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श्रीदुर्गासप्तशती सहस्रनाम स्तोत्रम् (संस्कृत श्लोक एवं सम्पूर्ण हिन्दी अर्थ सहित) | cdsharma.in

✍️ CD Sharma · 📅 18 Oct 2026 · ⏱️ 1 मिनट का पठन · 🏷️ दुर्गासप्तशती, Durga Saptashati, श्रीदुर्गासप्तशतीसहस्रनामस्तोत्रम्, Durga Sahasranama Stotram, Devi Mahatmyam, दुर्गा सहस्रनाम, Durga 1000 Names, देवी स्तोत्र, Navratri Stotram, Sanskrit Stotra with Hindi Meaning, cdsharma.in, शाक्त साधना, भगवती दुर्गा

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श्रीदुर्गासप्तशती सहस्रनाम स्तोत्रम् (संस्कृत श्लोक एवं सम्पूर्ण हिन्दी अर्थ सहित) | cdsharma.in

श्रीदुर्गासप्तशती सहस्रनाम स्तोत्रम्

(मूल संस्कृत श्लोक एवं सम्पूर्ण हिन्दी अनुवाद)

श्रीदुर्गासप्तशती (देवी माहात्म्य) सनातन धर्म के शाक्त सम्प्रदाय का सर्वोपरि एवं सिद्ध ग्रन्थ है। इसी परम कल्याणकारी ग्रन्थ से उद्धृत ‘श्रीदुर्गासप्तशती सहस्रनाम स्तोत्रम्’ भगवती दुर्गा के एक सहस्र (1000) दिव्य, परात्पर और मंगलकारी स्वरूपों की स्तुति है। इसके नियमित पाठ से दैहिक, दैविक और भौतिक तापों का शमन होकर धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

॥ अथ श्रीदुर्गासप्तशतीसहस्रनामस्तोत्रम् ॥

नमस्तस्यै ।

ॐ अम्बा कात्यायनी काली कमला करुणामयी । अतुला कालिका कृष्णा कल्याणी कामरूपिणी ॥ १॥

हिन्दी अर्थ: भगवती जगदम्बा को नमस्कार है। ॐ—वे सम्पूर्ण जगत् की माता (अम्बा), कत ऋषि के कुल में आविर्भूत कात्यायनी, दुष्टसंहारक कालस्वरूपा काली, लक्ष्मीस्वरूपा कमला, साक्षात् दयामयी (करुणामयी), अतुलनीय (अतुला), महाकालिका, श्यामवर्णा कृष्णा, परम कल्याणकारी कल्याणी तथा स्वेच्छानुसार दिव्य रूप धारण करने वाली कामरूपिणी हैं ॥ १॥

अर्धमात्रास्थिता कर्त्री कालातीता कलाघरी । अनुच्चार्या च कामाक्षी क्रुद्धा कैटभहारिणी ॥ २॥

हिन्दी अर्थ: वे प्रणव (ॐ) की तुरीय अर्धमात्रा में विराजित, सृष्टि की कर्त्री, काल के बंधनों से परे (कालातीता), समस्त कलाओं को धारण करने वाली (कलाधरी), वाणी की सीमा से परे अकथनीय (अनुच्चार्या), मनोहर कमनीय नेत्रों वाली (कामाक्षी), दुष्टों पर कुपित होने वाली तथा कैटभ दैत्य का संहार करने वाली हैं ॥ २॥

अनायस्तानना ख्यातिः कान्तिरूपाऽतिसुन्दरी । अम्बिका कामधेनुश्च कामदा चाखिलात्मिका ॥ ३॥

हिन्दी अर्थ: वे बिना किसी श्रम या विकार से युक्त दिव्य मुखमण्डल वाली (अनायस्तानना), यशस्वरूपा (ख्याति), तेजोमयी, परम लावण्यमयी अतिसुन्दरी, जगन्माता अम्बिका, सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाली कामधेनु, अभीष्ट प्रदात्री तथा समस्त चराचर की आत्मा (अखिलात्मिका) हैं ॥ ३॥

अरविन्दस्थिता पद्मा कुञ्जिका करुणा कृतिः ।

अरुणा चारूणक्षौमा कुपिताऽरुणलोचना ॥ ४॥

हिन्दी अर्थ: वे कमल पर विराजमान, पद्मा (महालक्ष्मी), समस्त मन्त्र-रहस्यों की कुञ्जी (कुञ्जिका), करुणा की साक्षात् मूर्ति, प्रातःकालीन सूर्य सदृश लाल कान्ति वाली (अरुणा), मनोहर रक्त वस्त्र धारण करने वाली तथा असुरों पर कुपित होकर लाल नेत्रों वाली हैं ॥ ४॥

अखिलदेवपूज्या च कमला कनकाम्बरा ।

अलक्ष्मीः कालरात्रिश्च कूष्माण्डा कालरूपिणी ॥ ५॥

हिन्दी अर्थ: वे समस्त देवगणों द्वारा पूजित, कमला, सुवर्ण सदृश पीताम्बर धारण करने वाली, दुष्टों के लिए दरिद्रतारूपा/अलक्ष्मीनाशिनी, प्रलय की कालरात्रि, अपने उदर में ब्रह्माण्ड को धारण करने वाली कूष्माण्डा तथा कालस्वरूपिणी हैं ॥ ५॥

अपारा कीर्तिता गौरी कौमारी करुणार्णवा ।

अव्याकृता जगन्मूर्तिश्चाविचिन्त्यमहाव्रता ॥ ६॥

हिन्दी अर्थ: जिनकी महिमा का कोई पार नहीं (अपारा), परम यशस्वी, गौरवर्णा गौरी, कुमारी स्वरूपा कौमारी, करुणा की अथाह महासागर, प्रकृति के अव्यक्त स्वरूप (अव्याकृता), सम्पूर्ण विश्व ही जिनका विग्रह है तथा जिनका महाव्रत अचिन्त्य है ॥ ६॥

अखिलशास्त्रसारा च देवी कारुण्यरूपिणी । अवतारत्रयाऽसङ्गा दुर्गा कामफलप्रदा ॥ ७॥

हिन्दी अर्थ: वे समस्त वेदों और शास्त्रों का सार, साक्षात् कारुण्यमयी देवी, महाकाली-महालक्ष्मी-महासरस्वती रूपी तीन अवतारों से युक्त होकर भी निर्लेप/अनासक्त (असङ्गा), दुर्गतिनाशिनी दुर्गा तथा सभी अभीष्ट फलों को देने वाली हैं ॥ ७॥

अतिसाधुमतिर्जाया जयन्ती चापराजिता । अपराऽतुल्यरूपा च नित्याऽसुरनिबर्हिणी ॥ ८॥

हिन्दी अर्थ: वे परम विशुद्ध सात्त्विक बुद्धि वाली, शिव की अर्धांगिनी (जाया), सर्वोत्कृष्ट जयन्ती, कभी पराजित न होने वाली अपराजिता, प्रकृतिस्वरूपा (अपरा), अनुपम सौन्दर्य वाली, नित्यस्वरूपा तथा असुरों का संहार करने वाली हैं ॥ ८॥

असुरवीर्यहन्त्री च नारी कनकभूषणा । आद्याऽतिहारिरूपा च किरीटिनी कुलेश्वरी ॥ ९॥

हिन्दी अर्थ: वे दैत्यों के बल-वीर्य का विनाश करने वाली, पराशक्ति नारी, सुवर्ण आभूषणों से अलंकृत, आद्याशक्ति, मनमोहक रूप वाली, मुकुटधारिणी (किरीटिनी) तथा कुल की अधिष्ठात्री कुलेश्वरी हैं ॥ ९॥

अतिसौम्याऽतिरौद्रा च कनकोत्तमभूषणा । अतिशुद्धगुणाऽभेद्या चानुपमपराक्रमा ॥ १०॥

हिन्दी अर्थ: वे भक्तों के लिए परम सौम्य तथा दुष्टों के लिए अत्यंत भयानक (अतिरौद्रा), श्रेष्ठ स्वर्णाभूषणों से मंडित, परम पवित्र गुणों वाली, अभेद्य तथा अद्वितीय पराक्रम से सम्पन्न हैं ॥ १०॥

अयोनिजाऽतिचार्वङ्गी कामिकाऽभीष्टसंश्रया । विस्तारवदनाऽनन्ता कोपवत्यतिभीषणा ॥ ११॥

हिन्दी अर्थ: वे अजन्मा (अयोनिजा), अत्यंत मनोहर अंगों वाली, कामनाओं को पूर्ण करने वाली, सभी मनोरथों का आश्रय, संहारकाल में विस्तृत मुख वाली, अनंत, असुरों पर क्रोध करने वाली तथा महाभीषण रूप वाली हैं ॥ ११॥

अणिमादिमयूखाप्ता कामिनी चामलानना । अर्धाम्बिकेशरूपा च कालाभ्राभाऽसिपाशिनी ॥ १२॥

हिन्दी अर्थ: वे अणिमा आदि अष्ट सिद्धियों रूपी किरणों से युक्त, कमनीया कामिनी, निर्मल मुखमण्डल वाली, अर्धनारीश्वर रूप में शिव के आधे अंग में स्थित, सघन काले मेघ सदृश कान्ति वाली तथा खड्ग व पाश धारण करने वाली हैं ॥ १२॥

अत्युग्राऽनन्तवीर्या च कपालिन्यतिकोपना । जयाऽखिलजगन्माता कामेश्वर्यतिमानिनी ॥ १३॥

हिन्दी अर्थ: वे अत्यंत उग्र, अनंत वीर्यशालिनी, कपाल धारण करने वाली, घोर क्रोधमयी, विजयदायिनी जया, सम्पूर्ण विश्व की माता, कामेश्वरी तथा परम पूज्या/स्वाभिमानी हैं ॥ १३॥

अग्निवर्णाऽद्वितीया च कौबेरी चाखिलेश्वरी । अतिरौद्रावतारा च घोरा चासुरघातिनी ॥ १४॥

हिन्दी अर्थ: वे अग्नि के समान देदीप्यमान वर्ण वाली, अद्वितीय, कुबेर की शक्ति कौबेरी, समस्त चराचर की अधीश्वरी, अतिरौद्र अवतार धारण करने वाली, घोररूपा तथा असुरों का हनन करने वाली हैं ॥ १४॥

अज्ञेयाऽपःस्वरूपा च किरीटोल्लिखिताम्बरा । अर्गलाऽलङ्घ्यवीर्या च ज्वलन्ती चानलात्मिका ॥ १५॥

हिन्दी अर्थ: वे बुद्धि से परे (अज्ञेया), जलस्वरूपा, जिनका मुकुट आकाश को स्पर्श करता है, समस्त संकटों को रोकने वाली अर्गला, जिनका पराक्रम अलंघ्य है, प्रज्वलित तेज वाली तथा अग्निरूपा हैं ॥ १५॥

