✍️ CD Sharma · 📅 18 Oct 2026 · ⏱️ 1 मिनट का पठन · 🏷️ भगवती पद्यपुष्पांजलि स्तोत्रम्, महिषासुरमर्दिनि स्तोत्रम्, अयि गिरिनंदिनि, दुर्गा स्तोत्र, Bhagavati Padya Pushpanjali Stotram, Mahishasuramardini Stotram, Aigiri Nandini lyrics in Hindi, Durga Stotram with Hindi meaning, cdsharma.in
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श्री भगवत्यै नमः ॥
हिन्दी अनुवाद: भगवती जगदम्बा को सादर प्रणाम।
भगवति भगवत्पदपङ्कजं
भ्रमरभूतसुरासुरसेवितम् ।
सुजनमानसहंसपरिस्तुतं
कमलयाऽमलया निभृतं भजे ॥ १॥
हिन्दी अनुवाद: हे भगवती! भौंरों के समान विनीत सुरों और असुरों द्वारा सेवित, श्रेष्ठ संतों के मनरूपी हंसों द्वारा प्रशंसित तथा निर्मल लक्ष्मी जी द्वारा नित्य पूजित आपके पावन चरणकमलों की मैं एकाग्रचित्त होकर निरंतर उपासना करता हूँ।
ते उभे अभिवन्देऽहं विघ्नेशकुलदैवते । नरनागाननस्त्वेको नरसिंह नमोऽस्तुते ॥ २॥
हिन्दी अनुवाद: मैं विघ्नों का हरण करने वाले उन दोनों कुलदेवताओं की वंदना करता हूँ—जिनमें एक मनुष्य और गजमुख वाले (श्री गणेश) हैं तथा दूसरे मनुष्य और सिंह स्वरूप वाले (श्री नृसिंह) हैं; आपको मेरा बारंबार नमस्कार है।
हरिगुरुपदपद्मं शुद्धपद्मेऽनुरागाद्-
विगतपरमभागे सन्निधायादरेण ।
तदनुचरि करोमि प्रीतये भक्तिभाजां
भगवति पदपद्मे पद्यपुष्पाञ्जलिं ते ॥ ३॥
हिन्दी अनुवाद: भगवान श्रीहरि और सद्गुरु के चरणकमलों को अपने विशुद्ध हृदय-कमल में परम आदरपूर्वक स्थापित करके, हे भगवती! मैं आपकी अनुचरी बनकर भक्तजनों की प्रसन्नता के लिए आपके पावन श्रीचरणों में यह पद्य-पुष्पांजलि अर्पित करता हूँ।
केनैते रचिताः कुतो न निहिताः शुम्भादयो दुर्मदाः
केनैते तव पालिता इति हि तत् प्रश्ने किमाचक्ष्महे । ब्रह्माद्या अपि शंकिताः स्वविषये यस्याः प्रसादावधि प्रीता सा महिषासुरप्रमथिनी च्छिन्द्यादवद्यानि मे ॥ ४॥
हिन्दी अनुवाद: उन मदान्ध शुम्भ-निशुम्भ आदि दैत्यों को किसने रचा, वे पहले ही नष्ट क्यों नहीं कर दिए गए और इस सृष्टि में उनका पालन कैसे हुआ—इन प्रश्नों का हम क्या उत्तर दे सकते हैं? जिनकी कृपा और लीला की थाह पाने में ब्रह्मा आदि देवगण भी संशय में पड़ जाते हैं, वे महिषासुर का संहार करने वाली प्रसन्नचित्त भगवती मेरे समस्त पापों और दोषों का नाश करें।
पातु श्रीस्तु चतुर्भुजा किमु चतुर्बाहोर्महौजान्भुजान् धत्तेऽष्टादशधा हि कारणगुणाः कार्ये गुणारम्भकाः । सत्यं दिक्पतिदन्तिसंख्यभुजभृच्छम्भुः स्वय्म्भूः स्वयं धामैकप्रतिपत्तये किमथवा पातुं दशाष्टौ दिशः ॥ ५॥
हिन्दी अनुवाद: क्या चार भुजाओं वाली महालक्ष्मी अथवा चतुर्भुज भगवान के महातेजस्वी भुजबल को व्यक्त करने के लिए आप अठारह भुजाएँ धारण करती हैं? क्योंकि कारण के गुण ही कार्य में प्रवृत्त होते हैं। अथवा क्या दसों दिशाओं के दिग्पालों और आठ दिशाओं के दिग्गजों की संख्या के समान अठारह भुजाएँ धारण करके अथवा समस्त अठारह दिशाओं-उपदिशाओं की रक्षा करने हेतु आपने यह विराट स्वरूप धारण किया है!
