🕉️ 26 September 2026, Saturday · 04:43:35 AM · CDSHARMA.IN

♏ वृश्चिक राशिफल

स्वामी ग्रह: मंगल · तत्व: जल

🔤 नामाक्षर: तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू

💎 शुभ-रत्न: मूंगा (Red Coral) · 🗓️ शुभ-दिन: मंगलवार · 🎁 दान: मसूर दाल, लाल वस्त्र, तांबे के बर्तन

दैनिक साप्ताहिक मासिक वार्षिक

⚡ यह राशिफल वर्तमान ग्रह गोचर से लाइव जनरेट किया गया है

आज साथी के साथ समय बिताना रिश्ते को मज़बूत करेगा। कार्यस्थल पर अतिरिक्त परिश्रम की आवश्यकता पड़ सकती है। स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखें, अधिक परिश्रम से बचें। धन आगमन व व्यय संतुलित रहेगा। चंद्रमा के गोचर से मानसिक स्थिति व दैनिक निर्णयों पर प्रभाव मुख्य रहेगा (वर्तमान में चंद्र आपकी राशि से 4वें भाव में गोचर कर रहा है)।

प्रेम
5/10
करियर
3/10
स्वास्थ्य
2/10
धन
5/10

🔮 उपाय: 🪔 लालकिताब-उपाय: प्रातः हनुमान चालीसा का पाठ करें, क्रोध व जल्दबाज़ी पर नियंत्रण रखें। 🛕 पूजा-पाठ: हनुमान-मंदिर दर्शन, मंगलवार हनुमान चालीसा पाठ। 🔢 शुभ-अंक: 9। 🕉️ मंत्र-जाप: "ॐ अंगारकाय विद्महे शक्तिहस्ताय धीमहि तन्नो भौमः प्रचोदयात्" (10000 बार)। 🤝 सेवा: भाई-बहनों की सहायता, रक्तदान, सुरक्षा-बलों/अग्निशमन जैसी सेवाओं में सहयोग।

⚠️ अशुभ राशिफल

करियर के क्षेत्र में सतर्कता आवश्यक — कार्यस्थल पर अतिरिक्त परिश्रम की आवश्यकता पड़ सकती है।

स्वास्थ्य के क्षेत्र में सतर्कता आवश्यक — स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखें, अधिक परिश्रम से बचें।

🙏 बड़े समाधान (रत्न/रुद्राक्ष)

💎 रत्न: मूंगा (Red Coral) (धारण से पूर्व अनुभवी ज्योतिषी से परामर्श अवश्य लें)। 📿 रुद्राक्ष: ३ (तीन) मुखी रुद्राक्ष धारण करना लाभकारी माना जाता है। 🕉️ अत्यंत प्रतिकूल समय में महामृत्युंजय मंत्र का जाप विशेष रूप से शांति व सुरक्षा प्रदान करने वाला माना जाता है।

🪐 सभी ग्रहों का संपूर्ण फलादेश देखें (स्थिति, अवस्था, दृष्टि, भाव-प्रभाव)
सूर्य — कन्या (भाव 11, सम-गृही)

सूर्य भाव 11 (कन्या राशि) में सम-गृही स्थिति में है। यह भाव मुख्यतः आय, लाभ व मित्र से जुड़ा है, इसलिए सूर्य का प्रभाव इन्हीं विषयों पर पड़ेगा। शनि की दृष्टि भी पड़ रही है, जिससे सतर्कता आवश्यक है। सूर्य की दृष्टि भाव 5 पर पड़ती है — यानी संतान, शिक्षा व बुद्धि जैसे विषय भी प्रभावित होते हैं।

चंद्र — कुंभ (भाव 4, सम-गृही)

चंद्र भाव 4 (कुंभ राशि) में सम-गृही स्थिति में है। यह भाव मुख्यतः माता, घर, सुख व संपत्ति से जुड़ा है, इसलिए चंद्र का प्रभाव इन्हीं विषयों पर पड़ेगा। मंगल, केतु की दृष्टि भी पड़ रही है, जिससे सतर्कता आवश्यक है। चंद्र की दृष्टि भाव 10 पर पड़ती है — यानी करियर, कर्म व सामाजिक प्रतिष्ठा जैसे विषय भी प्रभावित होते हैं।

मंगल — कर्क (भाव 9, नीच राशि)

मंगल भाव 9 (कर्क राशि) में नीच राशि स्थिति में है। यह भाव मुख्यतः भाग्य, धर्म व पिता से जुड़ा है, इसलिए मंगल का प्रभाव इन्हीं विषयों पर पड़ेगा। नीच राशि में होने से मंगल के फल में कमी या चुनौती संभव है — मंगल की दृष्टि भाव 3, 12, 4 पर पड़ती है — यानी साहस, भाई-बहन व संचार; व्यय, विदेश यात्रा व मोक्ष; माता, घर, सुख व संपत्ति जैसे विषय भी प्रभावित होते हैं।