अनजा जननी नन्दा गुह्यध्यानाऽग्निदेवता ।

अनघा घोररूपा च नियताऽनाथसंस्तुता ॥ १६॥

हिन्दी अर्थ: वे जन्मरहित, जगज्जननी, नन्दगोप की पुत्री नन्दा, गूढ़ ध्यानगम्य, अग्नि की अधिष्ठात्री, निष्पाप (अनघा), शत्रुओं के लिए घोररूपा, नित्य संयमित तथा असहाय अनाथों द्वारा स्तुत हैं ॥ १६॥

अजा गुह्यतरध्याना चारिसङ्क्षयकारिणी । अजिताऽन्तर्हिताऽलक्ष्या गुणाश्रयाऽमितप्रभा ॥ १७॥

हिन्दी अर्थ: वे अजन्मा, परम गोपनीय ध्यानगम्य, शत्रुओं का समूल नाश करने वाली, अपराजेय (अजिता), अंतर्धान होने वाली, इन्द्रियों से अगोचर (अलक्ष्या), त्रिगुणमयी तथा असीम प्रभाव वाली हैं ॥ १७॥

अभिष्टुता दयारूपा चालङ्कृतचतुर्भुजा । आर्याऽमृतकलाऽविद्या नीलवर्णाञ्जनप्रभा ॥ १८॥

हिन्दी अर्थ: वे देवगणों द्वारा भलीभाँति स्तुत, दयारूपा, चार अलंकृत भुजाओं वाली, आर्या, मोक्षदायिनी अमृतकला, सांसारिक बन्धन उत्पन्न करने वाली अविद्या (माया), तथा कज्जल के समान नीले मेघ की आभा वाली हैं ॥ १८॥

अचिन्त्यचरिताऽमर्त्या जगन्माताऽम्बुजासना । अष्टादशभुजाऽपर्णा चाभीष्टफलदायिका ॥ १९॥

हिन्दी अर्थ: जिनके दिव्य चरित्र अचिन्त्य हैं, अमर्त्य (अमर), जगन्माता, कमल पर आसीन, अठारह भुजाओं वाली (महालक्ष्मी), तपस्या में पर्ण त्यागने वाली अपर्णा तथा भक्तों को अभीष्ट फल देने वाली हैं ॥ १९॥

अलङ्कृतभुजाऽतीता नन्दजाऽभयहस्तका ।

अष्टभुजा जगद्धात्री जगत्त्रयहितैषिणी ॥ २०॥

हिन्दी अर्थ: वे विविध आयुधों से सुशोभित भुजाओं वाली, प्राकृत गुणों से अतीत, नन्द की कन्या, अभय मुद्रा वाली, अष्टभुजा, संसार का भरण-पोषण करने वाली जगद्धात्री तथा तीनों लोकों का कल्याण करने वाली हैं ॥ २०॥

असमाऽऽनन्दरूपा च प्रथमाऽगोचराऽकला । अनानन्दस्वरूपाऽपि नवदुर्गाऽष्टमातृका ॥ २१॥

हिन्दी अर्थ: वे अनुपम आनन्द की मूर्ति, आद्या, इन्द्रियों से अगोचर, कलातीत (अकला), सांसारिक सुख-दुःख से परे चिदानन्दमयी, नवदुर्गा तथा अष्टमातृका स्वरूपा हैं ॥ २१॥

अनामयी ह्यविज्ञाना निराकाराऽविनाशिनी । अमलाऽब्रह्मरूपा च चण्डी चराचरेश्वरी ॥ २२॥

हिन्दी अर्थ: वे समस्त रोगों व विकारों से रहित (अनामयी), तर्क से परे, निराकार, अविनाशिनी, सर्वथा निर्मल (अमला), परब्रह्म से अभिन्न, चण्डी तथा चराचर जगत् की स्वामिनी हैं ॥ २२॥

अपञ्चभूतरूषा च चन्द्ररेखाविभूषणा । परमाऽखिलरूपा च चण्डमुण्डविनाशिनी ॥ २३॥

हिन्दी अर्थ: वे पंचमहाभूतों की सीमाओं से परे, मस्तक पर चन्द्रकला धारण करने वाली, परात्पर, अखिल विश्वरूपा तथा चण्ड-मुण्ड का संहार करने वाली हैं ॥ २३॥

चेतनाऽवेदरूपा च चण्डिका चण्डविक्रमा । उर्ध्वमधःस्वरूपा च तिर्यग्रूपा तमोगुणा ॥ २४॥

हिन्दी अर्थ: वे साक्षात् चेतना, वेदों के गूढ़ तत्त्व का स्वरूप, प्रचण्ड पराक्रम वाली चण्डिका, ऊर्ध्व (आकाश), अधः (पाताल) तथा तिर्यक् (मध्यलोक) स्वरूपिणी एवं संहारकाल में तमोगुणी रूप धारण करने वाली हैं ॥ २४॥

असुरनाशयित्री च चित्राभरणभूषिता । अदितिर्देवशक्तिश्च दीनत्राणपरायणा ॥ २५॥

हिन्दी अर्थ: वे असुरों का विनाश करने वाली, विचित्र दिव्य आभूषणों से सुसज्जित, देवमाता अदिति, देवताओं की मूल शक्ति तथा दीन-दुखियों की रक्षा में तत्पर रहने वाली हैं ॥ २५॥

अभयदा महागौरी महाभयविनाशिनी ।

अनादिश्च निराधारा नयनत्रयशोभिता ॥ २६॥

हिन्दी अर्थ: वे अभयदान देने वाली, महागौरी, संसार के महाभय को मिटाने वाली, अनादि, स्वयं निराधार होकर सबका आधार बनने वाली तथा तीन दिव्य नेत्रों से शोभित हैं ॥ २६॥

अविचला चतुर्बाहुश्चन्द्रघण्टा च चर्चिका । एकाऽभेदमयी नैका तुष्टा कल्याणशोभना ॥ २७॥

हिन्दी अर्थ: वे निश्चल, चार भुजाओं वाली, चन्द्रघण्टा, पूजिता चर्चिका, अद्वितीय (एका), अद्वैतमयी, अनेक रूपों में प्रकट (नैका), नित्य संतुष्ट (तुष्टा) तथा कल्याणमयी शोभा से युक्त हैं ॥ २७॥

गौरीदेहसमुत्पन्ना नीलग्रीवाऽविकारिणी । कलाकाष्ठादिरूपा च चक्रिणी कृष्णसंस्तुता ॥ २८॥

हिन्दी अर्थ: वे माता पार्वती के देह-कोष से प्रकट कौशिकी, नीलकण्ठ की शक्ति (नीलग्रीवा), विकाररहित, काल के सूक्ष्म विभागों (कला-काष्ठा) का स्वरूप, चक्रधारिणी तथा भगवान श्रीकृष्ण/विष्णु द्वारा संस्तुत हैं ॥ २८॥

कनकोत्तमकान्तिश्च चित्रघण्टाऽघहारिणी । आद्यवाक्यमयी पूज्या चार्तत्राणपरायणा ॥ २९॥

हिन्दी अर्थ: वे श्रेष्ठ सुवर्ण जैसी कान्ति वाली, अद्भुत घण्टा की ध्वनि से पापों का हरण करने वाली, ओंकार/वेदवाक्यरूपा, परम पूज्या तथा संकटग्रस्तों के कष्ट हरने वाली हैं ॥ २९॥

आराधिताऽऽत्ममूर्तिश्च तेजोराशिसमुद्भवा । आदिविद्याऽऽत्मशक्तिश्च तुहिनाचलसंस्थिता ॥ ३०॥

हिन्दी अर्थ: वे परम आराधना की मूर्ति, समस्त देवताओं के तेजोपुंज से प्रादुर्भूत, आदिविद्या, परमात्मा की मूल शक्ति तथा हिमालय पर्वत (तुहिनाचल) पर निवास करने वाली हैं ॥ ३०॥

आनन्दविग्रहा तुष्टिस्तारिणी तनुमध्यमा ।

आदिः कनकवर्णाभा पूर्णाऽऽनन्दपयोनिधिः ॥ ३१॥

हिन्दी अर्थ: वे आनन्द की साक्षात् मूर्ति, सन्तोषस्वरूपा (तुष्टि), संसार-सागर से तारने वाली, कृशोदरी, सृष्टि की आदि, सुवर्ण जैसी आभा वाली तथा पूर्ण आनन्द के महासागर के समान हैं ॥ ३१॥

ईशाऽऽनन्दमयी ब्राह्मी ब्रह्माणीरूपधारिणी । वराऽऽपच्छमनी विद्या भद्राऽऽभरणभूषिता ॥ ३२॥

हिन्दी अर्थ: वे परमेश्वर की शक्ति, आनन्दमयी, ब्राह्मी, ब्रह्माणी रूप धारण करने वाली, श्रेष्ठ, विपत्तियों का शमन करने वाली पराविद्या तथा कल्याणकारी आभूषणों से अलंकृत हैं ॥ ३२॥

इन्दुयोग्यानना चैन्द्री दैत्यवधकृतोद्यमा । इन्दुशकलभूषा च भवती भक्तवत्सला ॥ ३३॥

हिन्दी अर्थ: वे चन्द्रमा के समान परम रमणीय मुखमण्डल वाली, इन्द्रशक्ति ऐन्द्री, दैत्यों के वध के लिए सदा सन्नद्ध, बालचन्द्रमा से विभूषित, साक्षात् भगवती तथा भक्तों पर वात्सल्य लुटाने वाली हैं ॥ ३३॥

इन्द्राणी चेन्दुरूपा च प्रातःसूर्यसमप्रभा ।

इन्दिरेन्दु किरीटा च रविचन्द्राग्निलोचना ॥ ३४॥

हिन्दी अर्थ: वे इन्द्राणी, चन्द्ररूपा, बालसूर्य के समान तेजस्विनी, इन्दिरा (लक्ष्मी), चन्द्रमुकुटधारिणी तथा सूर्य, चन्द्रमा व अग्नि रूपी त्रिनेत्रों वाली हैं ॥ ३४॥

उग्रनृसिंहरूपा च गुणत्रयविभाविनी ।

ईश्वरी चैकवीरा च गौरीदेहसमुद्भवा ॥ ३५॥

हिन्दी अर्थ: वे भगवान नृसिंह की उग्र शक्ति (नारसिंही), सत्त्व-रज-तम रूपी तीनों गुणों को प्रकट करने वाली, ईश्वरी, अद्वितीय वीरा (एकवीरा) तथा पार्वती के शरीर से प्रकट होने वाली हैं ॥ ३५॥

उद्योतिनी महारौद्रा चेन्द्राणीपतिपूजिता ।

उमा चेन्दुप्रभा पत्नी परिणामप्रदायिनी ॥ ३६॥

हिन्दी अर्थ: वे तेजोमयी, परम रौद्ररूपा, देवराज इन्द्र द्वारा पूजित, उमा, चन्द्रमा जैसी शीतल कान्ति वाली, शिवपत्नी तथा कर्मों का यथायोग्य फल देने वाली हैं ॥ ३६॥

ईषद्धासा महादेवी महामाया महेश्वरी ।

उन्मदा भीमरूपा च भीमादेवी च भीषणा ॥ ३७॥

हिन्दी अर्थ: वे मन्द मुस्कान वाली, महादेवी, महामाया, महेश्वरी, दिव्य परमानन्द से युक्त, भीमरूपा, भीमादेवी तथा शत्रुओं के लिए अति भयानक हैं ॥ ३७॥

