॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण
"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद
अर्थ: भाई, सहोदर
संस्कृत: भ्राता, बन्धुः, सहोदरः
व्युत्पत्ति: भ्राज्+तृच् (कृदन्त)
सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):
📗 शब्द-रूपावली में पूरी तालिका
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | भ्राता | भ्रातरौ | भ्रातरः |
| द्वितीया | भ्रातरम् | भ्रातरौ | भ्रातॄन् |
| तृतीया | भ्रात्रा | भ्रातृभ्याम् | भ्रातृभिः |
| चतुर्थी | भ्रात्रे | भ्रातृभ्याम् | भ्रातृभ्यः |
| पञ्चमी | भ्रातुः | भ्रातृभ्याम् | भ्रातृभ्यः |
| षष्ठी | भ्रातुः | भ्रात्रोः | भ्रातॄणाम् |
| सप्तमी | भ्रातरि | भ्रात्रोः | भ्रातृषु |
| सम्बोधन | हे भ्रातः | हे भ्रातरौ | हे भ्रातरः |
रंगीन खाना = आपका लिखा रूप। रूप प्रतिमान (paradigm) से बने हैं; कुछ शब्दों के वैकल्पिक/आर्ष रूप भिन्न हो सकते हैं।
| पदम् | विवरणम् |
|---|---|
| भ्राता | भ्रातृ (पुं.) — प्रथमा विभक्ति, एकवचन |
भ्राता ➤ भाई, सहोदर
संस्कृत: भ्राता, बन्धुः, सहोदरः
इस शब्द के प्रातिपदिक अमरकोश की पर्याय-सूची में नहीं मिले (क्रिया, अव्यय, सर्वनाम व नाम प्रायः अमरकोश में नहीं होते)।
इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।
कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।
कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।
विश्लेषण-समय: ०.२ सेकण्ड