तिथि: द्वितीया, तृतीया, पंचमी, षष्ठी, सप्तमी, दशमी, एकादशी, द्वादशी, त्रयोदशी — रिक्ता (चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी) व अमावस्या सदा वर्जित; शुक्ल पक्ष को अधिक अंक।
इस कार्य में वर्जित काल: खरमास, चातुर्मास (देवशयनी से देवोत्थान एकादशी), होलाष्टक, गुरु/शुक्र अस्त, पंचक
सभी कार्यों में: व्यतीपात व वैधृति योग, भद्रा, राहुकाल, यमगण्ड का समय छोड़ा गया। समय अमृत, शुभ, लाभ चौघड़िया और अभिजित मुहूर्त (बुधवार छोड़कर) से।
तारा-बल: जन्म-नक्षत्र से गिनकर विपत् (3), प्रत्यरि (5), वध (7) तारा वाले काल हटा दिये जाते हैं; सम्पत्, क्षेम, साधक, मित्र, अतिमित्र को अंक। चन्द्र-बल: जन्म-राशि से 8वाँ चन्द्र (चन्द्राष्टम) वर्जित; 1, 3, 6, 7, 10, 11वाँ बलवान।
💡 ध्रुव (उत्तरात्रय, रोहिणी), मृदु (मृगशिरा, चित्रा, अनुराधा, रेवती) तथा धनिष्ठा-शतभिषा। रवि व मंगलवार वर्जित। प्रवेश के समय स्थिर लग्न श्रेष्ठ — लग्न आचार्य से निकलवाएँ।
ध्यान दें: इसमें लग्न-शुद्धि, कुलाचार व क्षेत्रीय परम्पराएँ सम्मिलित नहीं हैं। गृहप्रवेश, उपनयन जैसे बड़े संस्कारों के लिये चुनी गयी तिथि पर आचार्य से लग्न अवश्य निकलवाएँ। सारी गणना साइट के पंचांग-इंजन से आपके स्थान के अनुसार।