🕉️ 01 October 2026, Thursday · 04:00:57 AM · CDSHARMA.IN

☀️ संक्रांति-निर्णय

सूर्य के राशि-परिवर्तन की सटीक तारीख़ें व पुण्यकाल

ⓘ पुण्यकाल का सामान्य-नियम: मेष-संक्रांति के आगे-पीछे 20 घटी (8 घंटे), बाक़ी सभी-संक्रांतियों के आगे-पीछे 16 घटी (6 घंटे 24 मिनट)। वाहन/फल जैसी संक्रांति-विशेष-जानकारी स्रोत-दर-स्रोत भिन्न मिली, इसलिए ग़लत-जानकारी से बचने हेतु शामिल नहीं की गई।

☀️ तुला संक्रांति

17 Oct 2026, 07:52 PM को सूर्य-प्रवेश

पुण्यकाल: 17 Oct, 01:28 PM से 18 Oct, 02:16 AM तक

कार्तिक-स्नान (कई क्षेत्रों में) इसी संक्रांति से प्रारंभ माना जाता है।

☀️ वृश्चिक संक्रांति

16 Nov 2026, 07:42 PM को सूर्य-प्रवेश

पुण्यकाल: 16 Nov, 01:18 PM से 17 Nov, 02:06 AM तक

सामान्य मासिक-संक्रांति, विशेष क्षेत्रीय-पर्व सीमित।

☀️ धनु संक्रांति

16 Dec 2026, 10:22 AM को सूर्य-प्रवेश

पुण्यकाल: 16 Dec, 03:58 AM से 16 Dec, 04:46 PM तक

खरमास/मलमास-काल का प्रारंभ — विवाह जैसे मांगलिक-कार्य वर्जित माने जाते हैं।

☀️ मकर संक्रांति

14 Jan 2027, 09:06 PM को सूर्य-प्रवेश

पुण्यकाल: 14 Jan, 02:42 PM से 15 Jan, 03:30 AM तक

उत्तरायण-प्रारंभ — पोंगल, माघी, भोगाली-बिहू, खिचड़ी आदि प्रमुख क्षेत्रीय-पर्व इसी-दिन। सबसे अधिक-महत्वपूर्ण संक्रांति मानी जाती है।

🎁 राशि-अनुसार शुभ-दान

मेष राशि (स्वामी: मंगल)

गेहूं व गुड़ का दान करें, गरीबों में अन्न-वस्त्र बांटें। मंगल का सम्बन्ध रक्त से है — रक्तदान अत्यंत-पुण्यदायी। गौ-माता को रोटी-गुड़ खिलाएं।

वृषभ राशि (स्वामी: शुक्र)

किसी ज़रूरतमंद को अन्न-दान करें। सुगंधित-इत्र, चावल, चांदी व चीनी का दान करें।

मिथुन राशि (स्वामी: बुध)

हरे-वस्त्र का दान करें, गाय को पालक खिलाएं। मूंग की दाल, कपूर व अगरबत्ती दान में दें।

कर्क राशि (स्वामी: चंद्रमा)

चावल व चीनी का दान करें, गाय को आटा खिलाएं। तांबे का पात्र मंदिर में दान करें।

सिंह राशि (स्वामी: सूर्य)

गेहूं व गुड़ का दान करें, ताम्र-पात्र मंदिर में दान दें। रक्तदान करें, धार्मिक-पुस्तकें बांटें।

कन्या राशि (स्वामी: बुध)

मूंग का दान करें, कर्पूर देवी-मंदिर में चढ़ाएं। गरीबों में अन्न-वस्त्र व धार्मिक-पुस्तक बांटें।

तुला राशि (स्वामी: शुक्र)

इत्र, सुगंधित-अगरबत्ती व चांदी का दान करें। श्री-सूक्त की पुस्तक लक्ष्मी-मंदिर में भेंट करें।

वृश्चिक राशि (स्वामी: मंगल)

गेहूं, गुड़, लाल-वस्त्र व ताम्र-पात्र का दान यश-प्रतिष्ठा बढ़ाता है। रक्तदान करें।

धनु राशि (स्वामी: बृहस्पति)

पीला-वस्त्र दान करें। अरहर की दाल व हल्दी का दान करें। शिक्षा-प्रगति हेतु धार्मिक-पुस्तक दान करें।

मकर राशि (स्वामी: शनि)

तिल-तेल का दान आवश्यक है। हनुमान-मंदिर में लाल-चोला चढ़ाएं, गरीबों को भोजन कराएं।

कुम्भ राशि (स्वामी: शनि)

तिल-तेल का दान करें, शनि-मंदिर में तेल चढ़ाएं। लोहे का पात्र व अन्न-वस्त्र दान करें।

मीन राशि (स्वामी: बृहस्पति)

चना, अरहर-दाल व धार्मिक-पुस्तक का दान प्रगति में सहायक। गरीब-बच्चों में फल-पुस्तक-कलम बांटें।

ⓘ राशिवार-दान पारंपरिक-मान्यताओं पर आधारित है।

🧑 इस-वर्ष का संक्रांति-पुरुष — मुहूर्तचिन्तामणि/बृहत्संहिता के नियमों से

नाम

मन्दा

धार्मिक-कार्यों की वृद्धि, उत्तम-वर्षा।

जाति

विप्र

धार्मिक-शैक्षणिक-क्षेत्रों का प्रभाव बढ़ना, बौद्धिक-वर्ग को प्रतिष्ठा।

वस्त्र

पीत (पीला)

स्वर्ण-मूल्य में तेज़ी, धर्म की वृद्धि।

भोजन

मधु (शहद)

