✍️ CD Sharma · 📅 19 Sep 2026 · ⏱️ 1 मिनट का पठन · 🏷️ श्रीशाकम्भरी पञ्चकम्, Shakambhari Panchakam, माँ शाकम्भरी स्तोत्र, Devi Shakambhari, शंकराचार्य कृत स्तोत्र, Adi Shankaracharya Stotra, शाकम्भरी नवरात्रि, Shakambhari Mata Aarti Stuti, cdsharma.in
👁️ 27 बार देखा गया · 🔗 0 बार शेयर हुआ
जगद्गुरु आदि शंकराचार्य जी द्वारा विरचित 'श्री शाकम्भरी पञ्चकम्' भगवती जगदम्बा के शाकम्भरी स्वरूप की एक अत्यंत दुर्लभ और सिद्ध स्तुति है। इस स्तोत्र की विलक्षण विशेषता यह है कि इसके प्रथम पाँचों श्लोक क्रमशः "श्री", "शा", "क", "भ", और "री" अक्षरों से प्रारंभ होकर साक्षात् भगवती के "श्रीशाकम्भरी" नाम को प्रकट करते हैं।
श्रीवल्लभसोदरी श्रितजनश्चिद्दायिनी श्रीमती श्रीकण्ठार्धशरीरगा श्रुतिलसन्माणिक्यताटङ्कका। श्रीचक्रान्तरवासिनी श्रुतिशिरः सिद्धान्तमार्गप्रिया श्रीवाणी गिरिजात्मिका भगवती शाकम्भरी पातु माम्॥१॥
शान्ता शारदचन्द्रसुन्दरमुखी शाल्यन्नभोज्यप्रिया
शाकैः पालितविष्टपा शतदृशा शाकोल्लसद्विग्रहा। श्यामाङ्गी शरणागतार्तिशमनी शक्रादिभिः शंसिता शङ्कर्यष्टफलप्रदा भगवती शाकम्भरी पातु माम्॥२॥
कञ्जाक्षी कलशी भवादिविनुता कात्यायनी कामदा कल्याणी कमलालया करकृताम्भोजासिखेटाभया। कादम्बवासवमोदिनी कुचलसत्काश्मीरजालेपना कस्तूरीतिलकाञ्चिता भगवती शाकम्भरी पातु माम्॥३॥
भक्तानन्दविधायिनी भवभयप्रध्वंसिनी भैरवी भर्मालङ्कृतिभासुरा भुवनभीकृद् दुर्गदर्पापहा। भूभृन्नायकनन्दिनी भुवनसूर्भास्यत्परः कोटिभा भौमानन्दविहारिणी भगवती शाकम्भरी पातु माम्॥४॥
रीताम्नायशिखासु रक्तदशना राजीवपत्रेक्षणा राकाराजकरावदातहसिता राकेन्दुबिम्बस्थिता।
रुद्राणी रजनीकरार्भकलसन्मौली रजोरूपिणी रक्षःशिक्षणदीक्षिता भगवती शाकम्भरी पातु माम्॥५॥
श्लोकानामिह पञ्चकं पठति
यः स्तोत्रात्मकं शर्मदं,
सर्वापत्तिविनाशकं प्रतिदिनं
भक्त्या त्रिसन्ध्यं नरः।
आयुःपूर्णमपारमर्थममलां
कीर्तिं प्रजामक्षयां,
शाकम्भर्यनुकम्पया स लभते
विद्यां च विश्वार्थकाम्॥६॥
॥ इति श्रीमच्छङ्कराचार्यविरचितं शाकम्भरीपञ्चकं सम्पूर्णम् ॥
अभी कोई कमेंट नहीं — सबसे पहले आप लिखें!