प्रीत्याऽष्टादशसंमितेषु युगपद्द्वीपेषु दातुं वरान् त्रातुं वा भयतो बिभर्षि भगवत्यष्टादशैतान् भुजान् । यद्वाऽष्टादशधा भुजांस्तु बिभृतः काली सरस्वत्युभे मीलित्वैकमिहानयोः प्रथयितुं सा त्वं रमे रक्ष माम् ॥ ६॥
हिन्दी अनुवाद: हे भगवती! क्या अठारह द्वीपों में एक साथ वरदान देने अथवा उन्हें भयमुक्त करने के लिए आप अठारह भुजाएँ धारण करती हैं? अथवा महाकाली और महासरस्वती—दोनों के स्वरूपों को एकीभूत करके इस जगत में प्रकट करने हेतु ही आपने ये भुजाएँ धारण की हैं? हे भगवती रमे! आप मेरी रक्षा करें।
छन्दः ॥
अयि गिरिनंदिनि नंदितमेदिनि विश्वविनोदिनि नंदनुते
गिरिवरविंध्यशिरोधिनिवासिनि विष्णुविलासिनि जिष्णुनुते ।
भगवति हे शितिकण्ठकुटुंबिनि भूरिकुटुंबिनि भूरिकृतेजय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ १॥
हिन्दी अनुवाद: हे गिरिराज हिमालय की कन्या! पृथ्वी को आनंदित करने वाली, संपूर्ण विश्व को हर्षित रखने वाली, नंदी आदि गणों द्वारा वंदित, विंध्याचल के शिखर पर निवास करने वाली, भगवान विष्णु को आनंद देने वाली, देवराज इंद्र द्वारा स्तुत, नीलकंठ भगवान शिव की अर्धांगिनी, विशाल चराचर जगत को कुटुंब मानने वाली और विपुल कल्याण करने वाली, हे सुंदर जटाओं वाली महिषासुरमर्दिनी शैलपुत्री! आपकी सदा जय हो, जय हो!
सुरवरवर्षिणि दुर्धरधर्षिणि दुर्मुखमर्षिणि हर्षरते
त्रिभुवनपोषिणि शंकरतोषिणि किल्बिषमोषिणि घोषरते ।
दनुजनिरोषिणि दितिसुतरोषिणि दुर्मदशोषिणि सिन्धुसुते जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ २॥
हिन्दी अनुवाद: हे देवताओं पर अभीष्ट वरदानों की वर्षा करने वाली, दुर्दम्य शत्रुओं का घमंड तोड़ने वाली, दुर्मुख जैसे दैत्यों का मानमर्दन करने वाली, नित्य आनंदमयी, तीनों लोकों का पोषण करने वाली, भगवान शंकर को संतुष्ट करने वाली, पापों का नाश करने वाली, ओंकार ध्वनि में मग्न रहने वाली, दिति-पुत्र दैत्यों पर क्रोध करने वाली, उनके दुर्मद को सुखाने वाली और समुद्र से प्रकट लक्ष्मी स्वरूपा! हे सुंदर जटाओं वाली महिषासुरमर्दिनी पर्वतपुत्री! आपकी सदा जय हो!
