✍️ CD Sharma · 📅 19 Sep 2026 · ⏱️ 1 मिनट का पठन · 🏷️ नीलकंठ स्तोत्र, Neelkanth Stotram, श्री नीलकंठ स्तोत्रम्, Shri Neelkanth Stotram Lyrics, शिव स्तोत्र, Shiva Stotra, रोग नाशक मंत्र, Rog Nivaran Stotra, महामृत्युंजय पाठ, Tantrik Shiva Stotram, भय निवारण, cdsharma.in
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भगवान सदाशिव का यह स्तोत्र समस्त प्रकार के ज्वर, असाध्य व्याधियों, भय, ग्रह दोष और तांत्रिक बाधाओं के शमन के लिए अचूक माना गया है।
विनियोग ॐ अस्य श्रीभगवान नीलकंठ सदा-शिव-स्तोत्र मंत्रस्य श्री ब्रह्मा ऋषिः, अनुष्ठुप छन्दः, श्रीनीलकंठ सदाशिवो देवता, ब्रह्म बीजं, पार्वती शक्तिः, मम समस्त पाप क्षयार्थं क्षेमस्थैर्आयु आरोग्य अभिवृद्धयर्थं मोक्षादि चतुर्वर्ग साधनार्थं च श्रीनीलकंठ सदाशिव प्रसाद सिद्धयर्थे जपे विनियोगः।
ऋष्यादि-न्यास
स्तोत्र पाठ ॐ नमो नीलकंठाय, श्वेतशरीराय, सर्पालंकार भूषिताय, भुजंग परिकराय, नागयज्ञोपवीताय, अनेक मृत्यु विनाशाय नमः। युग युगांत काल प्रलय-प्रचंडाय, प्रज्वाल-मुखाय नमः। दंष्ट्राकराल घोर रूपाय हूं हूं फट् स्वाहा। ज्वालामुखाय, मंत्र करालाय, प्रचंडार्क सहस्त्रांशु चंडाय नमः। कर्पूर मोद परिमलांगाय नमः।
ॐ इंद्र नील महानील वज्र वैलक्ष्य मणि माणिक्य मुकुट भूषणाय हन हन हन दहन दहनाय ह्रीं स्फुर स्फुर प्रस्फुर प्रस्फुर घोर घोर तनुरूप चट चट प्रचट प्रचट कह कह वम वम बंध बंध घातय घातय हूं फट् जरा मरण भय हूं हूं फट् स्वाहा। आत्म मंत्र संरक्षणाय नम:।
ॐ ह्रां ह्रीं ह्रीं स्फुर अघोर रूपाय रथ रथ तंत्र तंत्र चट् चट् कह कह मद मद दहन दाहनाय ह्रीं स्फुर स्फुर प्रस्फुर प्रस्फुर घोर घोर तनुरूप चट चट प्रचट प्रचट कह कह वम वम बंध बंध घातय घातय हूं फट् जरा मरण भय हूं हूं फट् स्वाहा।
अनंताघोर ज्वर मरण भय क्षय कुष्ठ व्याधि विनाशाय, शाकिनी डाकिनी ब्रह्मराक्षस दैत्य दानव बंधनाय, अपस्मार भूत बैताल डाकिनी शाकिनी सर्व ग्रह विनाशाय, मंत्र कोटि प्रकटाय पर विद्योच्छेदनाय, हूं हूं फट् स्वाहा। आत्म मंत्र सरंक्षणाय नमः।
ॐ ह्रां ह्रीं हौं नमो भूत डामरी ज्वालवश भूतानां द्वादश भूतानां त्रयोदश षोडश प्रेतानां पंचदश डाकिनी शाकिनीनां हन हन। दहन दारनाथ! एकाहिक द्वयाहिक त्र्याहिक चातुर्थिक पंचाहिक व्याघ्य पादांत वातादि वात सरिक कफ पित्तक काश श्वास श्लेष्मादिकं दह दह छिन्धि छिन्धि श्रीमहादेव निर्मित स्तंभन मोहन वश्याकर्षणोच्चाटन कीलनविद्वेषण इति षट् कर्माणि वृत्य हूं हूं फट् स्वाहा।
वात-ज्वर मरण-भय छिन्न छिन्न नेह नेह भूतज्वर प्रेतज्वर पिशाचज्वर रात्रिज्वर शीतज्वर तापज्वर बालज्वर कुमारज्वर अमितज्वर दहनज्वर ब्रह्मज्वर विष्णुज्वर रूद्रज्वर मारीज्वर प्रवेशज्वर कामादि विषमज्वर मारी ज्वर प्रचण्ड घराय प्रमथेश्वर! शीघ्रं हूं हूं फट् स्वाहा।
।। ॐ नमो नीलकंठाय, दक्षज्वर ध्वंसनाय श्रीनीलकंठाय नमः ।। ।। इति श्री नीलकंठ स्तोत्रम संपूर्णम् ।।
पाठ विधि एवं महत्व
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