॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण
"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद
अर्थ: स्वाद लेना, चखना, प्रीती करना, प्यार करना
संस्कृत: आस्वादनस्नेहनयोः
अंग्रेज़ी: to tastem to love, to have affection
सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):
लट् लकार, परस्मैपद (कर्तरि):
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | रसयति | रसयतः | रसयन्ति |
| मध्यम | रसयसि | रसयथः | रसयथ |
| उत्तम | रसयामि | रसयावः | रसयामः |
दसों लकार (प्रथम पुरुष, एकवचन): लट्: रसयति · लट् (आत्मने.): रसयते · लिट्: रसयाञ्चकार · लिट् (आत्मने.): रसयाञ्चक्रे · लुट्: रसयिता · लुट् (आत्मने.): रसयिता · लृट्: रसयिष्यति · लृट् (आत्मने.): रसयिष्यते · लोट्: रसयतात् · लोट् (आत्मने.): रसयताम् · लङ्: अरसयत् · लङ् (आत्मने.): अरसयत · विधिलिङ्: रसयेत् · विधिलिङ् (आत्मने.): रसयेत · आशीर्लिङ्: रस्यात् · आशीर्लिङ् (आत्मने.): रसयिषीष्ट · लुङ्: अररसत् · लुङ् (आत्मने.): अररसत · लृङ्: अरसयिष्यत् · लृङ् (आत्मने.): अरसयिष्यत
प्रमुख कृदन्त: ल्युट्: रसन · ण्वुल्: रसकः · तृच्: रसयिता · यत्: रस्यः · तव्य: रसयितव्यः · अनीयर्: रसनीयः · क्त: रसितः · क्तवतु: रसितवान् · शतृ: रसयन् · स्य-शतृ: रसयिष्यन् · शानच्: रसयमानः · क्त्वा: रसयित्वा · ल्यप्: प्ररसय्य · तुमुन्: रसयितुम् · णमुल्: रसम् · क्तिन्: रस्ति · क्वसु: रसयाम्बभूवान्
| पदम् | विवरणम् |
|---|---|
| रसयति | रस धातु (चुरादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन अन्य सम्भावना: रस धातु (चुरादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन · णिजन्त (प्रेरणार्थक) | रसयत् (नपुं.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: रस + शतृ |
रसयति ➤ स्वाद लेना, चखना, प्रीती करना, प्यार करना
संस्कृत: आस्वादनस्नेहनयोः
इस शब्द के प्रातिपदिक अमरकोश की पर्याय-सूची में नहीं मिले (क्रिया, अव्यय, सर्वनाम व नाम प्रायः अमरकोश में नहीं होते)।
इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।
कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।
कोई कृदन्त पद नहीं पहचाना गया।
कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।
विश्लेषण-समय: ०.२ सेकण्ड