॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण
"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद
अर्थ: सेवा करना
संस्कृत: सेवायाम्
अंग्रेज़ी: to serve
सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):
लट् लकार, परस्मैपद (कर्तरि):
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | श्रयति | श्रयतः | श्रयन्ति |
| मध्यम | श्रयसि | श्रयथः | श्रयथ |
| उत्तम | श्रयामि | श्रयावः | श्रयामः |
दसों लकार (प्रथम पुरुष, एकवचन): लट्: श्रयति · लट् (आत्मने.): श्रयते · लिट्: शिश्राय · लिट् (आत्मने.): शिश्रिये · लुट्: श्रयिता · लुट् (आत्मने.): श्रयिता · लृट्: श्रयिष्यति · लृट् (आत्मने.): श्रयिष्यते · लोट्: श्रयतात् · लोट् (आत्मने.): श्रयताम् · लङ्: अश्रयत् · लङ् (आत्मने.): अश्रयत · विधिलिङ्: श्रयेत् · विधिलिङ् (आत्मने.): श्रयेत · आशीर्लिङ्: श्रीयात् · आशीर्लिङ् (आत्मने.): श्रयिषीष्ट · लुङ्: अशिश्रियत् · लुङ् (आत्मने.): अशिश्रियत · लृङ्: अश्रयिष्यत् · लृङ् (आत्मने.): अश्रयिष्यत
प्रमुख कृदन्त: ल्युट्: श्रयण · ण्वुल्: श्रायकः · तृच्: श्रयिता · यत्: श्रेयः · तव्य: श्रयितव्यः · अनीयर्: श्रयणीयः · क्त: श्रितः · क्तवतु: श्रितवान् · शतृ: श्रयन् · स्य-शतृ: श्रयिष्यन् · शानच्: श्रयमाणः · क्त्वा: श्रित्वा · ल्यप्: प्रश्रित्य · तुमुन्: श्रयितुम् · णमुल्: श्रायम् · घञ्: श्रायः · क्तिन्: श्रिति · क्वसु: शिश्रिवान्
| पदम् | विवरणम् |
|---|---|
| श्रयति | श्रि धातु (भ्वादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन अन्य सम्भावना: श्रयता (स्त्री.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · तद्धित: श्रय + तल् (भाववाचक) | श्रयत् (नपुं.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: श्रि + शतृ |
श्रयति ➤ सेवा करना
संस्कृत: सेवायाम्
इस शब्द के प्रातिपदिक अमरकोश की पर्याय-सूची में नहीं मिले (क्रिया, अव्यय, सर्वनाम व नाम प्रायः अमरकोश में नहीं होते)।
इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।
कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।
कोई कृदन्त पद नहीं पहचाना गया।
कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।
विश्लेषण-समय: ०.१ सेकण्ड