उत्तमभूषणा लक्ष्मीः लोकेश्वरी च लासिनी । उदारसंस्तुता बुद्धिर्ब्रह्माणी बोधलक्षणा ॥ ३८॥

हिन्दी अर्थ: वे श्रेष्ठ आभूषणों से युक्त, महालक्ष्मी, सम्पूर्ण लोकों की अधीश्वरी, विलास/आनन्दमयी, उदार संतों द्वारा स्तुत, बुद्धिरूपा, ब्रह्माणी तथा साक्षात् ज्ञान की लक्षणा हैं ॥ ३८॥

ऋद्धिदात्री रमा रौद्रा रक्तालिप्तपयोधरा ।

रक्तबीजवधा रुष्टा चोल्लसद्रत्नकुण्डला ॥ ३९॥

हिन्दी अर्थ: वे समृद्धि देने वाली, रमा (लक्ष्मी), रौद्रा, युद्ध में रक्त से रंजित वक्षःस्थल वाली, रक्तबीज का वध करने वाली, असुरों पर रुष्ट तथा चमकते रत्नजड़ित कुण्डलों वाली हैं ॥ ३९॥

सुकर्मफलजुष्टा च कान्तिभृत्कमलालया । कौमारीरूपसंस्थाना कौशिकी कान्तिशालिनी ॥ ४०॥

हिन्दी अर्थ: वे श्रेष्ठ कर्मों का फल देने वाली, कान्तिमान्, कमलालया (कमल पर वास करने वाली), कौमारी रूप में स्थित, कौशिकी तथा महाकान्तिशालिनी हैं ॥ ४०॥

कह्लाराबद्धमाला च ललिता कमलासना । करुणापूरिताक्षी च तथोत्पलविलोचना ॥ ४१॥

हिन्दी अर्थ: वे श्वेत कमलों (कह्लार) की माला धारण करने वाली, ललिता, पद्मासना, करुणा से भरे नेत्रों वाली तथा नीलकमल सदृश विशाल नेत्रों वाली हैं ॥ ४१॥

रुचिरोत्तमकान्तिश्च खड्गिनी खड्गधारिणी ।

घनस्तनी तथोत्तुङ्गस्तनी पीनपयोधरा ॥ ४२॥

हिन्दी अर्थ: वे मनोहर श्रेष्ठ कान्ति वाली, खड्ग धारण करने वाली, खड्गिनी, तथा समस्त जगत् का पोषण करने वाली वात्सल्यमयी मातृस्वरूपा हैं ॥ ४२॥

ध्रुवोर्ध्वकेशिनी धूम्रा धात्री धूम्राक्षमर्दिनी ।

धनुर्धरी च दुर्धर्षा दुर्गा च धर्मधारिणी ॥ ४३॥

हिन्दी अर्थ: वे ऊपर उठे केशों वाली (उग्र रूप), धूम्रा, जगद्धात्री, धूम्रलोचन का मर्दन करने वाली, धनुर्धारिणी, दुर्धर्ष, संकटहारिणी दुर्गा तथा धर्म को धारण करने वाली हैं ॥ ४३॥

कौशाम्भःक्षरिका लज्जा लोचनत्रयभूषिता । लक्ष्यालक्ष्यस्वरूपा च लोकख्याता फलप्रदा ॥ ४४॥

हिन्दी अर्थ: वे अमृत/कृपाजल की वर्षा करने वाली, लज्जास्वरूपा, त्रिनेत्रों से सुशोभित, दृश्य और अदृश्य (लक्ष्य-अलक्ष्य) स्वरूप वाली, लोकप्रसिद्ध तथा कर्मफल देने वाली हैं ॥ ४४॥

करालवदना सन्ध्या क्रोधसमाकुला क्षुधा । सुकामधेनुमूर्तिश्च खड्गादिभृच्च खेचरी ॥ ४५॥

हिन्दी अर्थ: वे विकराल मुख वाली, सन्ध्या, असुरों पर क्रोध से व्याकुल, क्षुधारूपा, साक्षात् कामधेनु की मूर्ति, खड्ग आदि आयुध धारण करने वाली तथा आकाशचारिणी (खेचरी) हैं ॥ ४५॥

सौम्या कान्तिप्रतिष्ठा च गदिनी गुहरूपिणी । गम्भीरान्तः स्मिता सुभ्रूः स्त्रीरत्नं सुमनोहरा ॥ ४६॥

हिन्दी अर्थ: वे सौम्यरूपा, कान्ति का आधार, गदाधारिणी, गुह्य/हृदयगुहा में वास करने वाली, गम्भीर मन्दहासिनी, सुंदर भौंहों वाली, समस्त स्त्रियों में श्रेष्ठ रत्न तथा परम मनभावन हैं ॥ ४६॥

गजराजस्थिता सिद्धिः शुद्धा गरुडसंस्थिता ।

गुणमयी महावज्रा महाघोरपराक्रमा ॥ ४७॥

हिन्दी अर्थ: वे ऐरावत हाथी पर स्थित, सिद्धिदात्री, परम पवित्र, गरुड़ पर आरूढ़ (वैष्णवी), त्रिगुणमयी, महावज्रधारिणी तथा अत्यंत घोर पराक्रमशालिनी हैं ॥ ४७॥

गृहीतोग्रमहाचक्रा गृहीतपरमायुधा ।

गृहवृद्धिप्रदा सारा सुपथा गरुडासना ॥ ४८॥

हिन्दी अर्थ: वे उग्र महाचक्र धारण करने वाली, दिव्य आयुधों से युक्त, घर में समृद्धि देने वाली, सृष्टि का सारतत्त्व, सन्मार्ग दिखाने वाली तथा गरुडासना हैं ॥ ४८॥

शक्तिर्गजसमारूढा सर्वसौभाग्यदायिनी ।

गुह्येश्वरी महाविद्या गुह्यगोप्त्री प्रकीर्तिता ॥ ४९॥

हिन्दी अर्थ: वे हाथी पर सवार ऐन्द्री शक्ति, समस्त सौभाग्य प्रदान करने वाली, गुह्येश्वरी, महाविद्या तथा गोपनीय रहस्यों की संरक्षिका कही गई हैं ॥ ४९॥

सती गम्भीरनाभिश्च चिकितुषी चतुर्भुजा । गुह्यातिगुह्यगोप्त्री च पूजिता प्रमदोत्तमा ॥ ५०॥

हिन्दी अर्थ: वे पतिव्रता सती, गम्भीर नाभि वाली, सर्वज्ञा (चिकितुषी), चार भुजाओं वाली, गुह्य से भी अतिगुह्य रहस्य की रक्षा करने वाली, सुपूजिता तथा श्रेष्ठ नारियों में वंदनीया हैं ॥ ५०॥

घनान्तशशितुल्याभा चिन्मयी चित्रकान्तिभृत् । चण्डघाती च चामुण्डा सृष्टिश्चित्तकृपामयी ॥ ५१॥

हिन्दी अर्थ: वे शरद ऋतु के बादलों के बीच खिले पूर्णचन्द्र के समान कान्ति वाली, चिन्मयी (ज्ञानस्वरूपा), अद्भुत कान्तिशालिनी, चण्ड का वध करने वाली चामुण्डा, साक्षात् सृष्टि तथा चित्त में करुणा रखने वाली हैं ॥ ५१॥

चित्रभ्रमरपाणिश्च चितिरूपा च चापिनी ।

सीता चञ्चलापाङ्गी सिता चित्रविभूषणा ॥ ५२॥

हिन्दी अर्थ: वे हाथों में विचित्र भौरों को धारण करने वाली (भ्रामरी), चिति (चेतना) रूपा, धनुर्धारिणी (चापिनी), जानकी (सीता), चंचल कटाक्षों वाली, श्वेतवर्णा (सिता) तथा विचित्र आभूषणों से सुसज्जित हैं ॥ ५२॥

तैजसी चिन्मयातीता चूडामणिर्महाबला ।

देवेशी चिन्मयानन्दा सा चतुर्वक्त्रसंस्तुता ॥ ५३॥

हिन्दी अर्थ: वे तेजोमयी, चिन्मय भाव से भी परे, जगत् की चूडामणि, महाबलशालिनी, देवेशी, चिन्मयानन्दस्वरूपा तथा चतुरानन ब्रह्मा द्वारा संस्तुत हैं ॥ ५३॥

ज्योत्स्ना चन्द्रार्धचूडा च चित्रमाल्या महास्मृतिः । चित्रकोद्भासिभाला च चित्राम्बरा महासुरी ॥ ५४॥

हिन्दी अर्थ: वे चन्द्रिका स्वरूपा, मस्तक पर अर्धचन्द्र धारण करने वाली, रंग-बिरंगी मालाओं से युक्त, महास्मृति, भाल पर दिव्य तिलक से शोभायमान, विचित्र वस्त्रधारिणी तथा महा आसुरी शक्तियों का दमन करने वाली हैं ॥ ५४॥

तामसी चण्डिकाशक्तिः शिवाशतनिनादिनी ।

जयाख्या जगतां धात्री जातिरूपा प्रदर्शिनी ॥ ५५॥

हिन्दी अर्थ: वे तमोगुणरूपा, चण्डिका की मूल शक्ति, सैकड़ों शियारों (शिवा) की गर्जना करने वाली, जया नाम से विख्यात, जगत् का पालन करने वाली, जातिरूपा तथा सर्वप्रदर्शिका हैं ॥ ५५॥

छायारूपा च पापघ्नी निद्रा चित्रानुलेपना ।

छत्रेश्वरी शताक्षी च शत्रुभयविवर्धिनी ॥ ५६॥

हिन्दी अर्थ: वे छायास्वरूपा, पापों का नाश करने वाली, निद्रारूपा, विचित्र सुगन्धित अनुलेप लगाने वाली, छत्रेश्वरी, सौ नेत्रों वाली (शताक्षी) तथा शत्रुओं के भय को बढ़ाने वाली हैं ॥ ५६॥

जगदाधारभूता च जगदम्बा जगन्मयी । पुष्टिर्जगत्प्रतिष्ठा च पावना जगदम्बिका ॥ ५७॥

हिन्दी अर्थ: वे सम्पूर्ण जगत् का आधार, जगदम्बा, जगन्मयी, पुष्टिस्वरूपा, जगत् की प्रतिष्ठा तथा परम पावन जगदम्बिका हैं ॥ ५७॥

ज्वालामुखी महारावा जिह्वाललनभीषणा ।

सर्वा जगत्समस्तस्त्री भैरवी जम्भनादिनी ॥ ५८॥

हिन्दी अर्थ: वे ज्वालामुखी, महानाद करने वाली, लपलपाती जिह्वा से भयानक, जगत् की समस्त नारियों का मूल, भैरवी तथा जम्भ दैत्य का नाद मिटाने वाली हैं ॥ ५८॥