अयि जगदंब मदंब कदंबवनप्रियवासिनि हासरते शिखरिशिरोमणितुङ्गहिमालयशृंगनिजालयमध्यगते । मधुमधुरे मधुकैटभगंजिनि कैटभभंजिनि रासरते जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ ३॥
हिन्दी अनुवाद: हे संपूर्ण जगत की जननी, मेरी माता! कदंब के रमणीय वन में प्रीतिपूर्वक निवास करने वाली, मधुर मुस्कान से युक्त, पर्वतों में श्रेष्ठ उत्तुंग हिमालय के शिखरों पर अपने दिव्य धाम में विराजने वाली, मधु के समान मधुर स्वभाव वाली, मधु और कैटभ दैत्यों का मानमर्दन करने वाली और दिव्य रासलीला में लीन रहने वाली! हे सुंदर जटाओं वाली महिषासुरमर्दिनी शैलसुते! आपकी सदा जय हो!
अयि शतखण्डविखण्डितरुण्डवितुण्डितशुण्डगजाधिपते रिपुगजगण्डविदारणचण्डपराक्रमशुण्ड मृगाधिपते । निजभुजदण्डनिपातितखण्डनिपातितमण्डभटाधिपते जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ ४॥
हिन्दी अनुवाद: हे रणभूमि में शत्रु पक्ष के ऐरावत आदि गजराजों की सूंड काटकर उनके धड़ों को सैकड़ों टुकड़ों में छिन्न-भिन्न करने वाली! जिनके वाहन सिंह का पराक्रम शत्रु हाथियों के मस्तक विदीर्ण करने में अत्यंत प्रचंड है, तथा जो अपनी भुजाओं के बल से शत्रु सेनापतियों के सिर काटकर धराशायी कर देती हैं, हे सुंदर जटाओं वाली महिषासुरमर्दिनी शैलसुते! आपकी सदा जय हो!
अयि रणदुर्मदशत्रुवधोदितदुर्धरनिर्जरशक्तिभृते चतुरविचारधुरीणमहाशिवदूतकृतप्रमथाधिपते । दुरितदुरीहदुराशयदुर्मतिदानवदूतकृतांतमते जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ ५॥
हिन्दी अनुवाद: हे युद्धोन्मत्त शत्रुओं का वध करने हेतु प्रकट हुई देवताओं की अमोघ शक्ति को धारण करने वाली! जिन्होंने चतुर विचारकों में शिरोमणि देवाधिदेव शिवजी को अपना दूत बनाया तथा पापी, दुराचारी, दुर्बुद्धि दानवों के दूत के लिए यमराज समान संहारक बुद्धि प्रकट की, हे सुंदर जटाओं वाली महिषासुरमर्दिनी शैलसुते! आपकी सदा जय हो!
अयि शरणागतवैरिवधूवरवीरवराभयदायकरे त्रिभुवनमस्तकशूलविरोधिशिरोधिकृतामलशूलकरे । दुमिदुमितामरदुंदुभिनादमहोमुखरीकृततिग्मकरे जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ ६॥
हिन्दी अनुवाद: हे शरण में आई हुई शत्रु-स्त्रियों के वीर पतियों को भी अभयदान देने वाले करकमलों वाली! तीनों लोकों को संताप देने वाले शत्रुओं के मस्तक पर प्रहार करने हेतु निर्मल त्रिशूल धारण करने वाली, तथा देव-दुंदुभियों के 'दुमि-दुमि' गंभीर घोष से सूर्यमंडल तक को गुंजायमान कर देने वाली, हे सुंदर जटाओं वाली महिषासुरमर्दिनी शैलसुते! आपकी सदा जय हो!
