१. पुरुष एवं स्त्री भेद सिद्धान्त:
"सव्यं गात्रं प्रकम्पेत् स्त्रीणां सौख्यप्रवर्धनम्। दक्षिणे पुरुषाणां तु सर्वकार्यफलप्रदम्॥"
पुरुषों का दाहिना अंग फड़कना कार्य-सिद्धि, विजय एवं धनलाभ कराता है। स्त्रियों का बायाँ अंग फड़कना सौभाग्य, ऐश्वर्य व मनोवांछित फल देता है।
२. मध्य अंग स्फुरण विचार:
ललाट (माथा), नासिका (नाक), कण्ठ, दोनों होंठ अथवा नाभि जैसे केंद्रीय अंगों का फड़कना स्त्री एवं पुरुष दोनों के लिए प्रायः समान शुभ फलदायक माना जाता है।
३. स्फुरण काल का फल प्रभाव:
प्रातःकाल का स्फुरण उसी दिन फल देता है। दोपहर का स्फुरण पक्ष (15 दिन) में तथा संध्याकाल का स्फुरण मास (1 माह) में अपना पूर्ण प्रभाव प्रकट करता है।
४. अशुभ स्फुरण शान्ति मन्त्र:
यदि कोई अशुभ अंग लगातार फड़के तो तांबे के पात्र में जल लेकर मुख देखकर "ॐ नमः शिवाय" अथवा "महामृत्युंजय मन्त्र" पढ़कर आचमन करें।