर-
अस्मत् पिता, प्रपिता, वृद्धप्रपिता वसुरूद्रस्वरूपेभ्यः इदं जलं तेभ्यः स्वधा नमः।। ३ बार।।
अस्मत् माता, प्रमाता, वृद्धप्रमाता इदं ताभ्यः स्वधा नमः।। ३ बार।।
अस्मत् नाना, प्रनाना, वृद्धप्रनाना इदं जलं तेभ्य स्वधा नमः।। ३ बार।।
अस्मत् नानी, प्रनानी, वृद्धप्रनानी इदं जलं ताभ्यः स्वधा नमः।। ३ बार।।
अन्यान्य परिवार का नाम लेकर इसी तरह तर्पण करे। पुनः-
ये के चास्मत् कुले जाता अपुत्रा गोत्रिणो मृता।
ते सर्वे तृप्तिमायान्तु मद्दत्तेनांबुना सदा।।
आब्रह्मस्तम्ब पर्यन्तं देवर्षि पितृ मानवाः।
ते सर्वे तृप्तिमायान्तु मद्दत्तेनांबुना सदा।।
मातृमातामहादयः ते सर्वे तृप्तिमायान्तु मद्दत्तेनांबुना सदा।।
पुनः- वैयाघ्रपद गोत्राय सांकृत्य प्रवराय च। अपुत्राय जलं दद्यात् गंगापुत्राय भीष्मणे।
पूर्वमें- (त्रिकुशा से)-
एहि सूर्य सहस्रांशो तेजोराशे जगत्पते। अनुकम्पय मां भक्त्या गृहाणार्घ्यं दिवाकर।। सूर्य दर्शन।।
विसर्जन- (दोनों कुशा से)-
यस्य स्मृत्या च नामोक्त्या तपोयज्ञ क्रियादिशु। न्यूनं संपूर्णतां यातु सद्यो वन्दे तमच्युतम्।।
उत्तरीय को भूमिपर निचोड़े-
अग्नि दग्धाश्च ये जीवा येऽप्यदग्धा कुले मम।
ते सर्वे तृप्तिमायान्तु मद्दत्तेनांबुना सदा।।
ऊँ केशवाय नमः। ऊँ माधवाय नमः। ऊँ नारायणाय नमः।।
अनेन तर्पणेन पितृरूपी जनार्दनः प्रीयतां।।
स्व. श्रीशत्रुघ्न प्रसाद शर्मा जी महाराज
(पूज्य नानाश्री)
ग्रा0 छिरहा

Written By Chhatradhar Sharma

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