अयि निजहुँकृतिमात्रनिराकृतधूम्रविलोचनधूम्रशते समरविशोषितशोणितबीजसमुद्भवशोणितबीजलते । शिवशिव शुंभनिशुंभमहाहवतर्पितभूतपिशाचरते जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ ७॥
हिन्दी अनुवाद: हे अपनी मात्र एक 'हुंकार' से धूम्रलोचन और उसकी सैकड़ों दैत्य सेना को भस्म कर देने वाली! समरांगण में रक्तबीज के रक्त से उत्पन्न होने वाले रक्तबीजों की परंपरा को पूर्णतः सुखा देने वाली, तथा शुम्भ-निशुम्भ के भीषण संग्राम में भूत-पिशाचों को तृप्त करने वाली, हे कल्याणमयी सुंदर जटाओं वाली महिषासुरमर्दिनी शैलसुते! आपकी सदा जय हो!
धनुरनुसंगरणक्षणसंगपरिस्फुरदंगनटत्कबके कनकपिशंगपृषत्कनिषंगरसद्भटशृंगहतावटुके । कृतचतुरङ्गबलक्षितिरङ्गघटद्बहुरङ्गरटद्बटुके जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ ८॥
हिन्दी अनुवाद: हे धनुष की टंकार और युद्ध के क्षणों में चमकते हुए अंगों के साथ लहराते केशपाश वाली! सुवर्ण के समान चमकीले बाणों से भरे तरकश धारण कर गर्जना करने वाले बड़े-बड़े योद्धाओं का संहार करने वाली, तथा रणभूमि रूपी रंगमंच पर चतुरंगिणी सेना के विविध रंगों और विकराल कोलाहल को शांत करने वाली, हे सुंदर जटाओं वाली महिषासुरमर्दिनी शैलसुते! आपकी सदा जय हो!
सुरललनाततथेयितथेयितथाभिनयोत्तरनृत्यरते हासविलासहुलासमयि प्रणतार्तजनेऽमितप्रेमभरे । धिमिकिटधिक्कटधिकटधिमिध्वनिघोरमृदंगनिनादरते जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ ९॥
हिन्दी अनुवाद: हे देवांगनाओं के 'त-थेई-त-थेई' लयबद्ध अभिनय और नृत्यों से आनंदित होने वाली! हास्य-विलास एवं उल्लास से परिपूर्ण, शरण में आए दुखी भक्तों पर असीम प्रेम बरसाने वाली, तथा 'धिमिकिट-धिक्कट-धिमि' की गंभीर ध्वनि करने वाले मृदंगों के निनाद में मग्न रहने वाली, हे सुंदर जटाओं वाली महिषासुरमर्दिनी शैलसुते! आपकी सदा जय हो!
जय जय जप्यजये जयशब्दपरस्तुतितत्परविश्वनुते झणझणझिञ्जिमिझिंकृतनूपुरसिंजितमोहितभूतपते । नटितनटार्धनटीनटनायकनाटितनाट्यसुगानरते जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ १०॥
हिन्दी अनुवाद: हे जपने योग्य विजय मंत्रों, 'जय-जय' शब्दों और उत्तम स्तुतियों द्वारा संपूर्ण विश्व से पूजित! 'झण-झण झिंजिम' ध्वनि करते हुए नूपुरों की झंकार से भगवान शिव को मोहित करने वाली, तथा अर्धनारीश्वर रूप में नट-नटी के नायक देवाधिदेव शिव के साथ अभिनित नाट्य और मधुर गान में लीन रहने वाली, हे सुंदर जटाओं वाली महिषासुरमर्दिनी शैलसुते! आपकी सदा जय हो!
अयि सुमनःसुमनः सुमनः सुमनः सुमनोहरकांतियुते श्रितरजनीरजनीरजनीरजनीरजनीकरवक्त्रवृते । सुनयनविभ्रमरभ्रमरभ्रमरभ्रमरभ्रमराधिपते जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ ११॥
हिन्दी अनुवाद: हे सुंदर पुष्पों के समान कोमल और देवताओं के मनों को हरने वाली अत्यंत मनोहर कांति से युक्त! रात्रि को प्रकाशित करने वाले पूर्ण चंद्रमा के समान सौम्य मुखमंडल वाली, तथा सुंदर नेत्रों के विलास से भौरों के समूह को भी लज्जित करने वाली चंचल दृष्टि की स्वामिनी, हे सुंदर जटाओं वाली महिषासुरमर्दिनी शैलसुते! आपकी सदा जय हो!