रोगों का शमन, औषधियों में लाभ।

पात्र

स्वर्ण (सोना)

स्वर्ण के मूल्य में भारी-तेज़ी, उच्च-वर्ग को लाभ व श्रेष्ठ-फल।

वाहन

अश्व (घोड़ा)

राज्यों में तनाव, तेज़-गतिविधियां।

दृष्टि

ऊर्ध्व दृष्टि

शासकों/नेताओं को कष्ट, अनावृष्टि (वर्षा की कमी)।

मुद्रा

स्थित (खड़ी)

शांति, स्थिरता, मध्यम-फल।

अवस्था

वृद्धावस्था (सायं/रात्रि-प्रवेश)

वृद्धजनों को स्वास्थ्य-कष्ट, नीतियों में स्थिरता, कार्यगति में मंदता।

कंचुकी

शनि (पाप)

स्त्रियों को शारीरिक-मानसिक कष्ट, घरेलू-कलह, आंतरिक-अपराधों में वृद्धि व असुरक्षा की भावना।

ⓘ मुद्रा संक्रांति-क्षण की लग्न-राशि (चर/स्थिर/द्विस्वभाव) से तय की गई है। अवस्था सीधे-घड़ी-घंटे से (सूर्योदय-सूर्यास्त-आधारित सूक्ष्म-विभाजन नहीं)। कंचुकी नक्षत्र के विंशोत्तरी-दशा-स्वामी से तय की गई है (सूर्य/केतु को शास्त्रीय-परंपरा अनुसार पाप-वर्ग में रखा — यह स्रोत का शब्दशः-कथन नहीं, तार्किक-विस्तार है)।

📿 उपवाहन व लेप-पुष्प (सामान्य-सन्दर्भ — इस-वर्ष के लिए गणना नहीं)

उपवाहन (नक्षत्र-चरण से, उदाहरण: शृगाल, श्वान, मूषक आदि)

वाहन के प्रभाव को आंशिक-रूप से संतुलित या तीव्र करता है।

विलेपन/पुष्प

कस्तूरी/केसर/चंदन/जूही-मोगरा = सुगंधित-वस्तुओं के व्यापार में लाभ, मांगलिक-कार्य, आरोग्य। भस्म/कीचड़/आक-धतूरा = जनसाधारण में कष्ट, महामारियों का भय-क्लेश।

ⓘ इन दोनों के लिए स्रोत में सिर्फ़ उदाहरण/सम्भावित-फल मिले, ठीक-निर्धारण-सूत्र नहीं — इसलिए इस-वर्ष कौन-सा लागू है, यह नहीं बताया जा रहा।

☀️ कुंभ संक्रांति

13 Feb 2027, 10:05 AM को सूर्य-प्रवेश

पुण्यकाल: 13 Feb, 03:41 AM से 13 Feb, 04:29 PM तक

खरमास/मलमास-काल की समाप्ति — इसके बाद मांगलिक-कार्य पुनः शुरू हो सकते हैं।

☀️ मीन संक्रांति

15 Mar 2027, 06:57 AM को सूर्य-प्रवेश

पुण्यकाल: 15 Mar, 12:33 AM से 15 Mar, 01:21 PM तक

सामान्य मासिक-संक्रांति, चैत्र-नवरात्रि से पूर्व का काल।

☀️ मेष संक्रांति

14 Apr 2027, 03:25 PM को सूर्य-प्रवेश

पुण्यकाल: 14 Apr, 07:25 AM से 14 Apr, 11:25 PM तक

सौर-नववर्ष — बैसाखी, पोइला-बैशाख, पुथांडु, विशु आदि क्षेत्रीय-नववर्ष इसी-दिन।

☀️ वृषभ संक्रांति

15 May 2027, 12:15 PM को सूर्य-प्रवेश

पुण्यकाल: 15 May, 05:51 AM से 15 May, 06:39 PM तक

वृषभ भगवान-शिव का वाहन है — गौ-वंश के प्रति कृतज्ञता का दिन माना जाता है।

☀️ मिथुन संक्रांति

15 Jun 2027, 06:50 PM को सूर्य-प्रवेश

पुण्यकाल: 15 Jun, 12:26 PM से 16 Jun, 01:14 AM तक

कुछ क्षेत्रों में रज-पर्व/अम्बुबाची जैसे पर्व इसी काल से जुड़े हैं।

☀️ कर्क संक्रांति

17 Jul 2027, 05:41 AM को सूर्य-प्रवेश

पुण्यकाल: 16 Jul, 11:17 PM से 17 Jul, 12:05 PM तक

दक्षिणायन का प्रारंभ — सूर्य दक्षिण की ओर गति करना शुरू करते हैं।

☀️ सिंह संक्रांति

17 Aug 2027, 02:05 PM को सूर्य-प्रवेश

पुण्यकाल: 17 Aug, 07:41 AM से 17 Aug, 08:29 PM तक

दक्षिण-भारत में कुछ क्षेत्रीय-पर्व इस संक्रांति से जुड़े हैं।

☀️ कन्या संक्रांति

17 Sep 2027, 02:01 PM को सूर्य-प्रवेश

पुण्यकाल: 17 Sep, 07:37 AM से 17 Sep, 08:25 PM तक

विश्वकर्मा-पूजा परंपरागत रूप से इस काल के आस-पास मनाई जाती है।

ⓘ क्षण साइट के अपने सूर्य-गणना-सूत्र से निकाला गया है — सटीक-दान/स्नान हेतु स्थानीय-पंचांग से एक-बार पुष्टि अवश्य करें।

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