॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण
"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद
अर्थ: सर्वज्ञ
संस्कृत: शुक्राचार्यः, विद्वान् · पर्याय: शुक्र, दैत्यगुरु, काव्य, उशनस्, भार्गव
व्युत्पत्ति: कु-इ
सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):
📗 शब्द-रूपावली में पूरी तालिका
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | कविः | कवी | कवयः |
| द्वितीया | कविम् | कवी | कवीन् |
| तृतीया | कविना | कविभ्याम् | कविभिः |
| चतुर्थी | कवये | कविभ्याम् | कविभ्यः |
| पञ्चमी | कवेः | कविभ्याम् | कविभ्यः |
| षष्ठी | कवेः | कव्योः | कवीनाम् |
| सप्तमी | कवौ | कव्योः | कविषु |
| सम्बोधन | हे कवे | हे कवी | हे कवयः |
रंगीन खाना = आपका लिखा रूप। रूप प्रतिमान (paradigm) से बने हैं; कुछ शब्दों के वैकल्पिक/आर्ष रूप भिन्न हो सकते हैं।
| पदम् | विवरणम् |
|---|---|
| कविः | कवि (पुं.) — प्रथमा विभक्ति, एकवचन अन्य सम्भावना: कवि (स्त्री.) — प्रथमा विभक्ति, एकवचन |
कविः ➤ सर्वज्ञ
संस्कृत: शुक्राचार्यः, विद्वान् · पर्याय: शुक्र, दैत्यगुरु, काव्य, उशनस्, भार्गव
| शब्द | अमरकोश — विषय, पर्याय |
|---|---|
| कवि |
शुक्र के नाम (१.३.२७) — शुक्र, दैत्यगुरु, काव्य, उशना, भार्गव विद्वान् के नाम (२.७.५) — विद्वान्, विपश्चित्, दोषज्ञ, सत्, सुधी, कोविद, बुध, धीर |
ⓘ विषय पर क्लिक करें — अमरकोश का वह मूल श्लोक अन्वय, अनुवाद व भावार्थ सहित खुलेगा; शब्द पर क्लिक करें — शब्द-रूपावली।
इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।
कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।
कोई कृदन्त पद नहीं पहचाना गया।
कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।
विश्लेषण-समय: ०.१ सेकण्ड