॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण
"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद
अर्थ: रचना करना, शिल्पकार्य करना, ग्रन्थ बनाना
संस्कृत: प्रतियत्ने
अंग्रेज़ी: to create, to craft, to compose
सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):
लट् लकार, परस्मैपद (कर्तरि):
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | रचयति | रचयतः | रचयन्ति |
| मध्यम | रचयसि | रचयथः | रचयथ |
| उत्तम | रचयामि | रचयावः | रचयामः |
दसों लकार (प्रथम पुरुष, एकवचन): लट्: रचयति · लट् (आत्मने.): रचयते · लिट्: रचयाञ्चकार · लिट् (आत्मने.): रचयाञ्चक्रे · लुट्: रचयिता · लुट् (आत्मने.): रचयिता · लृट्: रचयिष्यति · लृट् (आत्मने.): रचयिष्यते · लोट्: रचयतात् · लोट् (आत्मने.): रचयताम् · लङ्: अरचयत् · लङ् (आत्मने.): अरचयत · विधिलिङ्: रचयेत् · विधिलिङ् (आत्मने.): रचयेत · आशीर्लिङ्: रच्यात् · आशीर्लिङ् (आत्मने.): रचयिषीष्ट · लुङ्: अररचत् · लुङ् (आत्मने.): अररचत · लृङ्: अरचयिष्यत् · लृङ् (आत्मने.): अरचयिष्यत
प्रमुख कृदन्त: ल्युट्: रचन · ण्वुल्: रचकः · तृच्: रचयिता · यत्: रच्यः · तव्य: रचयितव्यः · अनीयर्: रचनीयः · क्त: रचितः · क्तवतु: रचितवान् · शतृ: रचयन् · स्य-शतृ: रचयिष्यन् · शानच्: रचयमानः · क्त्वा: रचयित्वा · ल्यप्: प्ररचय्य · तुमुन्: रचयितुम् · णमुल्: रचम् · क्तिन्: रक्ति · क्वसु: रचयाम्बभूवान्
| पदम् | विवरणम् |
|---|---|
| रचयति | रच धातु (चुरादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन अन्य सम्भावना: रच धातु (चुरादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन · णिजन्त (प्रेरणार्थक) | रचयत् (नपुं.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: रच + शतृ |
रचयति ➤ रचना करना, शिल्पकार्य करना, ग्रन्थ बनाना
संस्कृत: प्रतियत्ने
इस शब्द के प्रातिपदिक अमरकोश की पर्याय-सूची में नहीं मिले (क्रिया, अव्यय, सर्वनाम व नाम प्रायः अमरकोश में नहीं होते)।
इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।
कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।
कोई कृदन्त पद नहीं पहचाना गया।
कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।
विश्लेषण-समय: ०.१ सेकण्ड