बुध — कन्या (भाव 11, उच्च राशि)

बुध भाव 11 (कन्या राशि) में उच्च राशि स्थिति में है। यह भाव मुख्यतः आय, लाभ व मित्र से जुड़ा है, इसलिए बुध का प्रभाव इन्हीं विषयों पर पड़ेगा। उच्च राशि में होने से बुध अपने सर्वोत्तम फल देने की स्थिति में है — शनि की दृष्टि भी पड़ रही है, जिससे सतर्कता आवश्यक है। बुध की दृष्टि भाव 5 पर पड़ती है — यानी संतान, शिक्षा व बुद्धि जैसे विषय भी प्रभावित होते हैं।

गुरु — कर्क (भाव 9, उच्च राशि)

गुरु भाव 9 (कर्क राशि) में उच्च राशि स्थिति में है। यह भाव मुख्यतः भाग्य, धर्म व पिता से जुड़ा है, इसलिए गुरु का प्रभाव इन्हीं विषयों पर पड़ेगा। उच्च राशि में होने से गुरु अपने सर्वोत्तम फल देने की स्थिति में है — गुरु की दृष्टि भाव 3, 1, 5 पर पड़ती है — यानी साहस, भाई-बहन व संचार; व्यक्तित्व, स्वास्थ्य व शारीरिक बनावट; संतान, शिक्षा व बुद्धि जैसे विषय भी प्रभावित होते हैं।

शुक्र — तुला (भाव 12, स्वगृही (own sign))

शुक्र भाव 12 (तुला राशि) में स्वगृही (own sign) स्थिति में है। यह भाव मुख्यतः व्यय, विदेश यात्रा व मोक्ष से जुड़ा है, इसलिए शुक्र का प्रभाव इन्हीं विषयों पर पड़ेगा। स्वराशि में होने से शुक्र मज़बूत व स्थिर फल देगा — मंगल की दृष्टि भी पड़ रही है, जिससे सतर्कता आवश्यक है। शुक्र की दृष्टि भाव 6 पर पड़ती है — यानी शत्रु, रोग व ऋण जैसे विषय भी प्रभावित होते हैं।

शनि — मीन (भाव 5, सम-गृही) वक्री

शनि भाव 5 (मीन राशि) में सम-गृही स्थिति में है। यह भाव मुख्यतः संतान, शिक्षा व बुद्धि से जुड़ा है, इसलिए शनि का प्रभाव इन्हीं विषयों पर पड़ेगा। बुध, गुरु की शुभ दृष्टि इस पर पड़ रही है, जो सकारात्मक सहयोग देती है। सूर्य की दृष्टि भी पड़ रही है, जिससे सतर्कता आवश्यक है। शनि की दृष्टि भाव 11, 7, 2 पर पड़ती है — यानी आय, लाभ व मित्र; विवाह, साझेदारी व जीवनसाथी; धन, वाणी व परिवार जैसे विषय भी प्रभावित होते हैं।

राहु — कुंभ (भाव 4, मित्रगृही) वक्री

राहु भाव 4 (कुंभ राशि) में मित्रगृही स्थिति में है। यह भाव मुख्यतः माता, घर, सुख व संपत्ति से जुड़ा है, इसलिए राहु का प्रभाव इन्हीं विषयों पर पड़ेगा। मंगल, केतु की दृष्टि भी पड़ रही है, जिससे सतर्कता आवश्यक है। राहु की दृष्टि भाव 10 पर पड़ती है — यानी करियर, कर्म व सामाजिक प्रतिष्ठा जैसे विषय भी प्रभावित होते हैं।

केतु — सिंह (भाव 10, शत्रुगृही) वक्री

केतु भाव 10 (सिंह राशि) में शत्रुगृही स्थिति में है। यह भाव मुख्यतः करियर, कर्म व सामाजिक प्रतिष्ठा से जुड़ा है, इसलिए केतु का प्रभाव इन्हीं विषयों पर पड़ेगा। शत्रु-राशि में होने से केतु के फल में बाधा संभव — चंद्र की शुभ दृष्टि इस पर पड़ रही है, जो सकारात्मक सहयोग देती है। राहु की दृष्टि भी पड़ रही है, जिससे सतर्कता आवश्यक है। केतु की दृष्टि भाव 4 पर पड़ती है — यानी माता, घर, सुख व संपत्ति जैसे विषय भी प्रभावित होते हैं।

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