Bhagawat Katha

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श्रीमद्भागवत कथा Bhagawat Katha तिथि निर्धारण

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श्रीमद्भागवतामृतम्। सप्ताह कथा 07 दिवस

भागवत कथा Bhagawat Katha

सच्चिदानन्दरूपय विश्वोत्पत्तिदि हेतवे।
तत्रयविनाशाय श्रीकृष्णाय वयं नुमःना

यः पठेत् प्रयत्तो नित्यं श्लोक भागवतं सुत |
अष्टादशपुराणानां फलमाप्नोति मानवः ||

जो प्रतिदिन पवित्रचित्त होकर भागवत के एक श्लोक का पाठ करता है, वह मनुष्य अठारह पुराणोंके पाठ का फल प्राप्त करता है कलियुग में जहाँ-जहाँ पवित्र भागवातशास्त्र रहता है वहाँ-वहाँ मैं इस प्रकार रहता हूँ, जैसे पुत्रवत्सला गाय अपने बछड़े के पीछे-पीछे। जाता है-
यत्र यत्र भवेत् पुण्यं शास्त्रं भागवतं कलौ |
तत्र तत्र सदैवयं भवामि त्रिदशैः सह ||
यत्र यत्र चतुर्वक्त्र श्रीमद्भागवतं भवेत् |
गच्छामि तत्र तत्राहं गौर्यथा सुतवत्सला ||

Bhagawat Katha

सूतजी ने शौनकजीको भागवत की महिमा बताते हुए कहा है -
एतस्माद्परं किञ्चिन्मनःशुध्यै न विद्यते |
जन्मनाराय भवेत्पुराण्यं तदा भागवतं लभयेत् ||

भागवत कथा से सम्बद्ध तीन संवाद है- (१) सूतजी-शौनकजीका, (२) सनकादि-नारदका, (३) शुकदेव-परीक्षितका | येमे प्रमुख संवाद शुकदेव-परीक्षितका ह भागवत-महात्म्य मे शौनकजी सूतजी से पूछते है कि भक्ति, ज्ञान, वैराग्यकी प्राप्ति का कोई सरल उपाय बताईये | कोई ऐसा साधन बताईये, जिससे इस कलिकाल के पापों से मुक्त होकर व्यक्ति मोक्ष को प्राप्त कर सके | तब सूतजी ने कहा कि मनुष्य को सभी पापों से मुक्ति दिलाकर मोक्ष प्रदान करने वाला शास्त्र भागवत-पुराण है सूतजी ने शौनकजी से इसकी महिमा का बखान किया और कहा कि अब मैं आपको वह कथा सुनाता हूँ, जो सनकादिक ऋषियों ने नारदजी को सुनाई थी |

Bhagawat Katha

भागवत कथा

गोपीगीतम्

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