सा जगज्जननी श्यामा शोभना शशिशेखरा ।

सा जगत्पालिका श्रद्धा शाम्भवी शूलधारिणी ॥ ५९॥

हिन्दी अर्थ: वे जगज्जननी, श्यामवर्णा, परम शोभामयी, चन्द्रशेखरा, जगत् का पालन करने वाली, श्रद्धास्वरूपा, शाम्भवी तथा त्रिशूलधारिणी हैं ॥ ५९॥

तृष्णारूपा तृषा शर्वा तुष्टिरूपा च पालिका ।

तुङ्गकुचा त्रिनेत्रा च ताम्राम्भोजनिवासिनी ॥ ६०॥

हिन्दी अर्थ: वे तृष्णारूपा, पिपासा, संहारकर्त्री शर्वा, तुष्टिरूपा, पालिका, उन्नत वक्षःस्थल वाली, त्रिनेत्रा तथा रक्तकमल पर निवास करने वाली हैं ॥ ६०॥

तप्तकाञ्चनवर्णाभा तप्तकाञ्चनभूषणा ।

तीक्ष्णनखा च निष्कीला नवशक्तिस्तनूदरी ॥ ६१॥

हिन्दी अर्थ: वे तपे हुए सुवर्ण के समान कान्ति वाली, स्वर्णाभूषणों से सजी, तीक्ष्ण नखों वाली, कीलन-रहित (निष्कीला), नवदुर्गा शक्ति तथा कृशोदरी हैं ॥ ६१॥

तेजोमण्डलदुर्धर्षा ताण्डवलासिनी शिवा ।

तृष्णा तपोज्वलन्ती च पूतना तलवासिनी ॥ ६२॥

हिन्दी अर्थ: वे तेजोमण्डल के कारण दुर्धर्ष (अपराजेय), ताण्डव नृत्य करने वाली शिवा, तपस्या से प्रज्वलित तेजस्विनी, पूतना का उद्धार करने वाली तथा पाताल में भी वास करने वाली हैं ॥ ६२॥

दुर्वृत्तवृत्तहन्त्री च दुर्गपारा च दण्डिनी ।

दिवाकरनिभा राष्ट्री दैत्यदर्पविनाशिनी ॥ ६३॥

हिन्दी अर्थ: वे दुष्टों के दुराचार का नाश करने वाली, दुर्गम भवसागर को पार कराने वाली, दण्डधारिणी, सूर्य सदृश देदीप्यमान, राष्ट्र की अधिष्ठात्री (राष्ट्री) तथा दैत्यों के अहंकार को चूर्ण करने वाली हैं ॥ ६३॥

द्वीपिचर्मपरीधाना दंष्ट्रोद्धृतवसुन्धरा ।

नयनत्रययुक्ता च दारुणा दशनोज्ज्वला ॥ ६४॥

हिन्दी अर्थ: वे व्याघ्रचर्म धारण करने वाली, वाराही रूप में दाढ़ों से पृथ्वी का उद्धार करने वाली, त्रिनेत्रधारिणी, दुष्टों के लिए दारुण तथा उज्ज्वल दन्तपंक्ति वाली हैं ॥ ६४॥

स्वाहा दंष्ट्राकरालास्या दुर्गमा द्वारवासिनी ।

दशवक्त्रा च दुष्प्रेक्ष्या दंष्ट्राङ्कितवरानना ॥ ६५॥

हिन्दी अर्थ: वे स्वाहा, विकराल दाढ़ों वाले मुख वाली, दुर्गमा, हृदयद्वार पर वास करने वाली, दस मुखों वाली, देखने में दुर्धर्ष तथा दिव्य दंतयुक्त श्रेष्ठ मुख वाली हैं ॥ ६५॥

देवता दशविद्या च दारिद्र्यदुःखहारिणी ।

स्तुता दंष्ट्राकराली च भवसागरनौः क्षमा ॥ ६६॥

हिन्दी अर्थ: वे परम देवता, दस महाविद्या, दरिद्रता और दुःखों का हरण करने वाली, कराल दाढ़ों वाली, भवसागर से पार लगाने वाली नौका तथा साक्षात् क्षमारूपा हैं ॥ ६६॥

दुरत्यया महाकाली मृडानी दुरितापहा ।

दशभुजा महामारी दशपादा दशानना ॥ ६७॥

हिन्दी अर्थ: जिनको पार पाना कठिन है, महाकाली, शिवप्रिया मृडानी, पापों का नाश करने वाली, दस भुजाओं वाली, महामारी, दस चरणों तथा दस मुखों वाली हैं ॥ ६७॥

दिव्यमूर्तिर्महावाणी सुधा देवोपकारिणी । दुर्गार्तिनाशिनी क्षान्तिर्दुराचारविघातिनी ॥ ६८॥

हिन्दी अर्थ: वे दिव्य मूर्ति, महावाणी (सरस्वती), साक्षात् अमृत (सुधा), देवताओं का उपकार करने वाली, दुर्गम कष्टों का नाश करने वाली, क्षमा/सहनशीलता तथा दुराचार का विनाश करने वाली हैं ॥ ६८॥

दुर्गतिहारिणी दुर्गा स्वरा दशनभासुरा ।

भर्त्री दानवहन्त्री च सा दुष्टदमनी तथा ॥ ६९॥

हिन्दी अर्थ: वे दुर्गति का हरण करने वाली दुर्गा, ओंकार स्वरूपा, चमकते दांतों वाली, जगत का भरण-पोषण करने वाली, दानवों का वध करने वाली तथा दुष्टों का दमन करने वाली हैं ॥ ६९॥

दुरितशमनी राधा विहारिणी विलासिनी ।

रूद्ररूपा च रुद्राणी भवानी भवभामिनी ॥ ७०॥

हिन्दी अर्थ: वे पापों का शमन करने वाली, राधा, दिव्य क्रीड़ा करने वाली विहारिणी व विलासिनी, रुद्ररूपा, रुद्राणी, भवानी तथा भव-भामिनी हैं ॥ ७०॥

दुर्गप्रशमनी दुर्गा सा दंष्ट्राभासुरा तथा ।

वाणी धृतेन्दुलेखा च सा दक्षदुहिता सुखा ॥ ७१॥

हिन्दी अर्थ: वे दुर्गम संकटों को शांत करने वाली, चमकती दाढ़ों वाली, दिव्य वाणी, चन्द्रकला धारण करने वाली, दक्ष की पुत्री (सती) तथा सुख प्रदान करने वाली हैं ॥ ७१॥

धनुर्बाणधरा दुर्गा निजशस्त्रास्त्रवर्षिणी ।

दुर्गा धूर्जटिपत्नी च नानारत्नोपशोभिता ॥ ७२॥

हिन्दी अर्थ: वे धनुष-बाण धारण करने वाली, अपने दिव्य अस्त्र-शस्त्रों की वर्षा करने वाली, भगवान शिव (धूर्जटि) की भार्या तथा विविध रत्नों से सुशोभित हैं ॥ ७२॥

शक्तिसमूहमूर्तिश्च निद्रारूपा च धीश्वरी । नन्दगोपगृहोत्पन्ना वेदगर्भा व्रजेश्वरी ॥ ७३॥

हिन्दी अर्थ: वे समस्त शक्तियों का पुंज, निद्रारूपा, बुद्धि की स्वामिनी, नन्दगोप के घर कन्या रूप में प्रादुर्भूत, वेदों को गर्भ में धारण करने वाली तथा ब्रज की ईश्वरी हैं ॥ ७३॥

वेदत्रयी च धेनुर्वाक् नैरृतिर्नलकूबरी ।

नारायणी महालक्ष्मीर्नीलोत्पलविलोचना ॥ ७४॥

हिन्दी अर्थ: वे ऋक्-यजु-साम रूपी वेदत्रयी, कामधेनु, वाणी, नैरृति दिशा की शक्ति, कुबेरपुत्र नलकुबर पर कृपा करने वाली, नारायणी, महालक्ष्मी तथा नीलकमल सदृश नेत्रों वाली हैं ॥ ७४॥

विलसच्चोलिका दुर्गा धर्ममतिप्रदायिनी । नानाभरणशोभाढ्या निशुम्भासुरघातिनी ॥ ७५॥

हिन्दी अर्थ: वे दिव्य वस्त्राभूषणों से युक्त, धर्मबुद्धि देने वाली, विविध अलंकारों से सुशोभित तथा निशुम्भ दैत्य का वध करने वाली हैं ॥ ७५॥

नानाशस्त्रकरा दुर्गा सा नीलाश्मद्युतिः स्वधा । नवनवस्वरूपा च नागाधीश्वरविष्टरा ॥ ७६॥

हिन्दी अर्थ: वे अनेक प्रकार के शस्त्र धारण करने वाली, नीलमणि सदृश कान्ति वाली, स्वधा, नित्य नूतन स्वरूप वाली तथा शेषनाग के आसन पर विराजमान हैं ॥ ७६॥

त्रयी निखिलमूर्तिश्च नयनत्रयभासिता ।

सा नीरजकरा दुर्गा नादापूर्णदिगम्बरा ॥ ७७॥

हिन्दी अर्थ: वे वेदत्रयी, समग्र ब्रह्माण्ड का स्वरूप, तीन नेत्रों से देदीप्यमान, करकमलों में कमल धारण करने वाली तथा अपने शंखनाद से दिशाओं को गुंजायमान करने वाली हैं ॥ ७७॥

प्रसन्ना परमा विद्या परा च परमेश्वरी ।

सा पुण्डरीकमध्यस्था प्रकृतिः पुत्रदायिनी ॥ ७८॥

हिन्दी अर्थ: वे सदा प्रसन्न, पराविद्या, परमेश्वरी, श्वेतकमल के मध्य स्थित, मूल प्रकृति तथा सुपुत्र प्रदान करने वाली हैं ॥ ७८॥

पापप्रशमिनी दुर्गा नरमालाविभूषणा ।

पापापहारिणी दुर्गा नादापूरितदिङ्मुखा ॥ ७९॥

हिन्दी अर्थ: वे पापों को शांत करने वाली, मुण्डमाला धारण करने वाली, पापों का हरण करने वाली तथा अपने सिंहनाद से दिशाओं को गुंजाने वाली हैं ॥ ७९॥

सा पञ्चभूतरूपा च निमग्नारक्तलोचना ।

नारसिंही भयत्रात्री निशुम्भमर्दिनी तथा ॥ ८०॥

हिन्दी अर्थ: वे पंचमहाभूतों का स्वरूप, युद्ध में रक्तवर्ण नेत्रों वाली, नारसिंही, भय से रक्षा करने वाली तथा निशुम्भ का मर्दन करने वाली हैं ॥ ८०॥

नीलभुजा महारात्रिदुर्गा नानाभिधानभृत् ।

मातङ्गी नीलजङ्घोरुर्निशुम्भमथिनी तथा ॥ ८१॥

हिन्दी अर्थ: वे नीलवर्ण भुजाओं वाली, प्रलयकाल की महारात्रि, अनेक नामों को धारण करने वाली, मातङ्गी, नीलकमल जैसी जंघाओं वाली तथा निशुम्भ का मंथन करने वाली हैं ॥ ८१॥

