✍️ CD Sharma · 📅 20 Aug 2026 · 🏷️ एकादशी व्रत, एकादशी कथा, भगवान विष्णु, व्रत नियम, cdsharma.in
सनातन धर्म में एकादशी व्रत को समस्त व्रतों का राजा माना गया है। पद्म पुराण के अनुसार, एकादशी केवल एक तिथि मात्र नहीं है, बल्कि भगवान श्रीहरि विष्णु के तेज से प्रकट हुई साक्षात एक दिव्य शक्ति हैं।
"न गंगा सदृशं तीर्थं न देवः केशवात्परः। न चैकादशी समं किञ्चित् पावनं भुवि विद्यते॥"
(अर्थात्: गंगा जैसा कोई तीर्थ नहीं, श्रीहरि जैसा कोई देव नहीं और एकादशी जैसा पृथ्वी पर कोई पावन व्रत नहीं।)
दैत्य मुर का आतंक और देवताओं का पलायन
सत्ययुग में 'मुर' नामक एक महाबलशाली और क्रूर दैत्य ने अपने तप और शक्ति के बल पर स्वर्गलोक पर अधिकार कर लिया। इंद्र, वरुण, यमराज और अग्नि सहित सभी देवता स्वर्ग छोड़कर त्राहि-त्राहि करते हुए भगवान शिव की शरण में पहुंचे। महादेव के परामर्श पर सभी देवताओं ने जगत के पालनकर्ता भगवान श्रीहरि विष्णु से रक्षा की प्रार्थना की।
हेमावती गुफा और देवी का प्राकट्य
देवताओं के उद्धार के लिए भगवान विष्णु और दैत्य मुर के बीच सैकड़ों वर्षों तक भीषण युद्ध हुआ। युद्ध के उपरांत जब श्रीहरि बद्रिकाश्रम स्थित 'हेमावती' गुफा में योगनिद्रा में विश्राम करने लगे, तब दैत्य मुर उन्हें निद्रा में ही मारने के उद्देश्य से गुफा में प्रविष्ट हुआ।
जैसे ही मुर ने शस्त्र उठाया, उसी क्षण भगवान श्रीहरि के दिव्य शरीर से एक अलौकिक, रूपवती और अस्त्र-शस्त्रों से सुसज्जित देवी प्रकट हुईं।
मुर का वध और भगवान विष्णु का वरदान
देवी ने दैत्य मुर को भीषण युद्ध में ललकारा और अपने चक्र से क्षणभर में उसका वध कर दिया। जब भगवान विष्णु योगनिद्रा से जागे, तो उन्होंने मुर को मृत पाकर अत्यंत प्रसन्नता प्रकट की।
श्रीहरि ने वरदान देते हुए कहा:
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