॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण
"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद
अर्थ: वृद्ध होना, जीर्ण होना
संस्कृत: वयोहानौ
अंग्रेज़ी: to grow old
सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):
लट् लकार, परस्मैपद (कर्तरि):
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | जरति / जारयति | जरतः / जारयतः | जरन्ति / जारयन्ति |
| मध्यम | जरसि / जारयसि | जरथः / जारयथः | जरथ / जारयथ |
| उत्तम | जरामि / जारयामि | जरावः / जारयावः | जरामः / जारयामः |
दसों लकार (प्रथम पुरुष, एकवचन): लट्: जरति · लट् (आत्मने.): जारयते · लिट्: जजार · लिट् (आत्मने.): जारयाञ्चक्रे · लुट्: जरिता · लुट् (आत्मने.): जारयिता · लृट्: जरिष्यति · लृट् (आत्मने.): जारयिष्यते · लोट्: जरतात् · लोट् (आत्मने.): जारयताम् · लङ्: अजरत् · लङ् (आत्मने.): अजारयत · विधिलिङ्: जरेत् · विधिलिङ् (आत्मने.): जारयेत · आशीर्लिङ्: जार्यात् · आशीर्लिङ् (आत्मने.): जारयिषीष्ट · लुङ्: अजरत् · लुङ् (आत्मने.): अजीजरत · लृङ्: अजरिष्यत् · लृङ् (आत्मने.): अजारयिष्यत
प्रमुख कृदन्त: ल्युट्: जरण · ण्वुल्: जारकः · तृच्: जरीता · यत्: जार्यः · ण्यत्: जार्यः · तव्य: जरीतव्यः · अनीयर्: जरणीयः · क्त: जीर्णः · क्तवतु: जीर्णवान् · शतृ: जरन् · स्य-शतृ: जरीष्यन् · शानच्: जारयमाणः · क्त्वा: जरीत्वा · ल्यप्: प्रजीर्य · तुमुन्: जरीतुम् · णमुल्: जारम् · क्तिन्: जीर्णि · क्वसु: जिजीर्वान्
| पदम् | विवरणम् |
|---|---|
| जरति | जॄ धातु (चुरादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन अन्य सम्भावना: जृ धातु (भ्वादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन | जरत् (पुं.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: जृ + शतृ |
जरति ➤ वृद्ध होना, जीर्ण होना
संस्कृत: वयोहानौ
इस शब्द के प्रातिपदिक अमरकोश की पर्याय-सूची में नहीं मिले (क्रिया, अव्यय, सर्वनाम व नाम प्रायः अमरकोश में नहीं होते)।
इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।
कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।
कोई कृदन्त पद नहीं पहचाना गया।
कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।
विश्लेषण-समय: ०.१ सेकण्ड