13 अध्याय · 700 मन्त्र · अपनी कामना अनुसार सम्पुट मन्त्र चुनें — उभय, आदि या अन्त सम्पुट
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📿 सम्पुट पाठ क्या है व कैसे करें
सम्पुट — सप्तशती के प्रत्येक मन्त्र के साथ अपनी कामना के अनुरूप एक विशेष मन्त्र जोड़कर पढ़ना। उभय सम्पुट में मन्त्र के आगे व पीछे दोनों ओर, आदि में केवल आगे, अन्त में केवल पीछे पढ़ा जाता है।
एक दिन में पूरा न हो सके तो परंपरा में 1 (पहला), 2 (दूसरा–चौथा), 3 (पाँचवाँ–तेरहवाँ) — इस प्रकार तीन चरित्रों में या 7 दिन में (1, 2–3, 4, 5–8, 9–10, 11, 12–13) पाठ का विधान है।
किसी अध्याय को बीच में न छोड़ें; पाठ के बीच बोलना/उठना वर्जित माना गया है। सकाम अनुष्ठान व सम्पुट-चयन योग्य आचार्य से परामर्श करके करें।
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मूल पाठ-स्रोत: sanskritdocuments.org (श्रीदुर्गासप्तशती) — साइट पर स्थायी रूप से संग्रहीत; 13 अध्याय व 700 मन्त्र मानक क्रमांक से जांचे गए, अध्याय 5 के "या देवी सर्वभूतेषु" मन्त्र मानक गीताप्रेस-क्रम से। पाठ-भेद संभव है — अनुष्ठान में मुद्रित प्रति से मिलान करें।