🕉️ 26 September 2026, Saturday · 05:30:38 AM · CDSHARMA.IN

श्रीअर्धनारीश्वर स्तोत्रम्: सम्पूर्ण संस्कृत पाठ एवं फलश्रुति | Shri Ardhanarishwara Stotram | cdsharma.in

✍️ CD Sharma · 📅 19 Sep 2026 · ⏱️ 1 मिनट का पठन · 🏷️ Ardhanarishwara Stotram, Shiva Parvati Stotra, Adi Shankaracharya, Ardhanarishvara Sanskrit Path, Shiv Shakti Stuti, Namah Shivayai Cha Namah Shivaya, अर्धनारीश्वर स्तोत्र, शिव पार्वती स्तुति, आदि शंकराचार्य विरचित, शिव शक्ति मंत्र, सनातन धर्म, cdsharma.i

👁️ 11 बार देखा गया · 🔗 0 बार शेयर हुआ

श्रीअर्धनारीश्वर स्तोत्रम्: सम्पूर्ण संस्कृत पाठ एवं फलश्रुति | Shri Ardhanarishwara Stotram | cdsharma.in

​॥ श्रीअर्धनारीश्वरस्तोत्रम् ॥

​आदिगुरु श्रीमद् आद्य शंकराचार्य जी द्वारा विरचित 'अर्धनारीश्वरस्तोत्रम्' परमब्रह्म शिव और पराशक्ति आद्यशक्ति पार्वती के अभिन्न एकत्व का अद्भुत स्तवन है। यह स्तोत्र पुरुष और प्रकृति के दिव्य समन्वय को प्रकट करता है, जहाँ प्रत्येक श्लोक के माध्यम से माता भवानी और देवाधिदेव महादेव को एक साथ "नमः शिवायै च नमः शिवाय" कहकर प्रणाम किया गया है।

​मूल स्तोत्र पाठ

​चाम्पेयगौरार्धशरीरकायै

कर्पूरगौरार्धशरीरकाय ।

धम्मिल्लकायै च जटाधराय

नमः शिवायै च नमः शिवाय ॥ १ ॥


​कस्तूरिकाकुङ्कुमचर्चितायै

चितारजःपुञ्जविचर्चिताय ।

कृतस्मरायै विकृतस्मराय

नमः शिवायै च नमः शिवाय ॥ २ ॥


​झणत्क्वणत्कङ्कणनूपुरायै

पादाब्जराजत्फणिनूपुराय ।

हेमाङ्गदायै भुजगाङ्गदाय

नमः शिवायै च नमः शिवाय ॥ ३ ॥


​विशालनीलोत्पललोचनायै

विकासिपङ्केरुहलोचनाय ।

समेक्षणायै विषमेक्षणाय

नमः शिवायै च नमः शिवाय ॥ ४ ॥


​मन्दारमालाकलितालकायै

कपालमालाङ्कितकन्धराय ।

दिव्याम्बरायै च दिगम्बराय

नमः शिवायै च नमः शिवाय ॥ ५ ॥


​अम्भोधरश्यामलकुन्तलायै

तडित्प्रभाताम्रजटाधराय ।

निरीश्वरायै निखिलेश्वराय

नमः शिवायै च नमः शिवाय ॥ ६ ॥


​प्रपञ्चसृष्ट्युन्मुखलास्यकायै

समस्तसंहारकताण्डवाय ।

जगज्जनन्यै जगदेकपित्रे

नमः शिवायै च नमः शिवाय ॥ ७ ॥


​प्रदीप्तरत्नोज्वलकुण्डलायै

स्फुरन्महापन्नगभूषणाय ।

शिवान्वितायै च शिवान्विताय

नमः शिवायै च नमः शिवाय ॥ ८ ॥

​फलश्रुति

​एतत्पठेदष्टकमिष्टदं यो

भक्त्या स मान्यो भुवि दीर्घजीवी ।

प्राप्नोति सौभाग्यमनन्तकालं

भूयात्सदा तस्य समस्तसिद्धिः ॥ ९ ॥

​॥ इति श्रीमत्परमहंसपरिव्राजकाचार्यस्य श्रीगोविन्दभगवत्पूज्यपाद शिष्यस्य श्रीमच्छंकरभगवतः कृतौ अर्धनारीश्वरस्तोत्रम् संपूर्णम् ॥

​स्तोत्र का सार व आध्यात्मिक माहात्म्य

  • ​शिव-शक्ति का एकात्म भाव: इस स्तोत्र में भगवान के वामांग (माता पार्वती - चंपा पुष्प के समान गौर वर्ण, सुंदर जूड़ा, कस्तूरी-कुमकुम का लेप, कंकण-नूपुर और लास्य नृत्य) तथा दक्षिणांग (भगवान शिव - कर्पूर गौर वर्ण, जटाजूट, भस्म लेप, नागभूषण और संहारक तांडव) का परस्पर विलक्षण समन्वय वर्णित है।
  • ​पाठ का फल: जो साधक नित्य या विशेषकर प्रदोष, महाशिवरात्रि अथवा सोमवार के दिन पूर्ण श्रद्धा और भक्ति से इस अष्टक का पाठ करता है, वह संसार में प्रतिष्ठा और दीर्घायु प्राप्त करता है। उसके दांपत्य जीवन में परस्पर सामंजस्य और चिरस्थायी सौभाग्य की वृद्धि होती है तथा उसे समस्त मनोवांछित सिद्धियों की प्राप्ति होती है।


💬 कमेंट (0)

1 × 7 = ?

अभी कोई कमेंट नहीं — सबसे पहले आप लिखें!

📚 संबंधित लेख

← सभी लेख देखें

💬 ज्योतिषीय प्रश्न पूछें