पद्मावती परोक्तिश्च प्रपन्नार्तिहरा तथा ।

प्रतिष्ठा पर माया पार्वती पापनाशिनी ॥ ८२॥

हिन्दी अर्थ: वे पद्मावती, परावाणी, शरणागतों के कष्ट हरने वाली, जगत् की प्रतिष्ठा, महामाया, पार्वती तथा पापों का नाश करने वाली हैं ॥ ८२॥

सा परमार्तिहन्त्री च परमा प्रकृतिस्तथा ।

प्रसादसुमुखी दुर्गा सुप्रसन्नानना तथा ॥ ८३॥

हिन्दी अर्थ: वे परम पीड़ा का नाश करने वाली, पराप्रकृति, कृपा से युक्त प्रसन्न मुख वाली तथा भक्तों पर अनुग्रह करने वाली हैं ॥ ८३॥

परितुष्टा महामेधा भवानी परमायुधा ।

प्रेतसंस्था च भीमाक्षी पद्महस्ता हरिप्रिया ॥ ८४॥

हिन्दी अर्थ: वे परम संतुष्ट, महामेधा, भवानी, परम आयुधों से सुसज्जित, शव/प्रेत पर आरूढ़, भयानक नेत्रों वाली, करकमल वाली तथा भगवान विष्णु की प्रिया हैं ॥ ८४॥

पद्मासना महापूर्वा पुण्येश्वरी च योगिनी ।

पापेश्वरी महामोहा पीनस्तनी समस्तनी ॥ ८५॥

हिन्दी अर्थ: वे कमल पर विराजमान, सबसे पुरातन, पुण्यों की अधिष्ठात्री, योगिनी, पापों पर शासन करने वाली, महामोह तथा सुपुष्ट वात्सल्यमयी पयोधरों वाली हैं ॥ ८५॥

प्रचण्डदैत्यदर्पघ्ना पाशाङ्कुशधरा तथा ।

प्रतिमा परिपूर्णा च परधामनिवासिनी ॥ ८६॥

हिन्दी अर्थ: वे प्रचण्ड दैत्यों के दर्प को तोड़ने वाली, पाश और अंकुश धारण करने वाली, साक्षात् देवी प्रतिमा, परिपूर्ण तथा परमधाम में निवास करने वाली हैं ॥ ८६॥

सा परा देवता दुर्गा फलदा प्रतिपालिका ।

परशिवा च शर्वाणी सा शम्भुगृहिणी तथा ॥ ८७॥

हिन्दी अर्थ: वे सर्वोच्च परा देवता, फल देने वाली, सबका प्रतिपालन करने वाली, परमशिव स्वरूपा, शर्वाणी तथा भगवान शम्भु की अर्धांगिनी हैं ॥ ८७॥

परसिद्धिप्रदा भूतिः सा प्रलयमयी तथा ।

ब्रह्मस्तुता च सावित्री बुद्धिरूपा च भारती ॥ ८८॥

हिन्दी अर्थ: वे परम सिद्धि प्रदान करने वाली, ऐश्वर्यरूपा भूति, प्रलयमयी, ब्रह्मा द्वारा स्तुत, सावित्री, बुद्धिरूपा तथा वाग्देवी भारती हैं ॥ ८८॥

बद्ध हिमांशुरत्नाभा भुशुण्डीपरिघायुधा ।

ब्रह्मशक्तिश्च यज्ञिया, सुष्टुता फलदायिका ॥ ८९॥

हिन्दी अर्थ: वे चन्द्रमा और रत्नों की दिव्य आभा से युक्त, भुशुण्डी और परिघ नामक आयुध धारण करने वाली, ब्रह्मशक्ति, यज्ञस्वरूपा, श्रेष्ठ स्तुतियों से पूजित तथा फलदायिनी हैं ॥ ८९॥

बन्धूककाञ्चनाभा च बालरविद्युतिस्तथा । बाधाप्रशमनी दुर्गा बीजरूपा च बाभ्रवी ॥ ९०॥

हिन्दी अर्थ: वे बन्धूक पुष्प और स्वर्ण जैसी आभा वाली, उदित बालसूर्य सदृश कान्ति वाली, विघ्नों को शांत करने वाली, बीजस्वरूपा तथा भगवान शिव की शक्ति बाभ्रवी हैं ॥ ९०॥

बालार्कमण्डलाभासा बहुकन्यासुसेविता । ब्रह्मादिरूपिणी दुर्गा मङ्गला ब्रह्मचारिणी ॥ ९१॥

हिन्दी अर्थ: वे बालसूर्य के मण्डल जैसी प्रभा वाली, अनेक कन्याओं द्वारा सेवित, ब्रह्मादि देवों का स्वरूप धारण करने वाली, मंगलमयी तथा ब्रह्मचारिणी हैं ॥ ९१॥

ब्रह्मस्वरूपिणी मेधा ब्रह्मरूपा सुरेश्वरी ।

भक्तकामदुघा दुर्गा सा बाधाहारिणी तथा ॥ ९२॥

हिन्दी अर्थ: वे ब्रह्मस्वरूपा, मेधा (प्रज्ञा), सुरेश्वरी, भक्तों की समस्त कामनाओं को पूर्ण करने वाली कामधेनु तथा बाधाओं का हरण करने वाली हैं ॥ ९२॥

दुर्गा भक्तानुरक्ता च भगवती च भूषिता । भुक्तिप्रदायिनी दुर्गा भद्रकाली सनातनी ॥ ९३॥

हिन्दी अर्थ: वे भक्तों से स्नेह रखने वाली, षडैश्वर्यसम्पन्न भगवती, आभूषणों से सुशोभित, भोग और मोक्ष प्रदान करने वाली, भद्रकाली तथा सनातनी हैं ॥ ९३॥

भानुसहस्रकान्तिश्च भूभृल्लक्ष्मीश्च शङ्खिनी । भ्रान्तिरूपा महोत्साहा भास्वद्देहलता तथा ॥ ९४॥

हिन्दी अर्थ: वे हजारों सूर्यों के समान कान्ति वाली, पर्वतों की लक्ष्मी (भूभृल्लक्ष्मी), शंखधारिणी, भ्रान्तिरूपा, महान् उत्साहस्वरूपा तथा बिजली जैसी देहयष्टि वाली हैं ॥ ९४॥

भुवनेशी विशोका च दुर्गा भैरवनादिनी ।

भक्तिस्मृता सुगन्धा च भ्रामरी भूमिसम्भवा ॥ ९५॥

हिन्दी अर्थ: वे भुवनेश्वरी, शोक से रहित, भैरव गर्जना करने वाली, भक्तिभाव से स्मरण करने योग्य, दिव्य सुगन्धमयी, भ्रामरी तथा भूमिसम्भवा (सीता रूप) हैं ॥ ९५॥

दुर्गा भूमुक्तिहेतुश्च भक्तानन्दोदया तथा । सा भिन्नाञ्जनसङ्काशा भोगस्वर्गापवर्गदा ॥ ९६॥

हिन्दी अर्थ: वे संसार से मुक्ति का कारण, भक्तों में आनन्द का उदय करने वाली, अंजन सदृश श्यामवर्ण, तथा भोग, स्वर्ग व मोक्ष प्रदान करने वाली हैं ॥ ९६॥

दुर्गा भ्रामररूपा च भूतस्थितिविधायिनी ।

भाषाक्षरा सुमाता दुर्गा भूतार्तिहारिणी ॥ ९७॥

हिन्दी अर्थ: वे भ्रामरी देवी, प्राणियों का संरक्षण करने वाली, वर्णमाला के अक्षरों का मूल, उत्तम माता तथा समस्त जीवों के कष्ट हरने वाली हैं ॥ ९७॥

सा मुक्तिहेतुभूता च दुर्गा भयविनाशिनी ।

मातृरूपा सुरूपा च संहर्त्री भवतारिणी ॥ ९८॥

हिन्दी अर्थ: वे मोक्ष का साक्षात् हेतु, भय का विनाश करने वाली, मातृरूपा, परम सुन्दरी, दुष्टों की संहारक तथा संसार-सागर से तारने वाली हैं ॥ ९८॥

मुक्तिहेतुः सुरश्रेष्ठा सन्मयी भयहारिणी ।

माहेश्वरी शरण्या च दुर्गा भेदप्रदर्शिनी ॥ ९९॥

हिन्दी अर्थ: वे देवताओं में सर्वश्रेष्ठ, सन्मयी (सत्यस्वरूपा), भयहारिणी, माहेश्वरी, शरण लेने योग्य तथा तत्त्वज्ञान का प्रकाश करने वाली हैं ॥ ९९॥

मौलिबद्धेन्दुरेखा च महावृषभवाहिनी ।

सा महाकालिका माता मधुकैटभघातिनी ॥ १००॥

हिन्दी अर्थ: वे मस्तक पर अर्धचन्द्र धारण करने वाली, वृषभ पर सवार होने वाली, महाकाली, जगन्माता तथा मधु-कैटभ का संहार करने वाली हैं ॥ १००॥

महाहिवलया माया तथा महिषवाहिनी ।

मोहरात्रिश्च वाराही सुमधुमदमाधुरी ॥ १०१॥

हिन्दी अर्थ: वे महान् सर्पों के कंकण पहनने वाली, महामाया, महिषवाहिनी, मोहरात्रि, वाराही तथा मधुर मधु के समान आनंददायिनी हैं ॥ १०१॥

दुर्गा मातृगणा वृद्धिर्मयूरवरवाहना ।

मालाधरी च सर्वाद्या महाशक्तिधरा तथा ॥ १०२॥

हिन्दी अर्थ: वे मातृकाओं का समूह, ऋद्धि-वृद्धि, मयूर पर विराजमान (कौमारी), मालाधारिणी, सबकी आदि तथा महाशक्ति को धारण करने वाली हैं ॥ १०२॥

माहेश्वरीस्वरूपा च सुन्दरी मुकुटेश्वरी ।

दुर्गा महीस्वरूपा च महाकारुण्यरूपिणी ॥ १०३॥

हिन्दी अर्थ: वे माहेश्वरी स्वरूपा, त्रिपुरसुन्दरी, मुकुटेश्वरी, पृथ्वी का स्वरूप तथा साक्षात् महाकरुणामयी हैं ॥ १०३॥

महामारीस्वरूपा च मातृका मुनिसंस्तुता । महिषासुरनिर्णोशी दुर्गा मृगप्रतिस्थिता ॥ १०४॥

हिन्दी अर्थ: वे महामारी स्वरूपा, मातृका, मुनियों द्वारा संस्तुत, महिषासुर का नाश करने वाली तथा सिंह/मृगराज पर स्थित हैं ॥ १०४॥

मूर्तिरूपा च सर्वेशा मयूरकुक्कुटावृता ।

मुक्तिप्रदायिनी दुर्गा सुभगा महिषासना ॥ १०५॥

हिन्दी अर्थ: वे साकार मूर्ति, सबकी ईश्वरी, मयूर और कुक्कुट से घिरी, मुक्ति प्रदायिनी, परम सौभाग्यवती तथा महिष पर आरूढ़ हैं ॥ १०५॥

