॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण
"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद
अर्थ: रक्षा करना
संस्कृत: रक्षणे
अंग्रेज़ी: to protect, to hide, to conceal
सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):
लट् लकार, परस्मैपद (कर्तरि):
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | गोपायति | गोपायतः | गोपायन्ति |
| मध्यम | गोपायसि | गोपायथः | गोपायथ |
| उत्तम | गोपायामि | गोपायावः | गोपायामः |
दसों लकार (प्रथम पुरुष, एकवचन): लट्: गोपायति · लिट्: गोपायाञ्चकार · लुट्: गोपायिता · लृट्: गोपायिष्यति · लोट्: गोपायतात् · लङ्: अगोपायत् · विधिलिङ्: गोपायेत् · आशीर्लिङ्: गुप्यात् · लुङ्: अगोपायीत् · लृङ्: अगोपायिष्यत्
प्रमुख कृदन्त: ल्युट्: गोपन · ण्वुल्: गोपकः · तृच्: गोप्ता · यत्: गोपाय्यः · ण्यत्: गोप्यः · तव्य: गोप्तव्यः · अनीयर्: गोपनीयः · क्त: गुप्तः · क्तवतु: गुप्तवान् · शतृ: गोपायन् · स्य-शतृ: गोपायिष्यन् · क्त्वा: गुप्त्वा · ल्यप्: प्रगुप्य · तुमुन्: गोप्तुम् · णमुल्: गोपम् · घञ्: गोपः · क्तिन्: गुप्ति · क्वसु: जुगुप्वान्
| पदम् | विवरणम् |
|---|---|
| गोपायति | गुप् धातु (भ्वादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन अन्य सम्भावना: गोपायत् (नपुं.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: गुप् + शतृ | गोपायत् (पुं.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: गुप् + शतृ |
गोपायति ➤ रक्षा करना
संस्कृत: रक्षणे
इस शब्द के प्रातिपदिक अमरकोश की पर्याय-सूची में नहीं मिले (क्रिया, अव्यय, सर्वनाम व नाम प्रायः अमरकोश में नहीं होते)।
इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।
कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।
कोई कृदन्त पद नहीं पहचाना गया।
कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।
विश्लेषण-समय: ०.४ सेकण्ड