॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण
"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद
अर्थ: नष्ट करना
संस्कृत: नाशने
अंग्रेज़ी: to kill, to destroy
सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):
लट् लकार, परस्मैपद (कर्तरि):
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | जम्भति / जम्भयति | जम्भतः / जम्भयतः | जम्भन्ति / जम्भयन्ति |
| मध्यम | जम्भयसि / जम्भसि | जम्भथः / जम्भयथः | जम्भथ / जम्भयथ |
| उत्तम | जम्भयामि / जम्भामि | जम्भयावः / जम्भावः | जम्भयामः / जम्भामः |
दसों लकार (प्रथम पुरुष, एकवचन): लट्: जम्भति · लट् (आत्मने.): जम्भयते · लिट्: जजम्भ · लिट् (आत्मने.): जम्भयाञ्चक्रे · लुट्: जम्भयिता · लुट् (आत्मने.): जम्भयिता · लृट्: जम्भयिष्यति · लृट् (आत्मने.): जम्भयिष्यते · लोट्: जम्भतात् · लोट् (आत्मने.): जम्भयताम् · लङ्: अजम्भत् · लङ् (आत्मने.): अजम्भयत · विधिलिङ्: जम्भयेत् · विधिलिङ् (आत्मने.): जम्भयेत · आशीर्लिङ्: जम्भ्यात् · आशीर्लिङ् (आत्मने.): जम्भयिषीष्ट · लुङ्: अजजम्भत् · लुङ् (आत्मने.): अजजम्भत · लृङ्: अजम्भयिष्यत् · लृङ् (आत्मने.): अजम्भयिष्यत
प्रमुख कृदन्त: ल्युट्: जम्भन · ण्वुल्: जम्भकः · तृच्: जम्भिता · यत्: जम्भ्यः · ण्यत्: जम्भ्यः · तव्य: जम्भितव्यः · अनीयर्: जम्भनीयः · क्त: जम्भितः · क्तवतु: जम्भितवान् · शतृ: जम्भन् · स्य-शतृ: जम्भिष्यन् · शानच्: जम्भयमानः · क्त्वा: जम्भित्वा · ल्यप्: प्रजम्भ्य · तुमुन्: जम्भितुम् · णमुल्: जम्भम् · घञ्: जम्भः · क्तिन्: जम्ब्धि · क्वसु: जजम्भ्वान्
| पदम् | विवरणम् |
|---|---|
| जम्भति | जम्भ् धातु (चुरादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन अन्य सम्भावना: जम्भता (स्त्री.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · तद्धित: जम्भ + तल् (भाववाचक) | जम्भत् (नपुं.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: जम्भ् + शतृ |
जम्भति ➤ नष्ट करना
संस्कृत: नाशने
इस शब्द के प्रातिपदिक अमरकोश की पर्याय-सूची में नहीं मिले (क्रिया, अव्यय, सर्वनाम व नाम प्रायः अमरकोश में नहीं होते)।
इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।
कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।
कोई कृदन्त पद नहीं पहचाना गया।
कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।
विश्लेषण-समय: ०.१ सेकण्ड