महिषान्तकरी दुर्गा त्रिगुणा मृगवाहिनी ।

सा मुण्डमथना दुर्गा शुभा महिषमर्दिनी ॥ १०६॥

हिन्दी अर्थ: वे महिषासुर का अंत करने वाली, त्रिगुणात्मिका, सिंहवाहिनी, मुण्ड दैत्य का मंथन करने वाली, मंगलमयी महिषासुरमर्दिनी हैं ॥ १०६॥

त्र्यम्बका योगनिद्रा च महात्रिपुरसुन्दरी ।

साक्षिणी यमघण्टा च महादुर्गविनाशिनी ॥ १०७॥

हिन्दी अर्थ: वे त्र्यम्बका (तीन नेत्रों वाली), योगनिद्रा, महात्रिपुरसुन्दरी, सबकी साक्षी, यमघण्टा तथा महान् दुर्गम संकटों का नाश करने वाली हैं ॥ १०७॥

यज्ञियप्रथमा दुर्गा श्रीप्रदा मन्त्रमातृका ।

दुर्गा योगेश्वरी शान्तिः शूलिनी मधुमर्दिनी ॥ १०८॥

हिन्दी अर्थ: वे यज्ञार्ह देवियों में प्रथम, धन-वैभव प्रदाता, मन्त्रमातृका, योगेश्वरी, शान्ति, शूलधारिणी तथा मधु दैत्य का दलन करने वाली हैं ॥ १०८॥

रूक्माम्बुजासना दुर्गा शाङ्करी महिषार्दिनी ।

सा रुचिराक्षमाला च सत्वरा मन्त्ररूपिणी ॥ १०९॥

हिन्दी अर्थ: वे स्वर्णकमल पर आसीन, शांकरी, महिष का दमन करने वाली, सुंदर रुद्राक्ष/अक्षमाला धारण करने वाली, शीघ्र फल देने वाली तथा मन्त्ररूपा हैं ॥ १०९॥

सा मूलप्रकृतिर्दुर्गा मूलाधारनिवासिनी ।

महाविलासिनी दुर्गा मोहिनी मुनिमोहिनी ॥ ११०॥

हिन्दी अर्थ: वे सृष्टि की मूल प्रकृति, मूलाधार चक्र में स्थित, महाविलासिनी, मोहिनी तथा मुनियों के चित्त को भी आकर्षित करने वाली हैं ॥ ११०॥

दुर्गा रूपप्रतिष्ठा च यशोदागर्भसम्भवा ।

वैष्णवी रथमारूढा रत्नभूता यशस्विनी ॥ १११॥

हिन्दी अर्थ: वे सौंदर्य की प्रतिष्ठा, यशोदा के गर्भ से प्रादुर्भूत, वैष्णवी, दिव्य रथ पर आरूढ़, साक्षात् रत्नस्वरूपा तथा परम यशस्विनी हैं ॥ १११॥

शिवदा रक्तवर्णा च विजया रूपशालिनी ।

वारुणी रक्तवस्त्रा च दुर्गा रक्ताम्बरा तथा ॥ ११२॥

हिन्दी अर्थ: वे कल्याणकारी (शिवदा), रक्तवर्ण वाली, विजया, रूपशालिनी, वारुणी, लाल वस्त्र धारण करने वाली तथा रक्ताम्बरा हैं ॥ ११२॥

सुगता रक्तपादा च सकला रक्तदन्तिका ।

साकारा रक्तमध्या च रक्तसर्वाङ्गभूषणा ॥ ११३॥

हिन्दी अर्थ: वे श्रेष्ठ गति वाली, रक्तकमल जैसे चरणों वाली, सकल कलाओं से युक्त, रक्तदन्तिका, साकार रूपा तथा रक्त आभूषणों से सुसज्जित हैं ॥ ११३॥

सुकान्ती रक्तनेत्रा च रक्तकेशातिभीषणा ।

सा रक्तदशना दुर्गा रक्ततीक्ष्णनखा तथा ॥ ११४॥

हिन्दी अर्थ: वे उत्तम कान्ति वाली, लाल नेत्रों वाली, लाल केशों से भय उत्पन्न करने वाली, लाल दांतों वाली तथा तीक्ष्ण रक्तवर्ण नखों वाली हैं ॥ ११४॥

सा दुर्गा रक्तचामुण्डा दुर्गा रक्तायुधा तथा ।

सा दुर्गा रक्तकेशा च रणत्कङ्कणनूपुरा ॥ ११५॥

हिन्दी अर्थ: वे रक्तचामुण्डा, रक्तवर्ण आयुधों से युक्त, लाल केशों वाली तथा रणभूमि में झंकृत कंकण व नूपुरों वाली हैं ॥ ११५॥

सा रक्तवसना दुर्गा रक्तदन्ती त्रिधोदिता । रसभावितवृत्ता च दुर्गा रत्नविभूषिता ॥ ११६॥

हिन्दी अर्थ: वे लाल वस्त्र वाली, रक्तदन्ती, तीनों वेदों/कालों में प्रशंसित, रस-भाव से परिपूर्ण तथा रत्नों से विभूषित हैं ॥ ११६॥

सा लम्बोदरमाता च लक्ष्मीरूपा च वाक् तथा ।

दुर्गा लज्जास्वरूपा च सा लोकवरदा तथा ॥ ११७॥

हिन्दी अर्थ: वे भगवान गणेश (लम्बोदर) की माता, लक्ष्मीरूपा, वाणीस्वरूपा, लज्जास्वरूपा तथा सम्पूर्ण लोकों को वरदान देने वाली हैं ॥ ११७॥

वृत्तस्तनी तथा दुर्गा विशाला वसुधासमा ।

दुर्गा विज्ञानरूपा च तथा वृत्तपयोधरा ॥ ११८॥

हिन्दी अर्थ: वे वात्सल्यमयी मातृरूपा, विशाला, पृथ्वी के समान क्षमाशील, विज्ञानरूपा तथा जगत् का भरण करने वाली हैं ॥ ११८॥

वरदा वेदरूपा च दुर्गा विश्वेश्वरी तथा ।

व्याप्तलोकत्रया दुर्गा वराभीतिप्रधारिणी ॥ ११९॥

हिन्दी अर्थ: वे वरदायिनी, वेदरूपा, विश्वेश्वरी, तीनों लोकों में व्याप्त तथा वर और अभय मुद्रा धारण करने वाली हैं ॥ ११९॥

वैरिदयावती दुर्गा वन्दिताङ्घ्रियुगा तथा ।

सा दुर्गा विष्णुमाया च व्याप्तस्थावरजङ्गमा ॥ १२०॥

हिन्दी अर्थ: वे शत्रुओं को मोक्ष देकर उन पर भी दया करने वाली, वंदनीय चरणों वाली, भगवान विष्णु की योगमाया तथा चर-अचर में व्याप्त हैं ॥ १२०॥

वल्लकीवादिका दुर्गा विश्वसम्मोहिनी तथा । विश्वोपरतिशक्ता च दुर्गा वेधस्स्तुता तथा ॥ १२१॥

हिन्दी अर्थ: वे वीणा (वल्लकी) बजाने वाली, सम्पूर्ण विश्व को मोहित करने वाली, संसार-बन्धन से निवृत्ति कराने में समर्थ तथा ब्रह्माजी द्वारा स्तुत हैं ॥ १२१॥

सा दुर्गा वृत्तिरूपा च चित्रखट्वाङ्गधारिणी ।

सा दुर्गा व्याप्तिदेवी च विश्वविभ्रामिका तथा ॥ १२२॥

हिन्दी अर्थ: वे जीविका/वृत्ति रूपा, खट्वाङ्ग धारण करने वाली, सर्वव्यापिनी देवी तथा विश्व को संचालित करने वाली हैं ॥ १२२॥

वृषारूढा तथा दुर्गा विद्युद्दामसमप्रभा । वरदाभीतिहस्ता च दुर्गा विस्तारितानना ॥ १२३॥

हिन्दी अर्थ: वे वृषभ पर आरूढ़, विद्युत-माला (बिजली) के समान प्रभा वाली, वर-अभय हाथों वाली तथा विशाल मुख वाली हैं ॥ १२३॥

वज्रहस्ता तथा दुर्गा विद्यामयी व्यवस्थिता । वृत्रप्राणहरा दुर्गा विन्ध्याचलनिवासिनी ॥ १२४॥

हिन्दी अर्थ: वे हाथों में वज्र धारण करने वाली, विद्यामयी, जगत की व्यवस्था करने वाली, वृत्रासुर के प्राण हरने वाली तथा विन्ध्याचल पर निवास करने वाली हैं ॥ १२४॥

वराहरूपिणी दुर्गा विश्वार्तिहारिणी तथा ।

सा दुर्गा वैष्णवी शक्तिर्विश्वबीजं त्रिलोचना ॥ १२५॥

हिन्दी अर्थ: वे वाराही रूपा, विश्व के कष्टों को हरने वाली, साक्षात् वैष्णवी शक्ति, विश्व का मूल कारण (बीज) तथा त्रिनेत्रा हैं ॥ १२५॥

सा दुर्गा वैष्णवीरूपा तथा व्याधिविनाशिनी ।

दुर्गा विवेकदीपा च वीणापुस्तकधारिणी ॥ १२६॥

हिन्दी अर्थ: वे वैष्णवी रूपा, समस्त आधि-व्याधियों का नाश करने वाली, विवेक का दीपक जलाने वाली तथा हाथों में वीणा व पुस्तक धारण करने वाली हैं ॥ १२६॥

विशाललोचना दुर्गा सा विश्वपरिपलिका ।

सा विश्वधारिणी दुर्गा तथा वैरिविनाशिनी ॥ १२७॥

हिन्दी अर्थ: वे विशाल नेत्रों वाली, विश्व का प्रतिपालन करने वाली, विश्व को धारण करने वाली तथा शत्रुओं का विनाश करने वाली हैं ॥ १२७॥

विश्वात्मिका तथा दुर्गा विधातृवरदा तथा ।

दुर्गा विश्वेशवन्द्या च दुर्गा च वित्तदायिनी ॥ १२८॥

हिन्दी अर्थ: वे विश्व की आत्मा, विधाता (ब्रह्माजी) को वरदान देने वाली, विश्व के ईश्वरों द्वारा वंद्य तथा धन-वैभव प्रदायिनी हैं ॥ १२८॥

व्याप्तसकलविश्वा च दुर्गा च वृषवाहना ।

वागीश्वरी तथा दुर्गा सा विद्याकारिणी तथा ॥ १२९॥

हिन्दी अर्थ: वे सम्पूर्ण विश्व में व्याप्त, वृषभवाहिनी, वागीश्वरी (वाणी की स्वामिनी) तथा विद्या का विस्तार करने वाली हैं ॥ १२९॥

दुर्गा विज्ञानदात्री च दुर्गा च विन्ध्यवासिनी ।

सा विश्वमोहिनी दुर्गा तथैव विश्वरूपिणी ॥ १३०॥

हिन्दी अर्थ: वे विज्ञान (आत्मज्ञान) देने वाली, विन्ध्यवासिनी, विश्वमोहिनी तथा विश्वरूपा हैं ॥ १३०॥