सहितमहाहवमल्लमतल्लिकमल्लितरल्लकमल्लरते विरचितवल्लिकपल्लिकमल्लिकझिल्लिकभिल्लिकवर्गवृते । सितकृतफुल्लिसमुल्लसितारुणतल्लजपल्लवसल्ललिते जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ १२॥
हिन्दी अनुवाद: हे भीषण महासंग्राम में श्रेष्ठ योद्धाओं और मल्लों के साथ युद्ध में प्रवृत्त होने वाली! सुंदर लताओं, वन-कुंजों, चमेली के फूलों, झींगुरों की ध्वनियों और भील स्त्रियों के समूह से घिरी रहने वाली, तथा खिले हुए श्वेत व लाल वर्ण के श्रेष्ठ नूतन पल्लवों के समान अत्यंत सुकोमल एवं सुंदर, हे महिषासुरमर्दिनी शैलसुते! आपकी सदा जय हो!
अविरलगण्डगलन्मदमेदुरमत्तमतङ्गजराजपते त्रिभुवनभूषणभूतकलानिधिरूपपयोनिधिराजसुते । अयि सुदती जनलालसमानसमोहनमन्मथराजसुते जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ १३॥
हिन्दी अनुवाद: हे जिनके कपोलों से निरंतर मद बहता है ऐसे मदमस्त गजराजों की स्वामिनी! तीनों लोकों के आभूषणस्वरूप चंद्रमा के समान सौंदर्य वाली एवं क्षीरसागर की कन्या (महालक्ष्मी) स्वरूपा! हे सुंदर दंतपंक्ति वाली, सांसारिक जीवों के मन को मुग्ध करने वाले कामदेव को भी पराजित करने वाली पराशक्ति, हे सुंदर जटाओं वाली महिषासुरमर्दिनी शैलसुते! आपकी सदा जय हो!
कमलदलामलकोमलकांतिकलाकलितामलभाललते सकलविलासकलानिलयक्रमकेलिचलत्कलहंसकुले । अलिकुलसङ्कुलकुवलयमण्डलमौलिमिलद्भकुलालिकुले जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ १४॥
हिन्दी अनुवाद: हे कमल की पंखुड़ियों के समान निर्मल, कोमल और दिव्य कांति से सुशोभित सुंदर ललाट वाली! समस्त कलाओं और विलासों के आश्रयस्वरूप, जिनकी सुंदर मंद गति राजहंसों के समूह को भी लजा देती है, तथा भौरों से घिरे नीलकमलों और मौलसिरी (बकुल) के फूलों से सुसज्जित केशपाश वाली, हे सुंदर जटाओं वाली महिषासुरमर्दिनी शैलसुते! आपकी सदा जय हो!
करमुरलीरववीजितकूजितलज्जितकोकिलमञ्जुमते मिलितपुलिन्दमनोहरगुञ्जितरन्जितशैलनिकुञ्जनिकुञ्जगते । निजगुणभूतमहाशबरीगणसद्गुणसंभृतकेलितले जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ १५॥
हिन्दी अनुवाद: हे करकमलों की मुरली की मधुर तान से कोयल की कूक को भी लज्जित कर देने वाली मधुर बुद्धि स्वरूपा! पर्वत-कुंजों में विचरण करते हुए भील जनों के मनोहर गीतों से आनंदित रहने वाली, तथा अपने दैवीय गुणों से युक्त शबरीगणों के साथ पर्वत की तलहटियों में क्रीड़ा करने वाली, हे सुंदर जटाओं वाली महिषासुरमर्दिनी शैलसुते! आपकी सदा जय हो!
