🕉️ 18 August 2026, Tuesday · 06:09:44 PM · CDSHARMA.IN

♍ कन्या राशिफल

स्वामी ग्रह: बुध · तत्व: पृथ्वी

दैनिक साप्ताहिक मासिक वार्षिक

⚡ यह राशिफल वर्तमान ग्रह गोचर से लाइव जनरेट किया गया है

आज प्रेम जीवन में मधुरता बढ़ेगी, साथी का साथ सुखद रहेगा। मेहनत का फल धीरे-धीरे मिलेगा। नींद व आराम पर ध्यान दें। संपत्ति व स्थायी लाभ के योग बन रहे हैं। चंद्रमा के गोचर से मानसिक स्थिति व दैनिक निर्णयों पर प्रभाव मुख्य रहेगा (वर्तमान में चंद्र आपकी राशि से 2वें भाव में गोचर कर रहा है)।

प्रेम
9/10
करियर
6/10
स्वास्थ्य
6/10
धन
9/10

🔮 उपाय: रत्न: नीलम (Blue Sapphire — बिना परामर्श न पहनें) (धारण से पूर्व अनुभवी ज्योतिषी से परामर्श लें)। शनिवार को काला तिल, सरसों तेल, लोहा, कंबल, जूते का दान करें। मंत्र जाप: "ॐ नीलांजनसमाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम् । छायामार्तण्डसंभूतं तं नमामि शनैश्चरम् ॥"

✅ शुभ राशिफल

प्रेम/रिश्ते के क्षेत्र में यह समय अनुकूल है — प्रेम जीवन में मधुरता बढ़ेगी, साथी का साथ सुखद रहेगा।

धन के क्षेत्र में यह समय अनुकूल है — संपत्ति व स्थायी लाभ के योग बन रहे हैं।

🙏 समाधान

रत्न: नीलम (Blue Sapphire — बिना परामर्श न पहनें) (धारण से पूर्व अनुभवी ज्योतिषी से परामर्श लें)। शनिवार को काला तिल, सरसों तेल, लोहा, कंबल, जूते का दान करें। मंत्र जाप: "ॐ नीलांजनसमाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम् । छायामार्तण्डसंभूतं तं नमामि शनैश्चरम् ॥"

🪐 सभी ग्रहों का संपूर्ण फलादेश देखें (स्थिति, अवस्था, दृष्टि, भाव-प्रभाव)
सूर्य — सिंह (भाव 12, स्वगृही (own sign))

सूर्य भाव 12 (सिंह राशि) में स्वगृही (own sign) स्थिति में है। यह भाव मुख्यतः व्यय, विदेश यात्रा व मोक्ष से जुड़ा है, इसलिए सूर्य का प्रभाव इन्हीं विषयों पर पड़ेगा। स्वराशि में होने से सूर्य मज़बूत व स्थिर फल देगा — राहु की दृष्टि भी पड़ रही है, जिससे सतर्कता आवश्यक है। सूर्य की दृष्टि भाव 6 पर पड़ती है — यानी शत्रु, रोग व ऋण जैसे विषय भी प्रभावित होते हैं।

चंद्र — तुला (भाव 2, सम-गृही)

चंद्र भाव 2 (तुला राशि) में सम-गृही स्थिति में है। यह भाव मुख्यतः धन, वाणी व परिवार से जुड़ा है, इसलिए चंद्र का प्रभाव इन्हीं विषयों पर पड़ेगा। चंद्र की दृष्टि भाव 8 पर पड़ती है — यानी आयु, गुप्त विद्या व अचानक घटनाएं जैसे विषय भी प्रभावित होते हैं।

मंगल — मिथुन (भाव 10, शत्रुगृही)

मंगल भाव 10 (मिथुन राशि) में शत्रुगृही स्थिति में है। यह भाव मुख्यतः करियर, कर्म व सामाजिक प्रतिष्ठा से जुड़ा है, इसलिए मंगल का प्रभाव इन्हीं विषयों पर पड़ेगा। शत्रु-राशि में होने से मंगल के फल में बाधा संभव — मंगल की दृष्टि भाव 4, 1, 5 पर पड़ती है — यानी माता, घर, सुख व संपत्ति; व्यक्तित्व, स्वास्थ्य व शारीरिक बनावट; संतान, शिक्षा व बुद्धि जैसे विषय भी प्रभावित होते हैं।

