॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण
"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद
अर्थ: वृद्धि होना, बढ़ती होना
संस्कृत: समृद्धौ
अंग्रेज़ी: to prosper
सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):
लट् लकार, परस्मैपद (कर्तरि):
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | नन्दति | नन्दतः | नन्दन्ति |
| मध्यम | नन्दसि | नन्दथः | नन्दथ |
| उत्तम | नन्दामि | नन्दावः | नन्दामः |
दसों लकार (प्रथम पुरुष, एकवचन): लट्: नन्दति · लिट्: ननन्द · लुट्: नन्दिता · लृट्: नन्दिष्यति · लोट्: नन्दतात् · लङ्: अनन्दत् · विधिलिङ्: नन्देत् · आशीर्लिङ्: नन्द्यात् · लुङ्: अनन्दीत् · लृङ्: अनन्दिष्यत्
प्रमुख कृदन्त: ल्युट्: नन्दन · ण्वुल्: नन्दकः · तृच्: नन्दिता · ण्यत्: नन्द्यः · तव्य: नन्दितव्यः · अनीयर्: नन्दनीयः · क्त: नन्दितः · क्तवतु: नन्दितवान् · शतृ: नन्दन् · स्य-शतृ: नन्दिष्यन् · क्त्वा: नन्दित्वा · ल्यप्: प्रनन्द्य · तुमुन्: नन्दितुम् · णमुल्: नन्दम् · घञ्: नन्दः · क्तिन्: नन्ति · क्वसु: ननन्द्वान्
| पदम् | विवरणम् |
|---|---|
| नन्दति | नन्द् धातु (भ्वादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन अन्य सम्भावना: नन्दता (स्त्री.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · तद्धित: नन्द + तल् (भाववाचक) | नन्दत् (पुं.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: नन्द् + शतृ |
नन्दति ➤ वृद्धि होना, बढ़ती होना
संस्कृत: समृद्धौ
इस शब्द के प्रातिपदिक अमरकोश की पर्याय-सूची में नहीं मिले (क्रिया, अव्यय, सर्वनाम व नाम प्रायः अमरकोश में नहीं होते)।
इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।
कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।
कोई कृदन्त पद नहीं पहचाना गया।
कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।
विश्लेषण-समय: ०.१ सेकण्ड