कटितटपीतदुकूलविचित्रमयूखतिरस्कृतचंद्ररुचे प्रणतसुरासुरमौलिमणिस्फुरदंशुलसन्नखचंद्ररुचे । जितकनकाचलमौलिपदोर्जितनिर्झरकुंजरकुंभकुचे जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ १६॥
हिन्दी अनुवाद: हे कमर पर बंधे पीले रेशमी वस्त्र (पीतांबर) की अनुपम कांति से चंद्रमा की आभा को भी फीका कर देने वाली! नतमस्तक सुर-असुरों के मुकुट-मणियों की किरणों से जिनके चरण-नखों की चंद्रिका और अधिक देदीप्यमान हो उठती है, तथा सुमेरु पर्वत के शिखरों और ऐरावत के गजकुंभों को भी परास्त करने वाले दिव्य वक्षस्थल से शोभित, हे सुंदर जटाओं वाली महिषासुरमर्दिनी शैलसुते! आपकी सदा जय हो!
विजितसहस्रकरैकसहस्रकरैकसहस्रकरैकनुते कृतसुरतारकसङ्गरतारकसङ्गरतारकसूनुसुते । सुरथसमाधिसमानसमाधिसमाधिसमाधिसुजातरते जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ १७॥
हिन्दी अनुवाद: हे सहस्रों किरणों वाले सूर्य के तेज को परास्त करने वाली तथा सहस्रों भुजाओं व स्तुतियों से पूजित! तारकासुर के साथ हुए महायुद्ध में देवताओं के उद्धारक कार्तिकेय को जन्म देने वाली, तथा राजा सुरथ और समाधि वैश्य के समान एकाग्र समाधि में लीन भक्तों को परम शांति व मुक्ति प्रदान करने वाली, हे सुंदर जटाओं वाली महिषासुरमर्दिनी शैलसुते! आपकी सदा जय हो!
पदकमलं करुणानिलये वरिवस्यति योऽनुदिनं स शिवे अयि कमले कमलानिलये कमलानिलयः स कथं न भवेत् ।
तव पदमेव परंपदमेवमनुशीलयतो मम किं न शिवे जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ १८॥
हिन्दी अनुवाद: हे दया की सागर कल्याणमयी शिवे! जो व्यक्ति आपके चरणकमलों की प्रतिदिन निष्काम भाव से सेवा करता है, हे कमलवासिनी महालक्ष्मी! वह स्वयं लक्ष्मी का धाम (समृद्धिशाली) क्यों न होगा? अतः आपके पावन चरणों को ही परमपद मानकर निरंतर ध्यान करने वाले मुझ पर क्या आपका कल्याण नहीं बरसेगा? हे सुंदर जटाओं वाली महिषासुरमर्दिनी शैलसुते! आपकी सदा जय हो!
कनकलसत्कलसिन्धुजलैरनुसिञ्चिनुते गुण रङ्गभुवं भजति स किं न शचीकुचकुंभतटीपरिरंभसुखानुभवम् ।
तव चरणं शरणं करवाणि नतामरवाणिनिवासि शिवं जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ १९॥
हिन्दी अनुवाद: हे भगवती! जो भक्त स्वर्ण कलशों में भरे पवित्र तीर्थ-जलों से आपकी रंगभूमि (पूजा-स्थली) का अभिषेक करता है, वह क्या इंद्र के समान स्वर्गीय सुखों और परम ऐश्वर्य का उपभोग नहीं करता? अतः नतमस्तक देवताओं और वाणी की देवी सरस्वती के निवासस्थान स्वरूप आपके कल्याणकारी पावन चरणों की मैं शरण लेता हूँ। हे सुंदर जटाओं वाली महिषासुरमर्दिनी शैलसुते! आपकी सदा जय हो!