वज्रपाणिस्तथा दुर्गा तथैव वरदायिनी ।

विश्वमाता तथा दुर्गा तथैव वज्रधारिणी ॥ १३१॥

हिन्दी अर्थ: वे हाथों में वज्र धारण करने वाली, वरदायिनी, विश्वमाता तथा वज्रधारिणी हैं ॥ १३१॥

वसुसङ्गमनी दुर्गा तथा वरदहस्तका ।

विख्यातिगा तथा दुर्गा तथैव वागधीश्वरी ॥ १३२॥

हिन्दी अर्थ: वे समस्त ऐश्वर्य-धनों को मिलाने वाली, वरद हस्त वाली, परम विख्यात तथा वाणी की अधिष्ठात्री हैं ॥ १३२॥

वाञ्छाकल्पद्रुमा दुर्गा वैरोचनी विभूषिता ।

सा विकटस्वरूपा च दुर्गा विधिवधूस्तथा ॥ १३३॥

हिन्दी अर्थ: वे मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाली कल्पवृक्ष, सूर्य-तेज से दीप्त, आभूषणों से अलंकृत, विकट रूपा तथा ब्रह्मा की शक्ति (विधिवधू) हैं ॥ १३३॥

शोभाधारा तथा दुर्गा विमला शमिताशिवा ।

विवसना तथी दुर्गा सा शिरोमालिका तथा ॥ १३४॥

हिन्दी अर्थ: वे शोभा की आधार, विमला (निर्मल), अमंगल का शमन करने वाली, दिगम्बरा (मायामुक्त) तथा मुण्डमाला धारण करने वाली हैं ॥ १३४॥

शङ्खचक्रगदाहस्ता शङ्खादिपरमायुधा ।

श्रीस्तथा श्यामलाङ्गी च दुर्गा श्रीसुन्दरी तथा ॥ १३५॥

हिन्दी अर्थ: वे शंख, चक्र और गदा धारण करने वाली, दिव्य आयुधों से युक्त, श्री (महालक्ष्मी), श्यामलाङ्गी तथा श्रीसुन्दरी हैं ॥ १३५॥

सा शुभमतिदा दुर्गा शुभगतिप्रदायिनी ।

श्वेतरूपधरा दुर्गा तथा शोकविनाशिनी ॥ १३६॥

हिन्दी अर्थ: वे सद्बुद्धि प्रदान करने वाली, सद्गति देने वाली, श्वेत रूप धारण करने वाली तथा शोकों का नाश करने वाली हैं ॥ १३६॥

शशिमौलिप्रतिष्ठा च दुर्गा शब्दात्मिका तथा ।

सा शत्रुभयरूपा च शुम्भदैत्यार्दिनी तथा ॥ १३७॥

हिन्दी अर्थ: वे चन्द्रशेखर शिव की प्रतिष्ठा, शब्दब्रह्मरूपा, शत्रुओं के लिए भयरूप तथा शुम्भ दैत्य का दलन करने वाली हैं ॥ १३७॥

सा दुर्गा शक्तिरूपा च शुष्कमांसातिभैरवा ।

सा दुर्गा शान्तिरूपा च सा शब्दज्ञानरूपिणी ॥ १३८॥

हिन्दी अर्थ: वे साक्षात् शक्तिरूपा, शुष्क देह वाली महाभैरवी (रणचण्डी), शान्तिरूपा तथा शब्दों के यथार्थ ज्ञान का स्वरूप हैं ॥ १३८॥

श्रद्धारूपा तथा दुर्गा शुम्भनिबर्हिणी तथा ।

सा दुर्गा शुभहेतुश्च सा शून्याशून्यसाक्षिणी ॥ १३९॥

हिन्दी अर्थ: वे श्रद्धास्वरूपा, शुम्भ का संहार करने वाली, शुभ का कारण तथा शून्य व अशून्य की साक्षी हैं ॥ १३९॥

शङ्खपात्रा तथा दुर्गा शिरोमालाविभूषणा ।

सा दुर्गा शक्तिहस्ता च सा शूलचक्रभृत्तथा ॥ १४०॥

हिन्दी अर्थ: वे शंख रूपी पात्र धारण करने वाली, मुण्डमाला से विभूषित, हाथों में शक्ति आयुध लेने वाली तथा शूल व चक्र धारण करने वाली हैं ॥ १४०॥

सा शिवशक्तिरूपा च दुर्गा शशिमुखी तथा ।

शिवदूती तथा दुर्गा सा शुम्भमर्दिनी तथा ॥ १४१॥

हिन्दी अर्थ: वे भगवान शिव की पराशक्ति, चन्द्रमुखी, शिवदूती तथा शुम्भ का मर्दन करने वाली हैं ॥ १४१॥

सा शरणागतत्राणा दुर्गा शास्त्रमयी तथा ।

सा परमायुधा दुर्गा तथैव शववाहना ॥ १४२॥

हिन्दी अर्थ: वे शरणागतों की रक्षा करने वाली, शास्त्रमयी, श्रेष्ठ आयुधधारिणी तथा शव पर आरूढ़ (शववाहना) हैं ॥ १४२॥

शिवदूतीस्वरूपा च दुर्गा शाकम्भरी तथा ।

श्रीशाम्भवी तथा दुर्गा तथैव शिखिवाहना ॥ १४३॥

हिन्दी अर्थ: वे शिवदूती स्वरूपा, शाकम्भरी, श्रीशाम्भवी तथा मयूरवाहिनी (शिखिवाहना) हैं ॥ १४३॥

सा दुर्गा शैलपुत्री च दुर्गा शशिधरा तथा ।

सा दुर्गा श्रीमहाविद्या दुर्गा शूलेश्वरी तथा ॥ १४४॥

हिन्दी अर्थ: वे पर्वतराज हिमालय की पुत्री शैलपुत्री, चन्द्रमा को धारण करने वाली, श्रीमहाविद्या तथा शूल की स्वामिनी हैं ॥ १४४॥

शुम्भहन्त्री तथा दुर्गा सा श्मशानविहारिणी ।

शक्तिधरी तथा दुर्गा सकलोद्धारिणी तथा ॥ १४५॥

हिन्दी अर्थ: वे शुम्भ का वध करने वाली, श्मशान में विहार करने वाली (वैराग्यमयी), शक्तिधारिणी तथा सबका उद्धार करने वाली हैं ॥ १४५॥

सा दुर्गा सत्यरूपा च दुर्गा शब्दमयी तथा । सकलशब्दरूपा च सा भक्तिरसभाविता ॥ १४६॥

हिन्दी अर्थ: वे सत्यरूपा, शब्दमयी, समस्त ध्वनियों का मूल तथा भक्तिरस से भावित हैं ॥ १४६॥

श्वेतानना तथा दुर्गा सर्वकामफलप्रदा । स्फुरत्कान्तिस्तथा दुर्गा सर्वरूपमयी तथा ॥ १४७॥

हिन्दी अर्थ: वे शुभ्र मुख वाली, समस्त कामनाओं का फल देने वाली, प्रस्फुटित कान्ति वाली तथा सर्वरूपमयी हैं ॥ १४७॥

दुर्गा सर्वाङ्गभूषा च तथा सर्वजगन्मयी । संसारबन्धहेतुश्च तथा सर्वेश्वरेश्वरी ॥ १४८॥

हिन्दी अर्थ: वे समस्त अंगों में आभूषण धारण करने वाली, सम्पूर्ण जगत् में व्याप्त, संसार-बन्धन का हेतु तथा समस्त ईश्वरों की भी ईश्वरी हैं ॥ १४८॥

वषट्कारा तथा दुर्गा स्थितिसंहारकारिणी ।

स्वरात्मिका तथा दुर्गा समुत्पन्ना तथा स्वयम् ॥ १४९॥

हिन्दी अर्थ: वे यज्ञीय वषट्कार स्वरूपा, सृष्टि की स्थिति और संहार करने वाली, स्वरात्मिका तथा स्वयं प्रादुर्भूत होने वाली हैं ॥ १४९॥

सा दुर्गा सृष्टिरूपा च सा सरोजस्थिता तथा । स्थितिरूपा तथा दुर्गा सदाभ्युदयदा तथा ॥ १५०॥

हिन्दी अर्थ: वे सृष्टिरूपा, कमल पर विराजित, स्थितिरूपा तथा नित्य अभ्युदय प्रदान करने वाली हैं ॥ १५०॥

दुर्गा संहृतिरूपा च तथैव सिंहवाहिनी ।

सम्मानिता तथा दुर्गा तथा सैरिभमर्दिनी ॥ १५१॥

हिन्दी अर्थ: वे संहाररूपा, सिंहवाहिनी, देवताओं द्वारा सम्मानित तथा महिषासुर (सैरिभ) का मर्दन करने वाली हैं ॥ १५१॥

सुरर्षिस्तूयमानाच सिद्धिकामसुसेविता । सिंहस्कन्धाधिरूढा च दुर्गा सर्वाश्रया तथा ॥ १५२॥

हिन्दी अर्थ: वे देवर्षियों द्वारा स्तुत, सिद्धियों के साधकों द्वारा सुपूजित, सिंह के कंधे पर सवार तथा सबकी परम आश्रयदात्री हैं ॥ १५२॥

दुर्गा सर्वजगद्वार्ता तथा सूर्यसमप्रभा ।

सा समस्तजगद् हेतुः स्मृतिभीतिहरा तथा ॥ १५३॥

हिन्दी अर्थ: वे सम्पूर्ण जगत् की जीवन-वार्ता, सूर्य के समान तेजस्वी, समस्त ब्रह्माण्ड का मूल कारण तथा स्मरणमात्र से भय का नाश करने वाली हैं ॥ १५३॥

सा दुर्गा सर्वशक्तिश्च दुर्गा सौम्यतरा तथा ।

सा सर्वव्यापिनी दुर्गा तथा समरनिष्ठुरा ॥ १५४॥

हिन्दी अर्थ: वे सर्वशक्तिसम्पन्न, अतिशय सौम्य, सर्वव्यापिनी तथा युद्धभूमि में दुष्टों के प्रति अत्यंत कठोर (समरनिष्ठुरा) हैं ॥ १५४॥

दुर्गा सदाऽऽर्द्रचित्ता च दुर्गा च सर्वकारिणी ।

स्मृतिरूपा तथा दुर्गा सहस्रनयना तथा ॥ १५५॥

हिन्दी अर्थ: वे सदा करुणा से द्रवित हृदय वाली, सब कुछ करने में समर्थ (सर्वकारिणी), स्मृतिरूपा तथा सहस्रों नेत्रों वाली हैं ॥ १५५॥

दुर्गा समस्तविद्या च दुर्गा सरस्वती तथा ।

दुर्गा स्त्रीरत्नभूता च साक्षसूत्रकमण्डलुः ॥ १५६॥

हिन्दी अर्थ: वे समस्त विद्याओं का स्वरूप, साक्षात् सरस्वती, स्त्रियों में रत्नस्वरूपा तथा अक्षमाला व कमण्डलु धारण करने वाली हैं ॥ १५६॥