बुध — कर्क (भाव 11, शत्रुगृही)

बुध भाव 11 (कर्क राशि) में शत्रुगृही स्थिति में है। यह भाव मुख्यतः आय, लाभ व मित्र से जुड़ा है, इसलिए बुध का प्रभाव इन्हीं विषयों पर पड़ेगा। शत्रु-राशि में होने से बुध के फल में बाधा संभव — बुध की दृष्टि भाव 5 पर पड़ती है — यानी संतान, शिक्षा व बुद्धि जैसे विषय भी प्रभावित होते हैं।

गुरु — कर्क (भाव 11, उच्च राशि)

गुरु भाव 11 (कर्क राशि) में उच्च राशि स्थिति में है। यह भाव मुख्यतः आय, लाभ व मित्र से जुड़ा है, इसलिए गुरु का प्रभाव इन्हीं विषयों पर पड़ेगा। उच्च राशि में होने से गुरु अपने सर्वोत्तम फल देने की स्थिति में है — गुरु की दृष्टि भाव 5, 3, 7 पर पड़ती है — यानी संतान, शिक्षा व बुद्धि; साहस, भाई-बहन व संचार; विवाह, साझेदारी व जीवनसाथी जैसे विषय भी प्रभावित होते हैं।

शुक्र — कन्या (भाव 1, नीच राशि)

शुक्र भाव 1 (कन्या राशि) में नीच राशि स्थिति में है। यह भाव मुख्यतः व्यक्तित्व, स्वास्थ्य व शारीरिक बनावट से जुड़ा है, इसलिए शुक्र का प्रभाव इन्हीं विषयों पर पड़ेगा। नीच राशि में होने से शुक्र के फल में कमी या चुनौती संभव है — मंगल, शनि की दृष्टि भी पड़ रही है, जिससे सतर्कता आवश्यक है। शुक्र की दृष्टि भाव 7 पर पड़ती है — यानी विवाह, साझेदारी व जीवनसाथी जैसे विषय भी प्रभावित होते हैं।

शनि — मीन (भाव 7, सम-गृही)

शनि भाव 7 (मीन राशि) में सम-गृही स्थिति में है। यह भाव मुख्यतः विवाह, साझेदारी व जीवनसाथी से जुड़ा है, इसलिए शनि का प्रभाव इन्हीं विषयों पर पड़ेगा। गुरु, शुक्र की शुभ दृष्टि इस पर पड़ रही है, जो सकारात्मक सहयोग देती है। शनि की दृष्टि भाव 1, 9, 4 पर पड़ती है — यानी व्यक्तित्व, स्वास्थ्य व शारीरिक बनावट; भाग्य, धर्म व पिता; माता, घर, सुख व संपत्ति जैसे विषय भी प्रभावित होते हैं।

राहु — कुंभ (भाव 6, मित्रगृही)

राहु भाव 6 (कुंभ राशि) में मित्रगृही स्थिति में है। यह भाव मुख्यतः शत्रु, रोग व ऋण से जुड़ा है, इसलिए राहु का प्रभाव इन्हीं विषयों पर पड़ेगा। सूर्य, केतु की दृष्टि भी पड़ रही है, जिससे सतर्कता आवश्यक है। राहु की दृष्टि भाव 12 पर पड़ती है — यानी व्यय, विदेश यात्रा व मोक्ष जैसे विषय भी प्रभावित होते हैं।

केतु — सिंह (भाव 12, शत्रुगृही)

केतु भाव 12 (सिंह राशि) में शत्रुगृही स्थिति में है। यह भाव मुख्यतः व्यय, विदेश यात्रा व मोक्ष से जुड़ा है, इसलिए केतु का प्रभाव इन्हीं विषयों पर पड़ेगा। शत्रु-राशि में होने से केतु के फल में बाधा संभव — राहु की दृष्टि भी पड़ रही है, जिससे सतर्कता आवश्यक है। केतु की दृष्टि भाव 6 पर पड़ती है — यानी शत्रु, रोग व ऋण जैसे विषय भी प्रभावित होते हैं।

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