तव विमलेन्दुकुलं वदनेन्दुमलं सकलं ननु कूलयते किमु पुरुहूतपुरीन्दुमुखीसुमुखीभिरसौ विमुखीक्रियते ।
मम तु मतं शिवनामधने भवती कृपया किमुत क्रियते जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ २०॥
हिन्दी अनुवाद: हे माँ! आपका निर्मल चंद्रमा समान पूर्ण मुखमंडल समस्त कलंक और दोषों को धो डालता है। जिसका चित्त आपके इस मुखचंद्र पर टिक जाए, क्या वह अमरावती (स्वर्ग) की चंद्रमुखी अप्सराओं से विमुख नहीं हो जाएगा? हे शिवनाम रूपी धन की स्वामिनी! मेरा यह दृढ़ विश्वास है कि आपकी अहैतुकी कृपा से जीव के लिए संसार में क्या सिद्ध नहीं हो सकता! हे सुंदर जटाओं वाली महिषासुरमर्दिनी शैलसुते! आपकी सदा जय हो!
अयि मयि दीनदयालुतया कृपयैव त्वया भवितव्यमुमे अयि जगतो जननी कृपयासि यथासि तथाऽनुमितासि रते ।
यदुचितमत्र भवत्युररिकुरुतादुरुतापमपाकुरुते जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ २१॥
हिन्दी अनुवाद: हे दीनदयालु माँ उमा! मुझ दीन-हीन पर आपको केवल और केवल कृपा ही करनी चाहिए। हे जगज्जननी! आप जैसी करुणामयी हैं, उसी रूप में मैंने आपका अनुभव किया है। अतः जो भी आपके अनुसार उचित हो, उसे आप स्वीकार करें और मेरे इस संसार के असह्य संतापों व कष्टों को हर लें। हे सुंदर जटाओं वाली महिषासुरमर्दिनी शैलसुते! आपकी सदा जय हो!
स्तुतिमितस्तिमितः सुसमाधिना नियमतोऽयमतोऽनुदिनं पठेत् ।
परमया रमयापि निषेव्यते
परिजनोऽरिजनोऽपि च तं भजेत् ॥ २८॥
हिन्दी अनुवाद: जो मनुष्य शांत चित्त होकर, उत्तम समाधि व नियमपूर्वक प्रतिदिन इस स्तुति का पाठ करता है, परम ऐश्वर्यमयी महालक्ष्मी स्वयं उसकी सेवा करती हैं और उसके परिजन तो क्या, शत्रु भी उसके अनुकूल होकर उसका आदर करने लगते हैं।
रमयति किल कर्षस्तेषु चित्तं नराणामवरजवरयस्माद्रामकृष्णः कवीनाम् ।
अकृत सुकृतिगम्यं रम्यपद्यैकहर्म्यं
स्तवनमवनहेतुं प्रीतये विश्वमातुः ॥ २९॥
हिन्दी अनुवाद: जो मनुष्यों के चित्त को आनंदित करता है, ऐसे श्रेष्ठ कवियों में प्रतिष्ठित रामकृष्ण ने जगत की रक्षा के उद्देश्य से और जगज्जननी विश्वमाता की प्रसन्नता हेतु, पुण्यात्माओं द्वारा आस्वाद्य इस रमणीय पद्य-रूपी दिव्य स्तोत्र-भवन की रचना की।
इन्दुरम्यो मुहुर्बिन्दुरम्यो मुहुर्बिन्दुरम्यो यतः साऽनवद्यं स्मृतः ।
श्रीपतेः सूनूना कारितो योऽधुना विश्वमातुः पदे पद्यपुष्पाञ्जलिः ॥ ३०॥
हिन्दी अनुवाद: चंद्रमा के समान कांतिमान, दिव्य नाद-बिंदु के लालित्य से युक्त और सर्वथा दोषरहित यह स्तोत्र स्मरण किया गया है। श्रीपति के कृपापात्र द्वारा विश्वमाता के पावन श्रीचरणों में यह पद्य-पुष्पांजलि श्रद्धापूर्वक समर्पित की गई है।
इति श्रीभगवतीपद्यपुष्पाञ्जलिस्तोत्रम् सम्पूर्णम्॥
हिन्दी अनुवाद: इस प्रकार श्री भगवती पद्यपुष्पांजलि स्तोत्रम् संपूर्ण हुआ।
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