✍️ CD Sharma · 📅 19 Sep 2026 · ⏱️ 1 मिनट का पठन · 🏷️ चाक्षुषोपनिषद्, चाक्षुषी विद्या, नेत्र रोग निवारक मंत्र, सूर्य देव मंत्र, कृष्ण यजुर्वेद, दृष्टि दोष निवारण, चाक्षुषी विद्या पाठ, Chakshushopanishad, Chakshushi Vidya, Netra Rog Nivaran Mantra, Surya Upasana, Krishna Yajurveda, Vedic Mantra for Eyes
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चाक्षुषोपनिषद् कृष्ण यजुर्वेद की एक अत्यंत सिद्ध और कल्याणकारी विद्या है। इसे 'चाक्षुषी विद्या' अथवा 'चाक्षुष्मती विद्या' भी कहा जाता है। सनातन परंपरा में नेत्र रोगों की निवृत्ति, नेत्र ज्योति की स्थिरता तथा दृष्टि दोषों से मुक्ति के लिए भगवान भुवन भास्कर की आराधना के रूप में इसका नित्य पाठ अचूक फलदायी माना गया है।
हाथ में जल, अक्षत और पुष्प लेकर निम्नलिखित विनियोग मंत्र का उच्चारण करें और जल भूमि पर छोड़ दें:
ॐ अस्याश्चाक्षुषीविद्याया अहिर्बुध्न्य ऋषिर्गायत्री छन्दः सूर्यो देवता चक्षूरोगनिवृत्तये विनियोगः ।
ॐ चक्षुः चक्षुः चक्षुः तेजः स्थिरो भव । मां पाहि पाहि । त्वरितं चक्षूरोगान् शमय शमय । मम जातरूपं तेजो दर्शय दर्शय । यथा अहम् अन्धो न स्यां तथा कल्पय कल्पय । कल्याणं कुरु कुरु । यानि मम पूर्वजन्मोपार्जितानि चक्षुःप्रतिरोधकदुष्कृतानि सर्वाणि निर्मूलय निर्मूलय ।
ॐ नमः चक्षुस्तेजोदात्रे दिव्याय भास्कराय । ॐ नमः करुणाकराय अमृताय । ॐ नमः सूर्याय । ॐ नमो भगवते सूर्यायाक्षितेजसे नमः । खेचराय नमः । महते नमः । रजसे नमः । तमसे नमः । असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । उष्णो भगवाञ्छुचिरूपः । हंसो भगवान् शुचिरप्रतिरूपः ।
य इमां चाक्षुष्मतीविद्यां ब्राह्मणो नित्यमधीते न तस्याक्षिरोगो भवति । न तस्य कुले अन्धो भवति । अष्टौ ब्राह्मणान् सम्यग् ग्राहयित्वा विद्यासिद्धिर्भवति । ॐ नमो भगवते आदित्याय अहोवाहिनी अहोवाहिनी स्वाहा ।
॥ श्रीकृष्णयजुर्वेदीया चाक्षुषी विद्या सम्पूर्णा ॥
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