॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण
"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद
अर्थ: स्वामी, प्रभू
संस्कृत: पतिः, अधिपतिः · पर्याय: धव, प्रिय, भर्तृ
व्युत्पत्ति: पाति रक्षति-पा + इति
सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):
📗 शब्द-रूपावली में पूरी तालिका
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | पतिः | पती | पतयः |
| द्वितीया | पतिम् | पती | पतीन् |
| तृतीया | पतिना | पतिभ्याम् | पतिभिः |
| चतुर्थी | पतये | पतिभ्याम् | पतिभ्यः |
| पञ्चमी | पतेः | पतिभ्याम् | पतिभ्यः |
| षष्ठी | पतेः | पत्योः | पतीनाम् |
| सप्तमी | पतौ | पत्योः | पतिषु |
| सम्बोधन | हे पते | हे पती | हे पतयः |
रंगीन खाना = आपका लिखा रूप। रूप प्रतिमान (paradigm) से बने हैं; कुछ शब्दों के वैकल्पिक/आर्ष रूप भिन्न हो सकते हैं।
| पदम् | विवरणम् |
|---|---|
| पतिः | पति (पुं.) — प्रथमा विभक्ति, एकवचन |
पतिः ➤ स्वामी, प्रभू
संस्कृत: पतिः, अधिपतिः · पर्याय: धव, प्रिय, भर्तृ
| शब्द | अमरकोश — विषय, पर्याय |
|---|---|
| पति |
पति के नाम (२.६.३५) — धव, प्रिय, भर्ता धव (३.३.२१७) — मनुष्य |
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इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।
कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।
कोई कृदन्त पद नहीं पहचाना गया।
कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।
विश्लेषण-समय: ०.१ सेकण्ड