॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण
"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद
अर्थ: जाना, खड़ा रहना, स्थिर होना, वलिष्ट होना, जीना, संपादन करना, प्राप्त करना, मिलाना
संस्कृत: गतिस्थानार्जनोपार्जनेषु
अंग्रेज़ी: to go, to stand, to stand still, to gain, to live, to be healthy, to earn, to obtain, to acquire
सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):
लट् लकार, आत्मनेपद (कर्तरि):
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | अर्जते | अर्जेते | अर्जन्ते |
| मध्यम | अर्जसे | अर्जेथे | अर्जध्वे |
| उत्तम | अर्जे | अर्जावहे | अर्जामहे |
दसों लकार (प्रथम पुरुष, एकवचन): लट् (आत्मने.): अर्जते · लिट् (आत्मने.): आनृजे · लुट् (आत्मने.): अर्जिता · लृट् (आत्मने.): अर्जिष्यते · लोट् (आत्मने.): अर्जताम् · लङ् (आत्मने.): आर्जत · विधिलिङ् (आत्मने.): अर्जेत · आशीर्लिङ् (आत्मने.): अर्जिषीष्ट · लुङ् (आत्मने.): आर्जिष्ट · लृङ् (आत्मने.): आर्जिष्यत
प्रमुख कृदन्त: ल्युट्: अर्जन · ण्वुल्: अर्जकः · तृच्: अर्जिता · तव्य: अर्जितव्यः · अनीयर्: अर्जनीयः · क्त: ऋजितः · क्तवतु: ऋजितवान् · शानच्: अर्जमानः · क्त्वा: अर्जित्वा · ल्यप्: प्रार्ज्य · तुमुन्: अर्जितुम् · णमुल्: अर्जम् · घञ्: अर्गः · क्तिन्: ऋक्ति · क्वसु: आनृजिवान्
| पदम् | विवरणम् |
|---|---|
| अर्जते | ऋज् धातु (भ्वादिगण, आत्मनेपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन अन्य सम्भावना: अर्जत् (नपुं.) — चतुर्थी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: अर्ज् + शतृ | अर्जत् (पुं.) — चतुर्थी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: अर्ज् + शतृ |
अर्जते ➤ जाना, खड़ा रहना, स्थिर होना, वलिष्ट होना, जीना, संपादन करना, प्राप्त करना, मिलाना
संस्कृत: गतिस्थानार्जनोपार्जनेषु
इस शब्द के प्रातिपदिक अमरकोश की पर्याय-सूची में नहीं मिले (क्रिया, अव्यय, सर्वनाम व नाम प्रायः अमरकोश में नहीं होते)।
इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।
कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।
कोई कृदन्त पद नहीं पहचाना गया।
कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।
विश्लेषण-समय: ०.१ सेकण्ड