✍️ CD Sharma · 📅 19 Sep 2026 · ⏱️ 1 मिनट का पठन · 🏷️ Pitru Dosh, Pitru Dosh in Kundli, Pitru Rin, Vedic Astrology, Sun Rahu Conjunction, Shrapit Yog, Pitru Dosh Remedies, Pitru Paksha, पितृ दोष, कुंडली में पितृ दोष, पितृ ऋण, सूर्य ग्रहण योग, गुरु चांडाल योग, श्रापित योग, पितृ दोष के लक्षण, पितृ दोष के उपाय
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सनातन परंपरा और वैदिक ज्योतिष में पूर्वजों की अतृप्ति अथवा उनके प्रति किए जाने वाले आवश्यक कर्तव्यों की उपेक्षा से उत्पन्न असंतुलन को 'पितृ दोष' कहा जाता है। धर्मशास्त्रों के अनुसार प्रत्येक मनुष्य के जीवन में तीन प्रमुख ऋण बताए गए हैं—देव ऋण, ऋषि ऋण और पितृ ऋण। जब पितृ ऋण अनिस्तारित रह जाता है, तो उसका प्रतिकूल प्रभाव व्यक्ति के मानसिक, पारिवारिक, आर्थिक और भौतिक जीवन पर स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगता है।
वैदिक ज्योतिष में पितृ दोष का सीधा संबंध सूर्य, गुरु, राहु-केतु, शनि तथा कुंडली के नवम (भाग्य/पितृ) एवं पंचम (पूर्वजन्म/संतान) भाव से होता है। जब पितृ-कारक ग्रहों अथवा भावों पर छाया ग्रहों (राहु/केतु) या मारक/पाप ग्रहों का विच्छेदात्मक प्रभाव पड़ता है, तब पितृ दोष का निर्माण होता है।
केवल ग्रहों की युति होने से ही दोष पूर्ण रूप से सक्रिय नहीं माना जाता; इसकी तीव्रता तीन मुख्य बातों पर निर्भर करती है:
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