॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण
"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद
अर्थ: देना, यज्ञ करना, खाना, लेना, भक्षण करना, ग्रहण करना
संस्कृत: दानादानयोः आदाने प्रीणने च
अंग्रेज़ी: to sacrifice,to eat, to consume
सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):
लट् लकार, परस्मैपद (कर्तरि):
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | जुहोति | जुहुतः | जुह्वति |
| मध्यम | जुहोषि | जुहुथः | जुहुथ |
| उत्तम | जुहोमि | जुहुवः | जुहुमः |
दसों लकार (प्रथम पुरुष, एकवचन): लट्: जुहोति · लिट्: जुहवाञ्चकार · लुट्: होता · लृट्: होष्यति · लोट्: जुहुतात् · लङ्: अजुहोत् · विधिलिङ्: जुहुयात् · आशीर्लिङ्: हूयात् · लुङ्: अहौषीत् · लृङ्: अहोष्यत्
प्रमुख कृदन्त: ल्युट्: हवन · ण्वुल्: हावकः · तृच्: होता · यत्: हव्यः · ण्यत्: हाव्यः · तव्य: होतव्यः · अनीयर्: हवनीयः · क्त: हुतः · क्तवतु: हुतवान् · शतृ: जुह्वत्/जुह्वद् · स्य-शतृ: होष्यन् · क्त्वा: हुत्वा · ल्यप्: प्रहुत्य · तुमुन्: होतुम् · णमुल्: हावम् · क्तिन्: हुति · क्वसु: जुहवाम्बभूवान्
| पदम् | विवरणम् |
|---|---|
| जुहोति | हु धातु (जुहोत्यादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन |
जुहोति ➤ देना, यज्ञ करना, खाना, लेना, भक्षण करना, ग्रहण करना
संस्कृत: दानादानयोः आदाने प्रीणने च
इस शब्द के प्रातिपदिक अमरकोश की पर्याय-सूची में नहीं मिले (क्रिया, अव्यय, सर्वनाम व नाम प्रायः अमरकोश में नहीं होते)।
इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।
कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।
कोई कृदन्त पद नहीं पहचाना गया।
कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।
विश्लेषण-समय: ०.३ सेकण्ड