नारद-संहिता, मुहूर्तचिन्तामणि व हेमाद्रि के अनुसार — Ujjain हेतु आज के 30 शास्त्रीय-मुहूर्त
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🟢 सावित्र
03:53 AM - 04:41 AM
शुभ।
अशुभ (क्रूर)। शांतिकर्म वर्जित। केवल शल्यक्रिया, विष/शस्त्र-प्रयोग, आसुरी-कार्य हेतु उपयुक्त।
शुभ। मैत्री, शांति-पाठ, विद्यारम्भ, गृहप्रवेश व सौम्य-कार्य।
शुभ। नवीन-अनुबंध, कृषि, व्यापार, पदभार व मित्रों से मिलन।
अशुभ। मांगलिक-कार्य वर्जित; श्राद्ध, तर्पण व पितृकर्म हेतु उत्तम।
शुभ। यज्ञ, वेदारम्भ, शिल्पकर्म, क्रय-विक्रय व व्यापारिक-यात्रा।
शुभ। नींव रखना, स्थायी-निर्माण, वृक्षारोपण व राज्याभिषेक।
शुभ। समस्त लौकिक व पारलौकिक धार्मिक-अनुष्ठान, प्रतिष्ठा।
सर्वोत्तम (महाशुभ)। समस्त-दोषों का शमन करने वाला, दिग्विजय-प्रदायक।
शुभ। ललित-कला, संगीत, आभूषण-निर्माण, वस्त्र-परिधान।
शुभ। पराक्रम, प्रशासनिक-कार्य, खेलकूद, पदभार-ग्रहण।
अति-शुभ। यात्रा, युद्ध, मुकदमा, वाद-विवाद में विजय, नवीन-प्रतिष्ठान।
अत्यंत-अशुभ। कलह, संताप, विपत्ति-कारक; शुभ-कर्म सर्वथा वर्जित।
शुभ। कूप-तड़ाग-खनन, जल-संबंधी कार्य, औषधि-निर्माण व सेवन।
शुभ। विवाह, गर्भाधान, पुंसवन, नवीन-आभूषण, यात्रा।
अशुभ। दिन का संधिकाल (अवसान); आलस्य, संताप व हानि-कारक।
शुभ।
मध्यम।
शुभ।
शुभ।
शुभ।
शुभ।
शुभ।
अति-गुह्य/साधना हेतु शुभ। रात्रि के ठीक मध्य का समय — तांत्रिक-साधना, बगलामुखी/काली-अनुष्ठान, महाशिवरात्रि-पूजन व कालसर्प-शांति हेतु साक्षात्-सिद्धिदायक; किंतु गृहस्थ-मांगलिक-कार्यों हेतु निषिद्ध।
शुभ।
शुभ।
शुभ।
शुभ।
शुभ।
परम-सात्विक/अति-शुभ। सूर्योदय से ठीक 2 मुहूर्त (96 मिनट) पूर्व प्रारंभ, 1 मुहूर्त (48 मिनट) तक रहता है। मेधा-शक्ति, योग, प्राणायाम, ब्रह्म-चिंतन व अध्ययन हेतु अमृततुल्य।
शुभ।
ⓘ अभिजित मुहूर्त में दक्षिण-दिशा की यात्रा वर्जित मानी जाती है। बुधवार का अभिजित निष्फल माना जाता है। राहुकाल से दूषित मुहूर्त में शुभ-कार्य टालना उचित है।