॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण
"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद
अर्थ: बोलना
संस्कृत: भाषायाम्
अंग्रेज़ी: to speak, to talk
सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):
लट् लकार, परस्मैपद (कर्तरि):
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | वर्धति / वर्धयति | वर्धतः / वर्धयतः | वर्धन्ति / वर्धयन्ति |
| मध्यम | वर्धयसि / वर्धसि | वर्धथः / वर्धयथः | वर्धथ / वर्धयथ |
| उत्तम | वर्धयामि / वर्धामि | वर्धयावः / वर्धावः | वर्धयामः / वर्धामः |
दसों लकार (प्रथम पुरुष, एकवचन): लट्: वर्धति · लट् (आत्मने.): वर्धयते · लिट्: वर्धयाञ्चकार · लिट् (आत्मने.): वर्धयाञ्चक्रे · लुट्: वर्धयिता · लुट् (आत्मने.): वर्धयिता · लृट्: वर्धयिष्यति · लृट् (आत्मने.): वर्धयिष्यते · लोट्: वर्धतात् · लोट् (आत्मने.): वर्धयताम् · लङ्: अवर्धत् · लङ् (आत्मने.): अवर्धयत · विधिलिङ्: वर्धयेत् · विधिलिङ् (आत्मने.): वर्धयेत · आशीर्लिङ्: वर्ध्यात् · आशीर्लिङ् (आत्मने.): वर्धयिषीष्ट · लुङ्: अवर्धीत् · लुङ् (आत्मने.): अववर्धत · लृङ्: अवर्धयिष्यत् · लृङ् (आत्मने.): अवर्धयिष्यत
प्रमुख कृदन्त: ल्युट्: वर्धन · ण्वुल्: वर्धकः · तृच्: वर्धिता · यत्: वर्ध्यः · तव्य: वर्धितव्यः · अनीयर्: वर्धनीयः · क्त: वृद्धः · क्तवतु: वृद्धवान् · शतृ: वर्धन् · स्य-शतृ: वर्धिष्यन् · शानच्: वर्धयमानः · क्त्वा: वृद्ध्वा · ल्यप्: प्रवृध्य · तुमुन्: वर्धितुम् · णमुल्: वर्धम् · घञ्: वर्धः · क्तिन्: वृद्धि · क्वसु: ववृध्वान्
| पदम् | विवरणम् |
|---|---|
| वर्धति | वृध् धातु (चुरादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन अन्य सम्भावना: वर्धता (स्त्री.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · तद्धित: वर्ध + तल् (भाववाचक) | वर्धत् (नपुं.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: वृध् + शतृ |
वर्धति ➤ बोलना
संस्कृत: भाषायाम्
इस शब्द के प्रातिपदिक अमरकोश की पर्याय-सूची में नहीं मिले (क्रिया, अव्यय, सर्वनाम व नाम प्रायः अमरकोश में नहीं होते)।
इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।
कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।
कोई कृदन्त पद नहीं पहचाना गया।
कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।
विश्लेषण-समय: ०.१ सेकण्ड