🕉️ 01 October 2026, Thursday · 04:01:49 AM · CDSHARMA.IN

🌾 विश्वा-पंचांग व नवनायक

संवत्सर-फल — राजा-मन्त्री, मेघेश, वर्षा-धान्य-तृण आदि का वार्षिक-आकलन

विक्रम संवत् 2083 के लिए गणना

👑 नवनायक (दशाधिकारी)

राजा (वर्षेश)

संवत्सर का सम्पूर्ण-वर्ष पर शासन व दिशा-निर्धारण।

शुक्र

मन्त्री

राज-काज व प्रशासनिक-नीतियों की दिशा।

मंगल

सस्येश

खरीफ़-फसलों (धान, मक्का, ज्वार, बाजरा, तिल) की स्थिति।

गुरु

सेनाधिपति

सैन्य-शक्ति, आंतरिक-सुरक्षा व सीमा-विवाद।

चंद्र

मेघेश

मेघ व वर्षा की दिशा।

चंद्र

रसेश

दूध, घी, तेल, गुड़, शर्करा जैसे द्रव-पदार्थ।

शनि

धनेश

आर्थिक-समृद्धि, राजस्व व व्यापारिक-संतुलन।

चंद्र

धान्येश

रबी-फसलों (गेहूं, चना, जौ, सरसों) की स्थिति।

बुध

नीरसेश

धातु, रत्न व शुष्क-पदार्थों की तेज़ी-मंदी।

गुरु

फलेश

फल, फूल, औषधि व वन-संपदा।

चंद्र

राजा (शुक्र) व मन्त्री (मंगल) के बीच सम्बन्ध: सम

वर्ष का फल मध्यम रहेगा — न अत्यधिक-लाभ, न भारी-संकट।

☁️ इस-वर्ष का मेघ: संवर्त मेघ

प्रलयंकारी/शुष्क मेघ — वर्षा अत्यल्प, सूखे व दुर्भिक्ष (अकाल) का भय।

🌙 रोहिणी का वास: पृथ्वी (ग्राम/नगर) पर निवास

सर्वोत्तम-स्थिति — बस्तियों-खेतों पर सीधी-वर्षा, भूजल-सुधार, उत्तम-खेती व सुभिक्ष।

🌾 विश्वा-तत्व (20-विश्वा पद्धति)

🌧️ वर्षा विश्वा

16/20

वर्ष-भर की समग्र जल-वृष्टि का सूचक।

समय पर अनुकूल-वर्षा होती है।

🌾 धान्य विश्वा

18/20

गेहूं, धान, चना, मक्का आदि प्रमुख-खाद्यान्नों की कुल-पैदावार।

भंडार भरे रहते हैं, बाज़ार में अनाज सुलभ-सस्ता रहता है।

🌿 तृण विश्वा

15/20

पशुओं हेतु घास-चारा-वनस्पति की उपलब्धता, दुग्ध-उत्पादन से सम्बद्ध।

घास-चारा-वनस्पति की उपलब्धता पर्याप्त रहती है — दुग्ध-उत्पादन अनुकूल।

❄️ शीत विश्वा

13/20

शीत-ऋतु की अवधि, पाला व न्यूनतम-तापमान का प्रभाव।

सामान्य-शीत रहेगी।

☀️ उष्ण विश्वा

3/20

ग्रीष्म-ऋतु की प्रचंडता, धूप, लू व उच्चतम-तापमान।

सामान्य-ग्रीष्म रहेगा।

💨 वायु विश्वा

12/20

आंधी, चक्रवात, समुद्री-तूफ़ान व मौसमी-हवाओं का वेग।

चक्रवाती-तूफ़ानों से वृक्षों, भवनों व खड़ी-फसलों को क्षति की आशंका।

🩺 रोग विश्वा

2/20

समाज में मौसमी-बीमारियां, संक्रमण व जन-स्वास्थ्य की स्थिति।

प्रजा नीरोग रहेगी।

⚠️ उपद्रव विश्वा

4/20

सीमा-विवाद, आंतरिक-अशांति, राजनीतिक-उथल-पुथल, चोरी व अपराध।

शांति व सुरक्षा का माहौल रहेगा।

📜 शास्त्रीय-आधार

"चैत्रे सिते प्रतिपदि यो वारो वत्सराधिपः। मेषार्कसंक्रमे मन्त्री कर्के सस्यपतिः स्मृतः॥" (वर्षप्रबोध/ज्योतिस्तत्त्व/मेघमाला) — नवनायक-निर्धारण।
"संवत्सरं गुणैर्हत्वा क्षेपं संयोज्य यत्नतः। विंशत्या तु हरेद्भागं शेषं विश्वा विनिर्दिशेत्॥" (वर्षप्रबोध/मेघमाला/पंचांग-कौतुक) — विश्वा-गणना।
⚠️ ध्यान दें: यह "स्थूल (गणितीय) विधि" है। स्रोत के अनुसार असली-फलादेश में नवनायकों के ग्रह-बल व मेष-संक्रांति-प्रवेश-लग्न से भी सूक्ष्म-संशोधन होता है (जैसे मेघेश/सस्येश क्रूर-ग्रह हों तो व्यवहारिक रूप से विश्वा 2-4 कम मानी जाती है) — वह सूक्ष्म-विश्लेषण यहां शामिल नहीं है।

ⓘ यह पारंपरिक संहिता-ज्योतिष की गणना-पद्धति है, वैज्ञानिक-मौसम/फसल-पूर्वानुमान नहीं। पूर्ण-फलादेश हेतु सूक्ष्म-पंचांग-विश्लेषण आवश्यक है।

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