✍️ CD Sharma · 📅 22 Sep 2026 · ⏱️ 3 मिनट का पठन · 🏷️ श्रीमद्देवीगीता (Shrimad Devi Gita), देवी गीता (Devi Gita), देवीभागवत महापुराण (Devi Bhagavata Mahapurana), शक्ति दर्शन (Shakta Philosophy), माँ भुवनेश्वरी (Maa Bhuvaneshwari), ज्ञान योग (Jnana Yoga), अष्टांग योग (Ashtanga Yoga), भक्ति योग (Bhakti Yoga),
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(सृष्टि-क्रम, माया-स्वरूप और तत्त्व-निरूपण)
॥ श्री गणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमः श्री देव्यै ॥
अथ श्रीमद्देवीगीता प्रारभ्यते ।
हिमालय उवाच - योगं च भक्तिसहितं ज्ञानं च श्रुतिसंमतम् । वदस्व परमेशानि त्वमेवाहं यतो भवेः ॥ व्यास उवाच - इति तस्य वचः श्रुत्वा प्रसन्नमुखपङ्कजा । वक्तुमारभताम्बा सा रहस्यं श्रुतिगूहितम्॥ हिन्दी अर्थ: हिमालय ने प्रार्थना की—हे परमेश्वरि! भक्ति सहित उस वेद-सम्मत योग और ज्ञान का मुझे उपदेश कीजिए, जिससे मैं आपके ही स्वरूप को प्राप्त कर सकूँ (जीव और ब्रह्म की एकात्मता सिद्ध हो सके)। व्यासजी बोले—पर्वतराज हिमालय के इस वचन को सुनकर प्रसन्नमुख कमलनयनी जगदम्बा वेदों के परम गूढ़ रहस्य का उद्घाटन करने लगीं।
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