॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण
"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद
अर्थ: बांधना, रोकना
संस्कृत: बन्धने
अंग्रेज़ी: to hinder, to tie, to bind, to stop, to resist
सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):
लट् लकार, परस्मैपद (कर्तरि):
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | मव्यति | मव्यतः | मव्यन्ति |
| मध्यम | मव्यसि | मव्यथः | मव्यथ |
| उत्तम | मव्यामि | मव्यावः | मव्यामः |
दसों लकार (प्रथम पुरुष, एकवचन): लट्: मव्यति · लिट्: ममव्य · लुट्: मव्यिता · लृट्: मव्यिष्यति · लोट्: मव्यतात् · लङ्: अमव्यत् · विधिलिङ्: मव्येत् · आशीर्लिङ्: मव्यात् · लुङ्: अमव्यीत् · लृङ्: अमव्यिष्यत्
प्रमुख कृदन्त: ल्युट्: मव्यन · ण्वुल्: मव्यकः · तृच्: मव्यिता · ण्यत्: मव्यः · तव्य: मव्यितव्यः · अनीयर्: मव्यनीयः · क्त: मव्यितः · क्तवतु: मव्यितवान् · शतृ: मव्यन् · स्य-शतृ: मव्यिष्यन् · क्त्वा: मव्यित्वा · ल्यप्: प्रमव्य · तुमुन्: मव्यितुम् · णमुल्: मव्यम् · घञ्: मव्यः · क्तिन्: मति · क्वसु: ममवान्
| पदम् | विवरणम् |
|---|---|
| मव्यति | मव्य् धातु (भ्वादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन अन्य सम्भावना: मव्यत् (पुं.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: मव्य् + शतृ | मव्यता (स्त्री.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: मव्य् + ण्यत् · तद्धित: मव्य + तल् (भाववाचक) |
मव्यति ➤ बांधना, रोकना
संस्कृत: बन्धने
इस शब्द के प्रातिपदिक अमरकोश की पर्याय-सूची में नहीं मिले (क्रिया, अव्यय, सर्वनाम व नाम प्रायः अमरकोश में नहीं होते)।
इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।
कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।
कोई कृदन्त पद नहीं पहचाना गया।
कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।
विश्लेषण-समय: ०.१ सेकण्ड