अब्जन्यस्तैकपादा च तथा सर्वार्थसाधिका ।

सा सर्वज्ञेश्वराङ्कस्था सर्वेशक्तिसमन्विता ॥ १५७॥

हिन्दी अर्थ: वे कमल पर एक चरण रखने वाली, सर्वार्थसाधिका, सर्वज्ञेश्वर शिव की गोद में विराजमान तथा समस्त शक्तियों से युक्त हैं ॥ १५७॥

स्मेरमुखी तथा दुर्गा स्वर्गमुक्तिप्रदायिनी ।

सा दुर्गा सर्वभूता च सर्वयोगसमन्विता ॥ १५८॥

हिन्दी अर्थ: वे मन्द मुस्कान से युक्त मुख वाली, स्वर्ग और मोक्ष देने वाली, समस्त प्राणियों में वास करने वाली तथा समस्त योगों से समन्वित हैं ॥ १५८॥

सर्वमङ्गलमङ्गल्या संसारार्णवतारिणी । सृष्ट्यादिशक्तिभूता च स्वर्गापवर्गदा तथा ॥ १५९॥

हिन्दी अर्थ: वे समस्त मंगलों का भी मंगल करने वाली, संसार रूपी सागर से तारने वाली, सृष्टि आदि की मूल शक्ति तथा स्वर्ग व अपवर्ग (मोक्ष) प्रदायिनी हैं ॥ १५९॥

स्तव्यपरा तथा दुर्गा सहस्रनयनोज्ज्वला ।

सा सर्वभीतिपात्री च सिंहस्था सर्वमङ्गला ॥ १६०॥

हिन्दी अर्थ: वे परम स्तुति योग्य, सहस्रों नेत्रों से देदीप्यमान, सम्पूर्ण भयों का शमन करने वाली, सिंह पर विराजित तथा सर्वमंगला हैं ॥ १६०॥

सर्वस्यार्तिहरा दुर्गा सर्वाभरणभूषिता ।

दुर्गा सर्वस्वरूपा च सर्वकामप्रदायिनी ॥ १६१॥

हिन्दी अर्थ: वे सबके कष्टों का हरण करने वाली, समस्त आभूषणों से सज्जित, सर्वरूपा तथा समस्त मनोरथों को पूर्ण करने वाली हैं ॥ १६१॥

सिद्धिदात्री तथा दुर्गा स्वर्णाकल्पितकुण्डला । सम्पूजिता तथा दुर्गा सर्वशत्रुविनाशिनी ॥ १६२॥

हिन्दी अर्थ: वे सिद्धिदात्री, स्वर्णकुण्डल धारण करने वाली, सुपूजिता तथा समस्त शत्रुओं का विनाश करने वाली हैं ॥ १६२॥

सा दुर्गा स्कन्दमाता च दुर्गा सर्वगता तथा । सा सौभाग्यप्रतिष्ठा च दुर्गा सप्तशती तथा ॥ १६३॥

हिन्दी अर्थ: वे भगवान कार्तिकेय की माता स्कन्दमाता, सर्वत्र व्याप्त रहने वाली, सौभाग्य की प्रतिष्ठा तथा साक्षात् सप्तशती स्वरूपा हैं ॥ १६३॥

सा सत्त्वाख्यगुणा दुर्गा सर्वसत्त्वमयी तथा । सुरासुरशिरोरत्ननिघृष्टचरणा तथा ॥ १६४॥

हिन्दी अर्थ: वे सत्त्वगुणमयी, समस्त जीवों में प्राणरूपा तथा जिनके चरणों में देवताओं और असुरों के मुकुटों की मणियां नतमस्तक होकर स्पर्श करती हैं ॥ १६४॥

स्फुरद्दशनदंष्ट्रा च सुमेरुयुगलस्तनी ।

सा सहस्रभुजा दुर्गा सुचित्रजघना तथा ॥ १६५॥

हिन्दी अर्थ: वे चमकती दन्तपंक्ति व दाढ़ों वाली, सुमेरु पर्वत सदृश उन्नत वक्षःस्थल वाली, सहस्र भुजाओं वाली तथा सुंदर स्वरूप वाली हैं ॥ १६५॥

सौभाग्यशालिनी दुर्गा सच्चिदानन्दविग्रहा ।

सर्वदेवमयी दुर्गा सर्वदेवशरीरजा ॥ १६६॥

हिन्दी अर्थ: वे सौभाग्यशालिनी, सच्चिदानन्दमयी मूर्ति, सर्वदेवमयी तथा समस्त देवताओं के तेज-शरीर से प्रादुर्भूत हैं ॥ १६६॥

सर्वेश्वरी तथा दुर्गा सर्वलोकमहेश्वरी ।

सर्वाङ्गभूषणा दुर्गा सर्वानन्दपयोनिधिः ॥ १६७॥

हिन्दी अर्थ: वे सबकी स्वामिनी, सम्पूर्ण लोकों की महेश्वरी, सर्वांगभूषिता तथा समस्त आनंदों का महासागर हैं ॥ १६७॥

सर्वभयापहा दुर्गा सर्वकामदुधस्तनी ।

सुकर्कशस्तनी दुर्गा सुश्वेतस्तनमण्डला ॥ १६८॥

हिन्दी अर्थ: वे समस्त भयों को हरने वाली, सभी मनोकामनाओं का दुग्ध देने वाली कामधेनुरूपा तथा परम पावन मातृस्वरूपा हैं ॥ १६८॥

सा सिद्धकुञ्जिका दुर्गा सा सत्त्वैकगुणाश्रया । सुखमयी तथा दुर्गा तथैव सुरमोहिनी ॥ १६९॥

हिन्दी अर्थ: वे साक्षात् सिद्धकुञ्जिका, विशुद्ध सत्त्वगुण का आश्रय, सुखमयी तथा देवताओं को भी मुग्ध करने वाली हैं ॥ १६९॥

स्नेहमयी तथा दुर्गा सर्वबाधापहारिणी ।

सिद्धिप्रदा तथा दुर्गा तथैव सा सुधामयी ॥ १७०॥

हिन्दी अर्थ: वे वात्सल्य और स्नेह से परिपूर्ण, समस्त विघ्न-बाधाओं का हरण करने वाली, सिद्धिदायिनी तथा साक्षात् अमृतमयी हैं ॥ १७०॥

हृत्संस्थिता तथा दुर्गा हरिनेत्रकृतालया । हंसयुक्तविमानस्था हिमाचलकृताश्रया ॥ १७१॥

हिन्दी अर्थ: वे हृदय में विराजमान, भगवान विष्णु के नेत्रों में योगनिद्रा रूप से वास करने वाली, हंसयुक्त विमान पर स्थित तथा हिमालय पर निवास करने वाली हैं ॥ १७१॥

दुर्गा हंससमारूढा हतदैत्यमहाबला ।

हिमाचलसुता दुर्गा त्रिशूलवरधारिणी ॥ १७२॥

हिन्दी अर्थ: वे हंस पर आरूढ़ (ब्राह्मी), दैत्यों के महाबल को नष्ट करने वाली, हिमाचलसुता (पार्वती) तथा श्रेष्ठ त्रिशूल धारण करने वाली हैं ॥ १७२॥

हिमाचलसुतानाथसंस्तुता ज्ञानरूपिणी । हृत्पुण्डरीकमध्यस्था दुर्गा हस्ताम्बुजा तथा ॥ १७३॥ हिन्दी अर्थ: वे शिवजी (हिमाचलसुता के स्वामी) द्वारा संस्तुत, ज्ञानरूपा, हृदयकमल के मध्य विराजित तथा हाथों में कमल धारण करने वाली हैं ॥ १७३॥

क्षोभिताशेषपाताला दुर्गा क्षेमकरी तथा ।

क्षुधारूपा तथा दुर्गा त्रिधामात्रात्मिका तथा ॥ १७४॥

हिन्दी अर्थ: वे सम्पूर्ण पाताल लोक को कम्पित करने वाली, सबका कल्याण करने वाली (क्षेमकरी), क्षुधारूपा तथा त्रिधामात्रा (अ, उ, म) स्वरूपा हैं ॥ १७४॥

सा दुर्गा क्षान्तिरूपा च दुर्गा त्रिपुरसुन्दरी ।

दुर्गा त्रिजगदाधारा त्रिंशल्लोचनमालिका ॥ १७५॥

हिन्दी अर्थ: वे क्षमारूपा, त्रिपुरसुन्दरी, तीनों लोकों का आधार तथा समस्त लोकों को अपने दिव्य दृष्टि-मंडल से देखने वाली हैं ॥ १७५॥

दुर्गा त्रैलोक्यवासीड्या त्रिदशपरिवेष्टिता । त्रैलोक्यत्राणयुक्ता च त्रिशूलचन्द्रधारिणी ॥ १७६॥

हिन्दी अर्थ: वे तीनों लोकों के निवासियों द्वारा स्तुत, तैंतीस कोटि देवताओं से घिरी, तीनों लोकों की रक्षा में तत्पर तथा त्रिशूल व अर्धचन्द्र धारण करने वाली हैं ॥ १७६॥

दुर्गा वक्त्रारविन्दश्रीदुर्गा त्रिनयना तथा ।

सा ज्ञानचिन्मयातीता स्वयञ्च ज्ञानचिन्मयी ॥ १७७॥

हिन्दी अर्थ: वे कमलमुख की दिव्य शोभा वाली, त्रिनेत्रा, ज्ञान और चिन्मय भाव से भी परे तथा स्वयं साक्षात् ज्ञानचिन्मयी हैं ॥ १७७॥

॥ फलश्रुति एवं उपसंहार ॥

॥ नमस्तस्यै नमो नमः ॥

दुर्गासप्तशतीस्तोत्रं यथा लोके महीयते ।

मधुरं मधुरानन्दे सहस्रमपि कल्पताम् ॥ १७८॥

हिन्दी अर्थ: उन पराशक्ति भगवती जगदम्बा को बारम्बार नमस्कार है। जिस प्रकार संसार में श्रीदुर्गासप्तशती स्तोत्र पूजित और प्रतिष्ठित है, उसी प्रकार यह सहस्रनाम स्तोत्र भी परम मधुर और आनन्ददायक सिद्ध हो ॥ १७८॥

दुर्गा भक्तसुभावभावितमनाः प्रेमास्पदं प्रापिता हर्षोल्लासविनोदमोदकरुणासन्तानसङ्काशिका । सुप्रीता मुदिता स्तुता विनयिता सम्पूजिता वन्दिता माङ्गल्यं वितनोतु लोकजननी स्तोतुः सहस्रात्मिका ॥ १७९॥

हिन्दी अर्थ: जो भक्त शुद्ध भाव से भावित मन होकर भगवती दुर्गा के इस सहस्रनाम स्तोत्र का पाठ करते हैं, उन पर जगज्जननी माँ दुर्गा परम प्रसन्न होकर हर्ष, उल्लास, मोद, करुणा एवं संतति का विस्तार करती हैं। वे सम्पूजित और वन्दित होकर इस स्तोत्र के पाठकों के जीवन में सर्वविध मंगल का विस्तार करें ॥ १७९॥

॥ इति श्रीदुर्गासप्तशत्योद्धृतं सहस्रनामस्तोत्रं सम्पूर्णम् ॥

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