॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण
"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद
अर्थ: जाना
संस्कृत: गतौ
अंग्रेज़ी: to go
सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):
लट् लकार, परस्मैपद (कर्तरि):
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | तङ्गति | तङ्गतः | तङ्गन्ति |
| मध्यम | तङ्गसि | तङ्गथः | तङ्गथ |
| उत्तम | तङ्गामि | तङ्गावः | तङ्गामः |
दसों लकार (प्रथम पुरुष, एकवचन): लट्: तङ्गति · लिट्: ततङ्ग · लुट्: तङ्गिता · लृट्: तङ्गिष्यति · लोट्: तङ्गतात् · लङ्: अतङ्गत् · विधिलिङ्: तङ्गेत् · आशीर्लिङ्: तङ्ग्यात् · लुङ्: अतङ्गीत् · लृङ्: अतङ्गिष्यत्
प्रमुख कृदन्त: ल्युट्: तङ्गन · ण्वुल्: तङ्गकः · तृच्: तङ्गिता · ण्यत्: तङ्ग्यः · तव्य: तङ्गितव्यः · अनीयर्: तङ्गनीयः · क्त: तङ्गितः · क्तवतु: तङ्गितवान् · शतृ: तङ्गन् · स्य-शतृ: तङ्गिष्यन् · क्त्वा: तङ्गित्वा · ल्यप्: प्रतङ्ग्य · तुमुन्: तङ्गितुम् · णमुल्: तङ्गम् · घञ्: तङ्गः · क्तिन्: तङ्क्ति · क्वसु: ततङ्ग्वान्
| पदम् | विवरणम् |
|---|---|
| तङ्गति | तङ्ग् धातु (भ्वादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन अन्य सम्भावना: तङ्गत् (नपुं.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: तङ्ग् + शतृ | तङ्गत् (पुं.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: तङ्ग् + शतृ |
तङ्गति ➤ जाना
संस्कृत: गतौ
इस शब्द के प्रातिपदिक अमरकोश की पर्याय-सूची में नहीं मिले (क्रिया, अव्यय, सर्वनाम व नाम प्रायः अमरकोश में नहीं होते)।
इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।
कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।
कोई कृदन्त पद नहीं पहचाना गया।
कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।
विश्लेषण-समय: ०.२ सेकण्ड