॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण
"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद
अर्थ: अरण्य, जंगल, वृक्षों का झुरमुट
संस्कृत: जलम्, वनम् · पर्याय: अप्, वार्, वारि, सलिल, कमल
व्युत्पत्ति: वन् + अच् (कृदन्त)
सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):
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| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | वनम् | वने | वनानि |
| द्वितीया | वनम् | वने | वनानि |
| तृतीया | वनेन | वनाभ्याम् | वनैः |
| चतुर्थी | वनाय | वनाभ्याम् | वनेभ्यः |
| पञ्चमी | वनात् / वनाद् | वनाभ्याम् | वनेभ्यः |
| षष्ठी | वनस्य | वनयोः | वनानाम् |
| सप्तमी | वने | वनयोः | वनेषु |
| सम्बोधन | हे वन | हे वने | हे वनानि |
रंगीन खाना = आपका लिखा रूप। रूप प्रतिमान (paradigm) से बने हैं; कुछ शब्दों के वैकल्पिक/आर्ष रूप भिन्न हो सकते हैं।
| पदम् | विवरणम् |
|---|---|
| वनम् | वन (नपुं.) — द्वितीया विभक्ति, एकवचन अन्य सम्भावना: वन (नपुं.) — प्रथमा विभक्ति, एकवचन | वन् धातु (भ्वादिगण, परस्मैपद) — लङ् लकार, उत्तम पुरुष, एकवचन (माङ्योग में अट्-आगम का अभाव — न माङ्योगे) |
वनम् ➤ अरण्य, जंगल, वृक्षों का झुरमुट
संस्कृत: जलम्, वनम् · पर्याय: अप्, वार्, वारि, सलिल, कमल
| शब्द | अमरकोश — विषय, पर्याय |
|---|---|
| वन |
वन के नाम (२.४.१) — अटवी, अरण्य, विपिन, गहन, कानन दव/दाव (३.३.२१७) — जंगल |
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कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।
विश्लेषण-समय: ०.१ सेकण्ड