🕉️ 01 October 2026, Thursday · 04:00:16 AM · CDSHARMA.IN

🪐 ग्रह-गोचर-फल

सभी 9 ग्रह, गुलिक, प्राणपद — वर्तमान-राशि व फलादेश

⚠️ आगामी पंचक-काल — निर्दोष/मध्यम-पंचक

प्रारम्भ 21 Oct 2026, 06:52 AM बजे
समाप्ति 25 Oct 2026, 07:26 PM बजे

अधिकांश कार्यों में दोषरहित माना जाता है (सिर्फ़ 5 मुख्य त्याज्य-कर्म वर्जित रहते हैं)।

त्याज्य-कर्म: दक्षिण-दिशा की यात्रा, गृहच्छादन (छत ढालना/लिंटर डालना), तृण व काष्ठ (लकड़ी/ईंधन/घास) का संग्रह, नई चारपाई/शैया-निर्माण, शवदाह (बिना शांति-विधान के)

🔥 इस-वर्ष का नवतपा

प्रारम्भ (सूर्य-रोहिणी-प्रवेश) 25 May 2027, 09:35 PM बजे
समाप्ति (9वां-दिन) 03 Jun 2027, 09:35 PM बजे

सूर्य के रोहिणी-नक्षत्र-प्रवेश से 9-दिन तक अत्यधिक-ताप का काल माना जाता है — इस दौरान वर्षा-पूर्व-अनुमान व कृषि-कार्यों हेतु शास्त्रों में विशेष-महत्व है।

🌧️ मेघगर्भ-सिद्धांत — नवतपा का प्रत्येक-दिन, आगामी-वर्षा का "गर्भ-दिवस"

"आर्द्रादि नव ऋक्षाणि वर्षयन्ति जलं भुवि। तेषां गर्भस्तु रोहिण्यां नवभिश्च दिनैर्भवेत्॥" (मेघमाला) — आर्द्रा से चित्रा तक 9 नक्षत्र ही वर्षा देते हैं, इन सभी का गर्भ रोहिणी के इन्हीं 9-दिनों में पकता है।

दिन 1 (25 May 2027, 09:35 PM बजे) — आर्द्रा नक्षत्र का गर्भ

भविष्य में वर्षा-काल: जून का तृतीय-सप्ताह (~21-22 जून)

मानसून का प्रादुर्भाव — आर्द्रा को वर्षा-ऋतु का प्रवेश-द्वार कहा जाता है, समय पर व मूसलाधार मानसून-आगमन का संकेत।

दिन 2 (26 May 2027, 09:35 PM बजे) — पुनर्वसु नक्षत्र का गर्भ

भविष्य में वर्षा-काल: जुलाई का प्रथम-पखवाड़ा (~6-19 जुलाई)

अखंड जल-प्रवाह — निरंतर, मध्यम व उपजाऊ फुहारें, धान की रोपाई हेतु अमृत-तुल्य।

दिन 3 (27 May 2027, 09:35 PM बजे) — पुष्य नक्षत्र का गर्भ

भविष्य में वर्षा-काल: जुलाई का उत्तरार्ध (~20 जुलाई-2 अगस्त)

पुष्ट एवं सघन वर्षा ("जलप्लावक वर्षा") — नदियां-नाले-बांध वेग से भरेंगे।

दिन 4 (28 May 2027, 09:35 PM बजे) — अश्लेषा नक्षत्र का गर्भ

भविष्य में वर्षा-काल: अगस्त का प्रथम-पखवाड़ा (~3-16 अगस्त)

दीर्घकालिक झड़ी — लगातार कई-दिनों तक सतत-वर्षा, भूजल-स्तर वृद्धि।

दिन 5 (29 May 2027, 09:35 PM बजे) — मघा नक्षत्र का गर्भ

भविष्य में वर्षा-काल: अगस्त का उत्तरार्ध (~17-30 अगस्त)

अमृततुल्य वृष्टि — धान्य की पराकाष्ठा-वृद्धि, अन्न की कोई कमी नहीं रहती।

दिन 6 (30 May 2027, 09:35 PM बजे) — पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र का गर्भ

भविष्य में वर्षा-काल: अगस्त-अंत/सितंबर-प्रारंभ (~31 अगस्त-12 सितंबर)

फसलों का विकास — भाद्रपद के मानसून-ठहराव (Monsoon Break) को रोकता है।

दिन 7 (31 May 2027, 09:35 PM बजे) — उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र का गर्भ

भविष्य में वर्षा-काल: सितंबर का मध्य (~13-26 सितंबर)

खरीफ की अंतिम-सिंचाई — पकी-फसलों को पोषण, रबी-बुवाई हेतु मिट्टी में नमी।

दिन 8 (01 Jun 2027, 09:35 PM बजे) — हस्त नक्षत्र का गर्भ

भविष्य में वर्षा-काल: सितंबर-अंत/अक्टूबर-प्रारंभ (~27 सितंबर-9 अक्टूबर)

हथिया की समृद्धि — "हस्ते बरसे चित्र मडराए, घर बैठे किसान कंकना बजाए", धान की बालियां भारी-चमकदार बनती हैं।

दिन 9 (02 Jun 2027, 09:35 PM बजे) — चित्रा नक्षत्र का गर्भ

भविष्य में वर्षा-काल: अक्टूबर का मध्य (~10-23 अक्टूबर)

मानसून की सम्मानजनक-विदाई — खेतों में पर्याप्त-नमी छूटती है, रबी-बुवाई (गेहूं/चना/सरसों) हेतु अनुकूल।

⚠️ "रोहिणी-गलन": बृहत्संहिता के अनुसार यदि नवतपा के किसी-दिन वर्षा/आंधी से शीतलता आ जाए, तो उस-दिन के अनुरूप-नक्षत्र में 4-महीने बाद सूखे की आशंका मानी जाती है।

🙏 नवतपा में शास्त्रीय-साधना व दान

  • सूर्य-अर्घ्य: तांबे के पात्र में जल, रक्त-चंदन, अक्षत व लाल-पुष्प डालकर "ॐ घृणि सूर्याय नमः" जपते हुए अर्घ्य दें, आदित्यहृदय-स्तोत्र का पाठ करें।
  • शिवलिंग पर गलंतिका-बंधन: मिट्टी के पात्र से निरंतर जलधारा शिवलिंग पर प्रवाहित करना।
  • जलकुंभ-दान: मिट्टी के नए-घड़े में शीतल-जल व गुड़ भरकर दान, सत्तू/छाता/पंखा/पादुका-दान भी शुभ।
  • परिंडा-संस्थापन: पक्षियों हेतु वृक्षों/छतों पर जल-पात्र व गोवंश हेतु जल-व्यवस्था।
ⓘ शनि/गुरु/राहु-केतु की राशि-परिवर्तन-तारीख़ें बहु-स्रोत-सत्यापित हैं। सूर्य/चंद्र/मंगल/बुध/शुक्र/गुलिक/प्राणपद की "अभी" वाली राशि साइट के अपने-खगोलीय-इंजन से सीधे निकाली गई है।

☀️ सूर्य वर्तमान में कन्या राशि में

सूर्य हर-राशि में लगभग 1 महीना रहते हैं

ⓘ ऊपर दिया फलादेश सामान्य-राशि-आधारित है — पूर्ण-सटीक व्यक्तिगत-फल हेतु अपनी जन्म-कुंडली से गोचर मिलवाना आवश्यक है।

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